सुबह के वक्त पेट ठीक से साफ न होना, पाचन क्रिया का धीमा पड़ना या किसी बीमारी से उबरने के बाद बदन में सुस्ती बने रहना एक आम समस्या है। ऐसी शारीरिक दिक्कतों में मुनक्के का इस्तेमाल घरेलू उपचार के तौर पर बरसों से किया जाता रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अगर मुनक्के को सही तरीके और निश्चित मात्रा में लिया जाए, तो यह शरीर की अलग-अलग परेशानियों में काफी मददगार साबित हो सकता है। आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल बताते हैं कि पारंपरिक तौर पर मुनक्के के साथ खूबकला का मेल पेट की गड़बड़ी, बुखार और खांसी जैसी तकलीफों को कम करने के लिए अपनाया जाता रहा है।
कब्ज और भारीपन से राहत पाने का सही तरीका
लगातार कब्ज की शिकायत झेल रहे लोगों के लिए मुनक्के का व्यवस्थित प्रयोग आंतों की सक्रियता को बेहतर बना सकता है। इसके लिए 4 से 5 मुनक्के लें और सबसे पहले उनके अंदर मौजूद बीजों को बाहर निकाल दें। इसके बाद इन मुनक्कों को सादे पानी में अच्छी तरह उबालें। उबलने के बाद मुनक्के चबाकर खाएं और बचे हुए उबले पानी को पी लें। कई लोग इसे पानी के बजाय दूध में उबालकर पीना पसंद करते हैं, जो सेहत के लिहाज से एक अन्य कारगर विकल्प है।
मुनक्के के भीतर भरपूर मात्रा में प्राकृतिक फाइबर और नेचुरल शुगर मौजूद होती है। जब यह शरीर में पहुंचती है, तो पाचन तंत्र की गतिशीलता सुधरती है और मल त्याग की प्रक्रिया आसान हो जाती है। यदि भोजन करने के उपरांत पेट में भारीपन महसूस होता है या खाया-पिया सही ढंग से पचता नहीं है, तो मुनक्के को अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। इसे पानी में भिगोकर या फिर उबालकर सेवन करना सबसे सरल विधि है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका अत्यधिक सेवन पाचन क्रिया को बिगाड़ भी सकता है, इसलिए प्रतिदिन मात्रा का संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
बुखार और बदन दर्द में खूबकला के साथ प्रयोग
बुखार अथवा शारीरिक थकान और दर्द की स्थिति में मुनक्के के इस्तेमाल का एक विशिष्ट पारंपरिक विधान है। डॉ. मोहम्मद इकबाल के अनुसार 4 से 5 मुनक्के लेकर उनके बीजों को निकाल लें। इसके बाद बीज वाली खाली जगह पर थोड़ी सी मात्रा में खूबकला भरें। खूबकला भरने के पश्चात इन मुनक्कों को तवे पर रखकर धीमी आंच पर हल्का भून लें। यह सिका हुआ मुनक्का शारीरिक पीड़ा और हरारत से राहत दिलाने के लिए पारंपरिक नुस्खों में बहुत उपयोगी माना गया है। आयुर्वेद में खूबकला को विभिन्न प्रकार के घरेलू उपचारों में अहम स्थान दिया गया है।
पुराने मियादी बुखार में उबले मुनक्के का काढ़ा
डॉक्टर के अनुसार लंबे समय से चले आ रहे मियादी बुखार और बदन में जकड़न जैसी तकलीफों से निपटने के लिए करीब 10 ग्राम मुनक्के का उपयोग किया जा सकता है। लगभग 10 ग्राम मुनक्के को साफ पानी में उबालकर इसका काढ़ा तैयार करें और इसे सुबह तथा शाम दोनों वक्त पिएं। हालांकि, लगातार बना रहने वाला तेज बुखार किसी गंभीर संक्रमण अथवा टाइफाइड का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल घरेलू उपचारों के भरोसे बैठे रहना नुकसानदेह साबित हो सकता है, इसलिए समुचित डॉक्टरी जांच और निर्धारित दवाओं का सेवन अनिवार्य है।
गले का सूखापन और खांसी दूर करने के उपाय
गले में खराश, सूखापन या खांसी होने की दशा में मुनक्के को पूरी रात पानी में भिगोकर रखने का नियम बताया गया है। रातभर भीगने के बाद सुबह 4 से 5 मुनक्के अच्छी तरह फूल जाते हैं। सुबह इन फूले हुए मुनक्कों को चबाकर खाएं और साथ ही उस पानी को भी पी लें। कई घरों में इसे दूध के साथ उबालकर लेने की परंपरा भी है। मुनक्का अथवा खूबकला, दोनों का ही अति सेवन नुकसानदायक हो सकता है। खासकर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा पहले से किसी गंभीर रोग की नियमित दवाएं ले रहे मरीजों को इनका सेवन करने से पूर्व योग्य चिकित्सक से सलाह जरूर लेनी चाहिए।



















