पेट में रुक-रुक कर दर्द उठना या कुछ दिन शांत रहने के बाद दोबारा शुरू हो जाना एक ऐसी समस्या है, जिससे बड़ी संख्या में लोग जूझते हैं। कई बार पीड़ित व्यक्ति जब डॉक्टर के पास पहुंचता है और अल्ट्रासाउंड कराता है, तो रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य आती है। डॉक्टर केवल इतना बताते हैं कि आंतों में हल्की सूजन दिख रही है। ऐसी स्थिति में मरीज समझ नहीं पाता कि जब सारी रिपोर्ट ठीक हैं, तो पेट में लगातार दर्द क्यों हो रहा है और इस उलझन में क्या कदम उठाना चाहिए। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. गोविंद मखारिया ने इस स्थिति, आंतों की संवेदनशीलता और इसके उपचार को लेकर विस्तार से जानकारी दी है।
पेट में दर्द और सूजन पैदा होने के प्रमुख कारण
पेट में सूजन और दर्द के पीछे कई चिकित्सीय वजहें हो सकती हैं। डॉ. गोविंद मखारिया के मुताबिक पेट दर्द के सामान्य कारणों में पेप्टिक अल्सर, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, अलग-अलग प्रकार के संक्रमण, क्रोहन डिजीज, अल्सरेटिव कोलाइटिस, सीलिएक डिजीज और यहां तक कि शरीर में खून की कमी भी शामिल हैं। इसके अलावा हमारे पाचन तंत्र में नसों का एक जटिल जाल होता है, जो सीधे मस्तिष्क से जुड़ा रहता है।
जब आंतें अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं, तो सामान्य पाचन प्रक्रिया, हल्की गैस बनने या भोजन के स्वाभाविक संचलन को भी दिमाग तीव्र दर्द के रूप में दर्ज करने लगता है। कभी-कभी आंतों की मांसपेशियों के सामान्य रूप से सिकुड़ने और फैलने का तालमेल गड़बड़ा जाता है, जिससे तेज ऐंठन महसूस होती है। कई मामलों में किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं होती, जिसे चिकित्सीय भाषा में फंक्शनल एब्डोमिनल पेन कहा जाता है। इसका अर्थ यह है कि बिना किसी दृश्य बीमारी के भी व्यक्ति को वास्तविक पेट दर्द का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह समझना बहुत आवश्यक होता है कि दर्द किस प्रकार का है, पेट के किस हिस्से में हो रहा है और किस तरफ महसूस हो रहा है। लगातार कई दिनों तक दर्द रहने पर सबसे पहले चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
सामान्य जांच और अल्ट्रासाउंड में क्यों नहीं पकड़ में आता दर्द
अक्सर लोगों के साथ ऐसा होता है कि पेट का दर्द कुछ समय के लिए उठता है, फिर अपने आप ठीक हो जाता है और यह सिलसिला हफ्तों तक चलता रहता है। डॉ. गोविंद मखारिया बताते हैं कि आंतों में बहुत हल्की और बारीक सूजन होने पर भी गंभीर दर्द बना रह सकता है, लेकिन इसका पता अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों में नहीं चलता। यह सूजन किसी बड़े बैक्टीरियल इन्फेक्शन या ट्यूमर की तरह नहीं होती, बल्कि इसे चिकित्सा विज्ञान में माइक्रोस्कोपिक सूजन या लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन कहा जाता है।
जब आंतों की नसें लगातार किसी दबाव या तनाव में काम करती हैं, तो आंतों की अंदरूनी परत में हल्की जलन और लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन पनप सकता है। यह सूक्ष्म सूजन इतनी महीन होती है कि किसी साधारण लैब टेस्ट या अल्ट्रासाउंड में दिखाई नहीं देती, लेकिन यह आंतों की सामान्य कार्यप्रणाली को पूरी तरह प्रभावित कर देती है। यही वजह है कि इसे फंक्शनल एब्डोमिनल पेन की श्रेणी में रखा जाता है, जहां जांच में कुछ न दिखने पर भी मरीज तकलीफ में रहता है।
भोजन, गैस और आंतों की सूजन से दर्द में उतार-चढ़ाव
आंतों की सूजन से जुड़ा दर्द कभी भी एक समान तीव्रता में नहीं रहता। डॉ. गोविंद मखारिया के अनुसार जब आंतों से भोजन या गैस गुजरती है, अथवा सूजन से प्रभावित हिस्से में ऐंठन उठती है, तो दर्द एकाएक बेहद तेज हो जाता है। इसके विपरीत जब आंतें शांत अवस्था में होती हैं, तो पेट में धीमा या मीठा-मीठा दर्द बना रहता है।
खाना खाने के तुरंत बाद या लगभग 30 से 40 मिनट के भीतर आंतों की गतिविधि तेज हो जाती है, जिससे सूजन वाले हिस्से में तेज मरोड़ और दर्द उठ सकता है। आंतों की अंदरूनी परत में सूजन होने के कारण उनका अंदरूनी मार्ग संकरा अथवा सुस्त हो जाता है। इस सुस्ती की वजह से पाचन के दौरान बनी गैस आसानी से बाहर नहीं निकल पाती और किसी एक जगह पर अटक जाती है। इससे पेट पर भारी दबाव बनता है और दर्द का अहसास होता है। जब यह गैस बाहर निकल जाती है, तो आंतों पर बना दबाव घटता है और मरीज को तुरंत राहत मिलती है। कुछ लोगों का पेट फूला हुआ, कड़ा और ढोलक की तरह तना हुआ महसूस हो सकता है। कई बार मरोड़ उठने के साथ ही अचानक शौच जाने की तीव्र इच्छा होती है और पेट साफ होते ही दर्द काफी हद तक कम हो जाता है।
मानसिक तनाव और गट-ब्रेन एक्सिस की भूमिका
यदि किसी व्यक्ति की आंतों में सूजन है, तो मानसिक तनाव लेने से यह दर्द कई गुना बढ़ सकता है। डॉ. गोविंद मखारिया बताते हैं कि दिमाग और आंतें आपस में लाखों तंत्रिकाओं और हार्मोन्स के माध्यम से लगातार संवाद करती हैं, जिसे चिकित्सा जगत में गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है।
जब कोई व्यक्ति अत्यधिक तनाव में होता है, तो मस्तिष्क कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्राव करता है। ये हार्मोन्स आंतों में स्थित नसों को अत्यधिक संवेदनशील बना देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि आंतों में उठने वाली मामूली सी ऐंठन या थोड़ी सी गैस भी दिमाग को असहनीय दर्द के रूप में महसूस होने लगती है। इसके अतिरिक्त तनाव के समय मानव शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है, जिससे आंतों की मांसपेशियों की स्वाभाविक गति बाधित हो जाती है। आंतों की चाल सुस्त पड़ने से कब्ज की शिकायत होती है और गैस फंसने लगती है, जिससे सूजन वाले हिस्से पर खिंचाव बढ़ता है और दर्द और भड़क जाता है।
लगातार दर्द और कैंसर की दुर्लभ आशंका
डॉ. गोविंद मखारिया स्पष्ट करते हैं कि बहुत दुर्लभ मामलों में यह दर्द कैंसर का लक्षण भी हो सकता है। आम सूजन और कैंसर के दर्द में मुख्य अंतर उनकी प्रकृति का होता है। सामान्य सूक्ष्म सूजन वाला दर्द कभी उठता है तो कभी पूरी तरह गायब हो जाता है, लेकिन कैंसर से होने वाला दर्द लगातार बना रहता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार 15 से 20 दिनों तक बिना किसी ठहराव के एक जैसा दर्द महसूस हो रहा हो, तो उसे बिना देर किए तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
इलाज की सही प्रक्रिया और जीवनशैली में बचाव के उपाय
इस समस्या का समाधान पूरी तरह संभव है। सबसे पहले प्राथमिक चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड और आवश्यक परीक्षणों के आधार पर डॉक्टर समस्या के मूल कारण का आकलन करेंगे और दवाएं देंगे। यदि सामान्य दवाओं से दर्द में सुधार नहीं होता है, तो किसी विशेषज्ञ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।
इस परेशानी से बचाव काफी हद तक आसान है। डॉ. गोविंद मखारिया का सुझाव है कि आंतों की सूजन से बचने के लिए खान-पान की आदतों में सुधार सबसे महत्वपूर्ण कदम है। अपने दैनिक आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को अनिवार्य रूप से शामिल करें। फास्ट फूड, जंक फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाएं। घर पर बना ताजा और सुपाच्य भोजन ग्रहण करें तथा अपनी डाइट में ताजे फल, सीड्स और ड्राई फ्रूट्स का नियमित सेवन करें।



















