उम्र के 45वें पड़ाव पर पहुंचते ही इंसानी शरीर में पोषण की जरूरतें बदलने लगती हैं। इस दौर में जोड़ों और हड्डियों के ढांचे को मजबूत बनाए रखना सबसे अहम प्राथमिकता बन जाता है, जिसके लिए पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम की दरकार होती है। अधिकांश लोग कैल्शियम की पूर्ति के लिए केवल दूध पर आश्रित रहते हैं, लेकिन खानपान में ऐसे कई अन्य पोषक तत्व मौजूद हैं जो शरीर की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकते हैं। सही खाद्य पदार्थों का संतुलन बनाकर हड्डियों के घनत्व को सुरक्षित रखा जा सकता है।
रागी से बनाएं पोषण से भरपूर व्यंजन
फिंगर मिलेट यानी रागी को कैल्शियम का एक बड़ा भंडार माना जाता है। इस अनाज की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें प्रचुर कैल्शियम के साथ-साथ भरपूर मात्रा में फाइबर भी पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखता है। 45 साल की उम्र पार कर चुके लोग रागी के आटे से बनी रोटी, डोसा, चिल्ला या फिर स्वादिष्ट दलिया बनाकर अपनी नियमित खुराक में शामिल कर सकते हैं। इससे रोजाना के भोजन में विविधता आने के साथ जरूरी खनिज भी आसानी से मिल जाते हैं।
तिल के बीजों से मिलेगा भरपूर पोषण
सफेद और काले तिल दोनों ही प्रकार के बीजों में कैल्शियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इनको आहार का हिस्सा बनाना बेहद आसान है। तिल को चटनी, पारंपरिक लड्डू, ताजे सलाद के ऊपर डालकर अथवा सूखी सब्जियों पर छिड़ककर खाया जा सकता है। हालांकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि तिल में वसा और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन करते समय उचित मात्रा का संतुलन साधना जरूरी है।
सोयाबीन और टोफू का बेहतरीन विकल्प
सोयाबीन और उससे तैयार खाद्य पदार्थ कैल्शियम का एक उत्कृष्ट जरिया हैं। विशेष रूप से टोफू उन व्यक्तियों के लिए सबसे उपयोगी विकल्प है जो किसी कारणवश दूध या डेयरी उत्पादों का सेवन करने से बचते हैं। टोफू को दैनिक सब्जियों, हल्के स्टिर-फ्राई व्यंजनों या सलाद में मिलाकर बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक तरीके से परोसा जा सकता है।
हरी पत्तेदार सब्जियों की शक्ति
हरी सब्जियों में पालक, केल, सरसों का साग और अन्य पत्तेदार साग कैल्शियम का प्राकृतिक स्रोत प्रस्तुत करते हैं। इनको सूप, दालों और सामान्य सब्जियों के व्यंजनों में मिलाकर तैयार किया जा सकता है। भोजन की थाली में तरह-तरह की हरी सब्जियों को शामिल करने से कैल्शियम के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण विटामिन्स और मिनरल्स की जरूरत भी पूरी होती है।
दही और पनीर जैसे अन्य डेयरी विकल्प
यदि सादा दूध पीना पसंद न हो, तो दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद कैल्शियम की आपूर्ति का शानदार जरिया बनते हैं। कम चीनी या बिना मीठे वाले दही को दोपहर या रात के भोजन के साथ लिया जा सकता है, जबकि पनीर को विभिन्न सब्जियों, सलाद या हल्के नाश्ते के रूप में आसानी से उपयोग में लाया जा सकता है।
विटामिन D और नियमित देखभाल भी है जरूरी
शरीर में सिर्फ कैल्शियम की खुराक पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसका सही अवशोषण होना भी उतना ही आवश्यक है। हड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन D सबसे अनिवार्य कड़ी है, क्योंकि इसके बिना शरीर कैल्शियम का पूरा उपयोग नहीं कर पाता। इसलिए पोषक तत्वों से युक्त संतुलित भोजन के साथ शारीरिक सक्रियता बनाए रखना और चिकित्सक के परामर्श पर नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना हड्डियों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी कदम है।



















