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सफर में क्यों चकराने लगता है सिर और आती है उल्टी? समझिए मोशन सिकनेस के कारण और बचाव के असरदार उपायस्वास्थ्य
19 सित॰ 2026, 9:37 pm (38 दिन पहले)· 2

सफर में क्यों चकराने लगता है सिर और आती है उल्टी? समझिए मोशन सिकनेस के कारण और बचाव के असरदार उपाय

यात्रा के दौरान आंख और अंदरूनी कान से मिलने वाले विरोधाभासी संकेतों के कारण मोशन सिकनेस होती है। सही सीट के चुनाव, हल्के खानपान और कुछ सावधानियों से इस परेशानी से बचा जा सकता है।

लंबी यात्रा पर निकलते ही कई लोगों का उत्साह उस समय अचानक फीका पड़ जाता है, जब वाहन में बैठते ही तबीयत बिगड़ने लगती है। कार, बस, ट्रेन अथवा हवाई जहाज में सवार होते ही सिर चकराना, बेचैनी होना और जी मिचलाने के साथ उल्टी आने की समस्या बेहद आम है। चिकित्सा जगत में इस शारीरिक असहजता को मोशन सिकनेस के नाम से पहचाना जाता है। दुनिया भर में अनगिनत मुसाफिर इस परेशानी से दो-चार होते हैं, जिससे उनके सफर का पूरा आनंद किरकिरा हो जाता है। इस शारीरिक स्थिति के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझकर और सफर की दिनचर्या में कुछ साधारण बदलाव करके इस उलझन से आसानी से राहत पाई जा सकती है।

दिमाग में पैदा होने वाला भ्रम है इसकी असली वजह

मोशन सिकनेस की सबसे बुनियादी वजह मानव शरीर के संतुलन तंत्र और दृष्टि के बीच तालमेल का टूट जाना है। जब कोई व्यक्ति किसी चलती हुई बस अथवा कार में बैठा होता है, तो उसकी आंखें गाड़ी के भीतरी हिस्से, स्थिर सीटों या केबिन को देखकर दिमाग को यह संकेत भेजती हैं कि शरीर पूरी तरह स्थिर है। इसके ठीक विपरीत, कान का अंदरूनी हिस्सा, जो शरीर की गति और संतुलन को नियंत्रित करता है, वाहन की वास्तविक चाल और गतिशीलता को लगातार महसूस करता रहता है।

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इन परिस्थितियों में मस्तिष्क को दो विपरीत दिशाओं से दो बिल्कुल अलग संदेश प्राप्त होते हैं। एक ओर आंखें स्थिरता का प्रमाण देती हैं, तो दूसरी ओर कान चलने और गतिमान होने की पुष्टि करते हैं। इस आपसी विरोधाभास के कारण दिमाग गंभीर भ्रम का शिकार हो जाता है। इसी संवेदी असंतुलन और भ्रम की प्रतिक्रिया स्वरूप शरीर में घबराहट, चक्कर आना और उल्टी जैसे अवांछित लक्षण उभरने लगते हैं।

शरीर पर दिखने वाले प्रमुख लक्षण

सफर के दौरान सामने आने वाली यह परेशानी केवल पेट की खराबी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह इंसान को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर बेहाल कर देती है। इसके सबसे आम संकेतों में तेज जी मिचलाना, उल्टी आना या लगातार कै होने का अहसास बने रहना, चक्कर आना जिसे वर्टिगो या डिजीनेस भी कहा जाता है, भूख न लगना और पेट में अजीब सी हलचल पैदा होना शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त पीड़ित व्यक्ति को अत्यधिक कमजोरी, असामान्य थकान, सुस्ती और सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। मन का एकाग्र न हो पाना भी इसका एक बड़ा लक्षण है। कई मामलों में व्यक्ति का चेहरा अचानक पीला पड़ने लगता है, माथे पर ठंडा पसीना आता है या फिर अत्यधिक पसीना छूटने के साथ तेज गर्मी लगने लगती है। मुंह में अचानक जरूरत से ज्यादा लार बनने लगना, आंखों के सामने धुंधलापन छा जाना, सांसों की रफ्तार तेज होना और किसी भी तरह की गंध के प्रति असामान्य संवेदनशीलता बढ़ जाना भी मोशन सिकनेस की ही पहचान है।

बच्चों में यह परेशानी ज्यादा क्यों दिखाई देती है?

यूं तो यात्रा की यह असहजता किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, परंतु 2 से 12 साल तक की आयु वाले बच्चों में इसके मामले सर्वाधिक दर्ज किए जाते हैं। इस आयु वर्ग के बच्चों का शारीरिक विकास जारी रहता है और उनके कान का संतुलन तंत्र पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ होता है। यही कारण है कि वे इस संवेदी भ्रम की चपेट में बड़ों के मुकाबले बहुत जल्दी आ जाते हैं।

एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वयस्कों के लिए उपयुक्त समझी जाने वाली सुस्ती लाने वाली दवाएं बच्चों पर अक्सर विपरीत असर दिखाती हैं। ऐसी दवाओं के सेवन से बच्चे शांत होने के बजाय अत्यधिक उत्तेजित या सक्रिय हो सकते हैं। अतः छोटे बच्चों को यात्रा पर ले जाते समय बिना किसी प्रशिक्षित चिकित्सक के परामर्श के कोई भी औषधि देने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

सफर को आरामदायक बनाने के सरल और व्यावहारिक नुस्खे

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र यानी सीडीसी के अनुसार, बिना दवाओं का सहारा लिए भी कुछ प्राथमिक आदतों और घरेलू उपायों के जरिए सफर को सुगम बनाया जा सकता है

  • सवारी में सही जगह बैठें: निजी चौपहिया गाड़ी या बस में सफर करते समय सदैव आगे की तरफ मौजूद सीट का चयन करें। यदि आप रेलगाड़ी अथवा हवाई जहाज से यात्रा कर रहे हैं, तो खिड़की के पास वाली सीट लें ताकि बाहर के दृश्य को आसानी से देखा जा सके।
  • मन का भटकाव तैयार करें: यात्रा के दौरान अपनी एकाग्रता को परेशानी से दूर रखने के लिए हेडफोन लगाकर मधुर और पसंदीदा संगीत सुनें। संगीत सुनने से दिमाग का ध्यान शरीर की उलझन और विपरीत संकेतों से हट जाता है।
  • दूर क्षितिज पर नजर टिकाएं: वाहन की खिड़की से बाहर देखते हुए उस दूरस्थ बिंदु या क्षितिज पर नजर केंद्रित करें जहां धरती और आसमान मिलते हुए प्रतीत होते हैं। यदि बाहर देखना संभव न हो, तो आंखें बंद करके थोड़ी देर के लिए सोने का प्रयास करें।
  • संतुलित खानपान और पानी का सेवन: यात्रा के ठीक पहले या रास्ते में एक साथ भारी और गरिष्ठ भोजन करने से बचें। इसके स्थान पर हल्की मात्रा में थोड़ी-थोड़ी देर में हल्का आहार लें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और पर्याप्त पानी पीते रहें, लेकिन शराब तथा कैफीन से युक्त पेय पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।
  • अदरक और खट्टी चीजों का उपयोग: जैसे ही जी मिचलाने या उल्टी का आभास हो, अदरक के अर्क वाली कैंडी अथवा विशेष स्वाद वाली लोजेंजेस चूसना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
  • तंबाकू और धूम्रपान से दूरी: सफर के दौरान स्मोकिंग करने से पेट की बेचैनी और संवेदी भ्रम और अधिक तीव्र हो सकता है। इसलिए पूरी यात्रा के दौरान धूम्रपान से बिल्कुल दूर रहें।

दवाइयों का उपयोग और आवश्यक सावधानियां

सीडीसी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि घरेलू नुस्खों और जीवनशैली के उपायों से राहत न मिले, तो चिकित्सीय परामर्श के उपरांत औषधियों का उपयोग किया जा सकता है। बाजार में डाइफेनहाइड्रैमाइन (बेनाड्रिल), ड्रामामाइन और स्कोपोलामाइन जैसी दवाइयां उपलब्ध हैं जो सफर की इस बीमारी की तीव्रता को घटाने में मददगार साबित होती हैं।

हालांकि इन दवाइयों के इस्तेमाल को लेकर बेहद सतर्क रहना आवश्यक है क्योंकि इनमें से अधिकांश औषधियां व्यक्ति को तेज नींद, आलस और भारी सुस्ती की स्थिति में धकेल देती हैं। अतः खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह से ही सही खुराक का निर्धारण करना चाहिए। थोड़ी सी पूर्व तैयारी और सही आदतों को अपनाकर कोई भी मुसाफिर अपने सफर को सुरक्षित, सुखद और उल्टी-चक्कर से मुक्त बना सकता है।

सवाल-जवाब

मोशन सिकनेस होने का सबसे मुख्य वैज्ञानिक कारण क्या है?
यह समस्या तब होती है जब आंखों को स्थिरता दिखाई देती है लेकिन कान का अंदरूनी हिस्सा गतिशीलता को भांपता है, जिससे दिमाग में संवेदी भ्रम पैदा हो जाता है।
मोशन सिकनेस के आम शुरुआती लक्षण कौन से हैं?
जी मिचलाना, उल्टी आना, सिर चकराना, अत्यधिक पसीना आना, चेहरा पीला पड़ना और मुंह में ज्यादा लार बनना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
2 से 12 साल के बच्चों में यह समस्या ज्यादा क्यों होती है?
इस उम्र में बच्चों का शारीरिक संतुलन तंत्र पूरी तरह विकसित हो रहा होता है, इसलिए वे गति के विपरीत संकेतों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
यात्रा के दौरान उल्टी रोकने के लिए किस तरह की सीट चुननी चाहिए?
कार या बस में हमेशा आगे की सीट पर बैठें और ट्रेन या हवाई जहाज में खिड़की वाली सीट चुनें ताकि बाहर क्षितिज को देखा जा सके।
सफर में जी मिचलाने पर कौन से घरेलू नुस्खे राहत देते हैं?
अदरक की कैंडी या खट्टी लोजेंजेस चूसना, पसंदीदा संगीत सुनना और बाहर क्षितिज की ओर नजर टिकाना बेहद असरदार साबित होता है।
क्या मोशन सिकनेस के लिए बाजार में दवाएं उपलब्ध हैं?
सीडीसी के अनुसार डाइफेनहाइड्रैमाइन (बेनाड्रिल), ड्रामामाइन और स्कोपोलामाइन जैसी दवाइयां मौजूद हैं, लेकिन इनका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
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