पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बारिश का दौर थमने के बाद भी दुर्गम इलाकों में बुनियादी रास्तों की बदहाली स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा रही है। सिरमौर जिले के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में दिल को झकझोर देने वाला वाकया सामने आया है, जहाँ संपर्क मार्ग ठप होने के चलते एक परिवार को अपनी बुजुर्ग परिजन का शव अस्पताल से घर तक पहुँचाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। वाहन आगे जाने का रास्ता न मिलने पर ग्रामीणों ने बांस के डंडे का सहारा लिया और पार्थिव देह को छह किलोमीटर पैदल उठाकर गाँव तक पहुँचाया, जिसके बाद ही उनका अंतिम संस्कार संभव हो सका।
चंडीगढ़ में उपचार के दौरान तोड़ा था दम
नाहन उपमंडल के अंतर्गत धारटीधार इलाके की ग्राम पंचायत घगेड़ा में स्थित टीना गुलरवाला गाँव की अस्सी साल की निवासी परमा देवी काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं। शनिवार की देर रात अचानक उनकी हालत अधिक नाजुक हो गई, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें तुरंत नाहन के अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें चंडीगढ़ स्थित पीजीआई रेफर कर दिया। वहाँ चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार तड़के करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
पथरीले पगडंडी रास्तों पर छह किलोमीटर की कठिन यात्रा
अस्पताल से कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परिजन शव वाहन के जरिए पार्थिव शरीर को लेकर गृह क्षेत्र के लिए रवाना हुए। गाड़ी धारटीधार और रामा घगेड़ा के बीच संपर्क मार्ग तक तो पहुँच गई, मगर टीना गुलरवाला की ओर मुड़ने वाली सड़क मलबे और टूट-फूट की वजह से पूरी तरह अवरुद्ध थी। चारपहिया वाहन का आगे जाना असंभव देखकर गाँव के लोग एकत्र हुए। उन्होंने शव को एक मजबूत डंडे से सुरक्षित बांधा और बारी-बारी से अपने कंधों पर टिकाकर ऊबड़-खाबड़, चट्टानी और जोखिम भरे रास्ते से चलना शुरू किया। करीब छह किलोमीटर की यह कठिन पैदल दूरी तय करके वे गाँव पहुँचे और फिर वहाँ के श्मशान घाट पर विधि-विधान से दाह संस्कार संपन्न हुआ।
बरसात के आरंभ से ही ठप पड़ा है संपर्क मार्ग
इलाकाई बाशिंदों का कहना है कि यह सड़क इस साल बारिश का मौसम शुरू होने के बाद से ही क्षतिग्रस्त होकर बंद पड़ी है। राज्य में मॉनसून का आगमन तीस जून को हुआ था और तीन अक्टूबर को उसकी विदाई भी दर्ज की जा चुकी है। इस बार मौसमी बरसात सामान्य से कम रहने के बावजूद पहाड़ी ढलानों से गिरे मलबे को हटाकर इस मार्ग को यातायात योग्य नहीं बनाया जा सका।
साल 2014 में हुआ था आठ किलोमीटर लंबे मार्ग का उद्घाटन
स्थानीय विवरण के अनुसार, लगभग आठ किलोमीटर की लंबाई वाले इस टीना गुलरवाला मार्ग की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। उस वक्त नाहन क्षेत्र के तत्कालीन विधायक राजीव बिंदल ने इसका विधिवत उद्घाटन किया था। यह संपर्क रास्ता आगे जाकर जलमूसा तथा कोलर के निकट स्थित कटासन मंदिर के पास पांवटा साहिब-कालाअंब राष्ट्रीय राजमार्ग से जा मिलता है। इलाके के प्रमुख हाईवे को जोड़ने वाला यह अहम लिंक मार्ग महीनों से बंद रहने से ग्रामीणों की दैनिक आवाजाही और आपातकालीन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं।
























