उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री हिमालय के दुर्गम केदारताल ट्रैक पर अचानक बदले मौसम और हिमस्खलन के चलते सात ट्रैकर्स और एक स्थानीय गाइड का संपर्क कट गया है। करीब 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर घने हिमपात के बीच तीसरे दिन भी इन आठ लापता व्यक्तियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। स्थानीय जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की टीमें विपरीत मौसम के बीच लगातार राहत एवं खोज अभियान चला रही हैं।
12 सदस्यीय दल का सफर और मौसम का प्रकोप
यह 12 सदस्यीय ट्रैकिंग दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था। बीते गुरुवार को उच्च हिमालयी क्षेत्र में अचानक हालात बिगड़ गए और भीषण बर्फबारी शुरू हो गई। इस दौरान ग्लेशियर टूटने और हिमस्खलन की वजह से पूरा ट्रैक अवरुद्ध हो गया, जिससे यह दल दो अलग-अलग हिस्सों में बंट गया।
शुरुआती खतरे को देखते हुए बचाव दलों ने त्वरित कदम उठाते हुए कच्ची ढांग के निकट फंसे चार सपोर्टिंग स्टाफ को सुरक्षित निकाल लिया था। हालांकि, भोजखड़क से आगे निकल चुके सात पर्यटक और एक गाइड हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद शेष दल से पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए। उस समय बचाव दल और इन पर्यटकों के बीच केवल कुछ किलोमीटर का फासला था, लेकिन भारी बर्फबारी ने आगे बढ़ने की राह रोक दी।
लापता लोगों की पहचान और परिजनों की चिंता
लापता आठ लोगों में पश्चिम बंगाल के 5 ट्रैकर्स, उत्तर प्रदेश के 2 ट्रैकर्स तथा उत्तरकाशी के रहने वाले स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा शामिल हैं। सिद्धार्थ राणा के परिजनों ने प्रशासन से खोज अभियान को और अधिक तेज करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही परिजनों ने संबंधित ट्रैकिंग एजेंसी पर समय रहते प्रशासन को सूचना न देने का आरोप भी लगाया है।
इससे पहले 30 अक्टूबर को ट्रैकिंग एजेंसी के माध्यम से फोन पर संपर्क स्थापित हुआ था, जिसमें ट्रैकर्स ने कच्ची ढांग के पास सुरक्षित होने की बात कहते हुए फौरन मदद मांगी थी। सूचना मिलने पर एजेंसी ने कुली और गाइड की एक टीम रवाना की, जिसने भारी मशक्कत करते हुए लगभग 6 किलोमीटर तक बर्फ हटाकर रास्ता साफ करने की कोशिश की थी।
हेलीकॉप्टर से हवाई रेकी और जमीनी बचाव अभियान
हवाई और जमीनी स्तर पर राहत कार्य को आगे बढ़ाने के लिए कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। शनिवार सुबह 6 बजे राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 10 सदस्यीय टीम उत्तरकाशी से गंगोत्री के लिए रवाना हुई थी। इसके साथ ही SDRF के 6 जवान, वन विभाग के 2 सदस्य और ट्रैकिंग एजेंसी के 7 सदस्य भी ग्राउंड रेस्क्यू में जुटे।
रविवार को दूसरे दिन मौसम में मामूली सुधार के दौरान हेलीकॉप्टर की मदद से केदारताल और भोजखड़क क्षेत्र में दो बार हवाई निरीक्षण किया गया, लेकिन बर्फ से ढके पूरे इलाके में ट्रैकर्स या उनके टेंट का कोई सुराग नहीं दिखा। सोमवार सुबह करीब 7 बजकर 35 मिनट पर देहरादून से एक हेलीकॉप्टर हर्षिल स्थित सेना के हेलीपैड पर पहुंचा। इसके बाद सुबह 8 बजकर 35 मिनट पर NIM के 2 और SDRF के 6 सदस्यों सहित कुल 8 रेस्क्यू कर्मियों को हेलीकॉप्टर से केदारताल अभियान के लिए भेजा गया।



















