न्याय का फैसला
कोटा में एडीजे कोर्ट-2 ने एक हृदय विदारक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक मां और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वर्ष 2020 में घटी इस घटना के लिए अदालत ने दोषियों पर 30-30 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। TrendKia के अनुसार, यह मामला तब शुरू हुआ जब 4 वर्षीय बच्ची नंदिनी सीढ़ियों से गिरकर बुरी तरह जख्मी हो गई थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए किसी बड़े अस्पताल में ले जाने की सिफारिश की थी, लेकिन इलाज का खर्च बचाने के लालच में मां और उसके प्रेमी ने नंदिनी की जान लेने की खौफनाक साजिश रची।
साजिश और सबूत
जांच में पता चला कि दोनों आरोपियों ने गला दबाकर मासूम नंदिनी की हत्या कर दी। अपराध को छिपाने के लिए उन्होंने शव को जंगल में ठिकाने लगा दिया और बच्ची के गुमशुदा होने की झूठी कहानियां फैलाईं। पुलिस के लिए मामले की सबसे बड़ी सफलता जंगल से बरामद हुई एक खोपड़ी बनी। DNA टेस्ट के जरिए इस खोपड़ी की पहचान नंदिनी के रूप में हुई, जिससे साक्ष्यों की कड़ियां जुड़ गईं और पुलिस आरोपियों तक पहुंच सकी।
कानूनी कार्रवाई और कोर्ट की टिप्पणी
बोरखेड़ा निवासी सुमित यादव की शिकायत पर बुढ़ादित थाने में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी महिला को जयपुर से गिरफ्तार किया, जिसके बाद पूछताछ में उसने और उसके प्रेमी ने जुर्म कुबूल कर लिया। TrendKia ने बताया कि फैसला सुनाते हुए अदालत ने अत्यंत गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जिस ममता और मां की गोद को बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है, उसी मां ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर न केवल अपनी बेटी को मार डाला, बल्कि उसके शव को भी जंगल में फेंक दिया। अदालत का मानना है कि यदि बच्चा मां के पास भी असुरक्षित है, तो यह संपूर्ण समाज के लिए चिंताजनक है।













