जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में स्थित अकरमाबाद इलाके से पुलिस की कथित प्रताड़ना का एक मामला सामने आया है। यहां कुछ पुलिसकर्मियों पर एक ऑटो-रिक्शा चालक की बेरहमी से पिटाई करने का गंभीर आरोप लगा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मारपीट इतनी तीव्र थी कि पीड़ित युवक मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़ा। घटना के तुरंत बाद इलाके में तनाव फैल गया और स्थानीय लोगों के साथ पीड़ित के परिजनों ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।
मां का गुस्सा और पुलिस वाहन के सामने विरोध
बेटे के साथ हुई इस बर्बरता की सूचना मिलते ही पीड़ित की मां तुरंत अकरमाबाद स्थित घटना स्थल पर पहुंची। अपने बेटे को सड़क पर बेहोश पड़ा देखकर महिला का गुस्सा फूट पड़ा। जब आरोपी पुलिसकर्मी मौके से अपनी गाड़ी लेकर निकलने का प्रयास कर रहे थे, तब पीड़ित की मां निर्भीक होकर पुलिस वाहन के ठीक आगे आकर खड़ी हो गई और उनका रास्ता रोक दिया।
महिला के इस साहसी विरोध को देखकर आसपास के राहगीरों और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ वहां एकत्रित हो गई। देखते ही देखते मौके पर जोरदार हंगामा शुरू हो गया। एकत्रित भीड़ ने पुलिस बल द्वारा की गई इस हिंसा पर कड़े सवाल उठाए और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का आश्वासन और जांच
मामले के तूल पकड़ने और मौके पर विरोध प्रदर्शन बढ़ने के बाद पुलिस महकमे के उच्च अधिकारी हरकत में आए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष कदम उठाने का भरोसा दिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई जाएगी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया कि यदि जांच में संबंधित पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस कार्रवाई पर उठते सवाल
हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से पुलिस कस्टडी और सड़क पर प्रताड़ना के कई मामले सामने आए हैं। उत्तराखंड के देहरादून में युवा महोत्सव के दौरान एक छात्र की डंडों से पिटाई का मामला हो या हरियाणा के हांसी में सीआईए कस्टडी में युवक की मौत का प्रकरण, पुलिस कार्रवाई की सीमाओं पर लगातार बहस छिड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और अंबेडकरनगर में भी पुलिस प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगे हैं। डोडा की यह ताज़ा घटना एक बार फिर कानून व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा के बीच संतुलन पर सवाल खड़े करती है।



















