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साहिबगंज में गंगा की तेज लहरों से रेल पटरी के पास धंसी जमीन, ट्रेनों के फेरे रद्द और रूट बदलेझारखंड
30 सित॰ 2026, 10:01 pm (1 घंटे पहले)· 0

साहिबगंज में गंगा की तेज लहरों से रेल पटरी के पास धंसी जमीन, ट्रेनों के फेरे रद्द और रूट बदले

झारखंड के साहिबगंज में गंगा नदी के भीषण कटाव से रेलवे पटरी के पास की मिट्टी खिसक गई है, जिसके चलते एक पैसेंजर ट्रेन को रद्द करना पड़ा और कई गाड़ियों के रूट बदले गए हैं।

झारखंड के साहिबगंज जिले में गंगा नदी के उफान और जलप्रवाह से किनारों पर तेज कटाव शुरू हो गया है, जिससे रेल पटरियों की सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पूर्व रेलवे के मालदा मंडल के तहत आने वाले साहिबगंज और बरहरवा रेलखंड के मध्य यह स्थिति अचानक काफी बिगड़ गई। महाराजपुर एवं सकरीगली स्टेशनों के बीच मौजूद झुंझरी पुल के समीप मंगलवार दोपहर नदी का कटाव अप्रत्याशित रूप से तेज हुआ, जिससे डाउन लाइन पर मौजूद बिजली के खंभे संख्या 219/32 के करीब की जमीन धंस गई। कटाव के चलते नदी का पानी रेल पटरियों से सिर्फ लगभग 15 मीटर की दूरी पर बह रहा है, जिसके कारण रेल प्रशासन को फौरन यातायात नियंत्रण और ट्रैक संरक्षण के कड़े कदम उठाने पड़े हैं।

बोल्डर और मलबे से कटावरोधी कार्य में जुटी रेलवे की टीम

जमीन धंसने और मिट्टी खिसकने की खबर सामने आते ही रेलवे के तकनीकी विभाग और कार्यदल ने तत्परता दिखाते हुए घटनास्थल की ओर कूच किया। पटरी के समानांतर हो रहे भूकटाव को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर राहत कार्य शुरू किया गया है। ट्रैक के किनारे धंसे हुए गड्ढों और कमजोर स्थानों पर भारी मात्रा में पत्थर के बोल्डर, गिट्टी, गर्दी और अन्य सुरक्षात्मक सामग्री गिराई जा रही है। कर्मचारियों की टीम मौके पर लगातार कैंप कर रही है ताकि पानी के बहाव से मिट्टी का कटना आगे न बढ़ सके और मुख्य ट्रैक के नीचे का आधार पूरी तरह सुरक्षित रहे।

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कई ट्रेनें हुईं प्रभावित, यात्रियों को झेलनी पड़ी मुश्किलें

पटरी के निकट कटाव की गंभीरता को भांपते हुए रेल परिचालन में कई तात्कालिक बदलाव किए गए हैं। साहिबगंज से रामपुरहाट जाने वाली डाउन पैसेंजर गाड़ी संख्या 63406 को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया। इसी प्रकार जमालपुर से रामपुरहाट जाने वाली डाउन पैसेंजर गाड़ी संख्या 53408 की यात्रा को गंतव्य से पहले ही समाप्त कर केवल साहिबगंज तक सीमित कर दिया गया। शाम के वक्त करीब पांच बजे साहिबगंज स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या तीन पर मौजूद रामपुरहाट जाने वाली एक लोकल ट्रेन को भी सुरक्षा कारणों से आगे नहीं बढ़ने दिया गया। यह गाड़ी लगभग डेढ़ घंटे तक प्लेटफॉर्म पर ही खड़ी रही, जिससे दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

भागलपुर मार्ग की गाड़ियों के रास्ते बदले, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा

नदी के पानी के नजदीकी दबाव को देखते हुए भागलपुर की दिशा से साहिबगंज की तरफ आने वाली कई प्रमुख ट्रेनों का रास्ता भी बदल दिया गया है। महाराजपुर स्टेशन के प्रबंधक अमरजीत कुमार के अनुसार, खंभा संख्या 219/32 के पास मिट्टी खिसकने की सूचना मिलते ही वरिष्ठ नियंत्रकों और तकनीकी अधिकारियों को तत्काल अलर्ट भेजा गया था। इसके तुरंत बाद विशेष टीमों को राहत उपकरणों के साथ रवाना किया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए मालदा के अपर मंडल रेल प्रबंधक सहित अन्य वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों के भी महाराजपुर पहुंचकर जमीनी निरीक्षण करने की संभावना बनी हुई है। प्रशासन का मुख्य जोर इस बात पर है कि किसी भी सूरत में रेल पटरी को संरचनात्मक नुकसान न पहुंचे और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सवाल-जवाब

साहिबगंज में रेलवे ट्रैक के पास क्या घटना घटी है?
साहिबगंज-बरहरवा रेलखंड पर महाराजपुर और सकरीगली के बीच गंगा नदी के कटाव से पटरी के निकट की मिट्टी धंस गई है और पानी ट्रैक से सिर्फ 15 मीटर दूर रह गया है।
कटाव के कारण किस ट्रेन को पूरी तरह रद्द किया गया है?
साहिबगंज-रामपुरहाट डाउन पैसेंजर ट्रेन संख्या 63406 को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है।
किन अन्य ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है?
जमालपुर-रामपुरहाट पैसेंजर ट्रेन (53408) को केवल साहिबगंज तक चलाया गया और भागलपुर से साहिबगंज आने वाली कई गाड़ियों के रूट बदले गए हैं।
रेलवे द्वारा ट्रैक की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
रेलवे की टीम धंसी हुई मिट्टी वाली जगह पर बोल्डर, गिट्टी और सुरक्षात्मक सामग्री डालकर कटाव रोकने का काम कर रही है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

पटरियों से पंद्रह मीटर दूर पानी होना वाकई डरावना है, पर इतनी जल्दी ट्रेनें रद्द करने से क्या वाकई कोई बड़ा हादसा टल गया?

Karan Malhotra@karan-malhotra·47 मिनट पहले

रोहन, पटरी से सिर्फ पंद्रह मीटर दूर पानी होना वाकई डरावना है। क्या रेलवे के पास कटाव रोकने का कोई स्थायी इंतजाम नहीं है, या हर साल मानसून में यही हाल रहेगा?

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