भीलवाड़ा में घरों के अंदर रसोई की शेल्फ पर आलू एक ऐसी जरूरी सब्जी है जिसके बिना ज्यादातर पकवान अधूरे माने जाते हैं। सुबह की सब्जी हो, शाम के पराठे हों या फिर स्नैक्स में बनने वाले पकौड़े, हर जगह आलू की मांग बनी रहती है। यही वजह है कि लोग अक्सर बाजार से एक साथ भारी मात्रा में आलू खरीदकर घर ले आते हैं, ताकि बार-बार खरीदारी न करनी पड़े। लेकिन स्टोर करने का सही तरीका न पता होने की वजह से कुछ ही दिनों में इन पर अंकुर फूटने लगते हैं, वे सड़ने लगते हैं या फिर उनकी त्वचा पर झुर्रियां पड़ जाती हैं। इस तरह आलू खराब होने से गृहणियों की मेहनत के साथ-साथ पैसों की भी बर्बादी होती है। इन समस्याओं से बचने के लिए कुछ बेहद सरल और असरदार घरेलू उपायों की मदद ली जा सकती है, जिससे आलू लंबे समय तक बिल्कुल तरोताजा बने रहते हैं।
सही जगह और हवादार बर्तनों का चुनाव
आलू को लंबे समय तक सुरक्षित और ताजा बनाए रखने के लिए सबसे पहली और जरूरी शर्त यह है कि उन्हें सही जगह पर सही तरीके से रखा जाए। अक्सर लोग लापरवाही में आलू को प्लास्टिक की बंद थैली या पॉलीथिन में ही छोड़ देते हैं, जिसकी वजह से अंदर नमी यानी मॉइस्ट जमा होने लगता है और आलू बहुत जल्दी गलने या खराब होने लगते हैं। इसलिए आलू को हमेशा ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां हवा का अच्छा आवागमन हो। भंडारण के लिए हमेशा ऐसी जगह का चुनाव करें जहां सूरज की सीधी किरणें न पहुंचती हों और कमरे का तापमान सामान्य से थोड़ा ठंडा हो। तेज रोशनी के संपर्क में आने से आलू का रंग हरा पड़ने लगता है और उनमें तेजी से अंकुर निकलने लगते हैं। इसलिए इन्हें रसोई के किसी अंधेरे लेकिन हवादार कोने में रखना सबसे बेहतर रहता है। आलू को प्लास्टिक की थैली में रखने के बजाय हमेशा जूट के बोरे, कागज के थैलों या फिर किसी हवादार टोकरी में ही स्टोर करना चाहिए, जिससे वेंटिलेशन बना रहता है और नमी इकट्ठा नहीं हो पाती।
प्याज के साथ भंडारण और फ्रिज में रखने से परहेज
आलू और प्याज को एक ही जगह पर इकट्ठा करके रखने की भूल कभी नहीं करनी चाहिए। दोनों ही सब्जियों से निकलने वाली प्राकृतिक गैसें और नमी एक-दूसरे के संपर्क में आकर भंडारण की स्थिति को बिगाड़ सकती हैं, जिससे वे तेजी से खराब होने लगते हैं। इसलिए इन दोनों को हमेशा अलग-अलग स्थानों पर ही स्टोर करना समझदारी है। इसके अलावा, घर में रखे हुए आलू की समय-समय पर नियमित रूप से जांच करते रहना बेहद जरूरी है। यदि आपको लगता है कि कोई आलू सड़ने लगा है, उस पर फफूंद जम गई है या वह दबाने पर बहुत ज्यादा नरम हो गया है, तो उसे तुरंत बाकी अच्छे आलू से अलग कर देना चाहिए। ऐसा करने से बाकी के आलू भी सुरक्षित बच जाते हैं और संक्रमण आगे नहीं फैलता। आलू को कभी भी स्टोर करने से पहले पानी से नहीं धोना चाहिए; इसे हमेशा इस्तेमाल करने से ठीक पहले ही धोना चाहिए। भंडारण से पहले धोने पर इसकी सतह पर नमी रह जाती है, जिससे फंगस और सड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, कच्चे आलू को कभी भी रेफ्रिजरेटर या फ्रिज के अंदर नहीं रखना चाहिए। फ्रिज के अत्यधिक ठंडे तापमान की वजह से आलू के भीतर मौजूद स्टार्च शुगर यानी शर्करा में बदलने लगता है, जिससे न सिर्फ उसका प्राकृतिक स्वाद बिगड़ जाता है बल्कि पकाने के दौरान उसका रंग भी काला या अजीब हो जाता है।



















