झारखंड के बोकारो में सोशल मीडिया की लोकप्रियता का एक अनोखा और जमीनी असर सड़क किनारे लगने वाले एक स्ट्रीट फूड ठेले पर देखने को मिल रहा है। इंटरनेट पर लाखों फॉलोअर्स बनाने वाले कंटेंट क्रिएटर आर्यन केल्विन की डिजिटल पहचान अब उनके अपने परिवार के कारोबार को नई रफ्तार दे रही है। बोकारो के सेक्टर चार में जगन्नाथ मंदिर के सामने लगने वाले चाट के ठेले को उनके सगे चाचा पप्पू पंडित चलाते हैं। उन्होंने अपने कारोबार को भतीजे की ऑनलाइन शोहरत से जोड़ते हुए स्टॉल का नाम 'आर्यन केल्विन भेलपुरी' रख दिया है, जिसने इलाके के युवाओं और बच्चों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
पोस्टर से बढ़ी उत्सुकता और ग्राहकों का जुड़ाव
पप्पू पंडित के अनुसार, आर्यन केल्विन उनके बड़े भाई राजेश पंडित के बेटे हैं। परिवार में तीन सगे भाई हैं और कुल मिलाकर करीब 10 से 15 भाईयों का संयुक्त परिवार है। जब भतीजे ने डिजिटल मंचों पर अपनी मजबूत पहचान बनाई, तो पूरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल बन गया। चाचा ने अपने स्टॉल पर जैसे ही आर्यन के नाम का पोस्टर लगाया, वैसे ही बाजार में आने वाले लोगों और खासकर स्कूली बच्चों में उत्सुकता पैदा हो गई। राह चलते लोग केवल बोर्ड देखकर ठेले पर ठहर जाते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि दुकानदार का उस लोकप्रिय चेहरे से क्या नाता है। जब लोगों को सच्चाई का पता चलता है, तो वे न केवल बातचीत करते हैं बल्कि खुशी-खुशी नाश्ता भी करते हैं।
मुफ्त पापड़ी और सम्मान के साथ सेवा
अपने युवा ग्राहकों और भतीजे के प्रशंसकों को खुश रखने के लिए पप्पू पंडित ने एक खास तरीका निकाला है। दुकान पर आने वाले बच्चों को वे बिना किसी अतिरिक्त पैसे के प्यार से दो-दो पापड़ी एक्स्ट्रा देते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी प्लेट की मात्रा में भी इजाफा कर दिया है। सामान्य तौर पर बाजार में पापड़ी चाट या बटाटा पुरी में आठ पापड़ी दी जाती हैं, लेकिन वे ग्राहकों को आठ की जगह पूरे 10 पापड़ी परोसते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि ठेला लगाने का उद्देश्य सिर्फ कमाई करना नहीं है, बल्कि अपनी ईमानदारी और मेहनत के दम पर समाज में सम्मान और पहचान हासिल करना है।
वर्ष 2000 से जारी है संघर्ष का सफर
पप्पू पंडित की यह सफलता रातों-रात नहीं आई है। वे वर्ष 2000 में रोजी-रोटी की तलाश में बोकारो पहुंचे थे। शुरुआती दौर में उन्होंने झालमुड़ी बेचकर अपना काम शुरू किया था। लगातार कड़े परिश्रम के बाद उन्होंने धीरे-धीरे भेलपुरी और चाट का ठेला लगाना शुरू किया, जिससे पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से उनके पूरे परिवार का गुजारा चल रहा है। पारिवारिक मेल-जोल के बारे में बताते हुए उन्होंने साझा किया कि भतीजे आर्यन से उनकी पिछली मुलाकात रथ पूजा के अवसर पर हुई थी। आर्यन को खुद भी भेलपुरी खाना काफी पसंद है, इसलिए उनके नाम पर यह काम करते हुए चाचा को दिली संतोष मिलता है।
बिक्री में उछाल और स्टॉल का नया ठिकाना
इस अनूठी पहचान का सीधा फायदा कारोबार के आंकड़ों में दिख रहा है। पहले जहां रोजाना लगभग 100 प्लेट बिक पाती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर प्रतिदिन 150 से 200 प्लेट तक पहुंच चुका है। उनके मेन्यू में भेलपुरी के साथ-साथ दहीपुरी, पापड़ी चाट और बटाटा पुरी शामिल हैं, जिनमें बटाटा पुरी और पापड़ी चाट की मांग सबसे ज्यादा रहती है। सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक चलने वाले इस काम के अलावा, शाम 4 बजे के बाद बोकारो के सेक्टर चार में सिटी मॉल के पास भी स्टॉल सजता है, जहां ₹70 में लजीज भेलपुरी का स्वाद चखा जा सकता है।



















