पारंपरिक अनाज जैसे गेहूं और मक्का की तुलना में किसान अब बड़े पैमाने पर सब्जियों की नकदी फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं। हरी सब्जियों की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि फसल तैयार होते ही खेत से ही तुरंत नकद आमदनी मिलने लगती है, जिससे किसानों की जेब में समय पर पैसा आ जाता है। हालांकि, गोभी की खेती करते समय कई काश्तकार शुरुआती स्तर पर कुछ गंभीर गलतियां कर बैठते हैं। इन गलतियों के चलते गोभी का फूल पूरा आकार नहीं ले पाता, गुणवत्ता कमजोर रह जाती है और मंडी में उपज का उचित भाव नहीं मिल पाता। गोभी की सफल फसल पूरी तरह इस बात पर टिकी होती है कि बुवाई से पहले खेत की मिट्टी को किस प्रकार तैयार किया गया है।
गोभी की बुवाई के लिए खेत की सही तैयारी
गोभी का बेहतर उत्पादन लेने के लिए सबसे बुनियादी कदम खेत की महीन जुताई करना है। मिट्टी को भुरभुरा बनाने के बाद उसमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद और सरसों की खली को मिट्टी में मिलाना चाहिए। इसके साथ ही, मिट्टी जनित कीटों और बीमारियों से बचाव के लिए जमीन में कीटनाशक दवा का छिड़काव पहले ही कर देना चाहिए। यह सारी तैयारी पूरी करने के बाद खेत को लगभग एक सप्ताह के लिए ऐसे ही छोड़ देना चाहिए ताकि खाद और मिट्टी आपस में अच्छी तरह मिल जाएं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रबंधन
जो किसान बाढ़ प्रभावित या जलभराव वाले इलाकों में गोभी लगाना चाहते हैं, उनके लिए तरीका थोड़ा अलग होता है। ऐसे क्षेत्रों में खेत की पहले से जुताई और खाद मिलाने की प्रक्रिया में वक्त गंवाने की जरूरत नहीं होती। जैसे ही खेत से बाढ़ का पानी बाहर निकले, बिना किसी देरी के तुरंत गोभी के पौधों की रोपाई कर देनी चाहिए। यदि किसान पानी निकलने के बाद जुताई और खेत सुखाने का इंतजार करेंगे, तो मौसम निकल जाएगा और फसल काफी पिछड़ जाएगी। इसलिए रोपाई तुरंत करें और फिर गोबर की खाद, सरसों की खली व जरूरी पोषक तत्व पौधों की जड़ों के पास अलग से डालें।
रोपाई के दो तरीके और जड़ सड़न से बचाव
खेत तैयार होने के बाद गोभी लगाने के दो प्रचलित तरीके अपनाए जाते हैं। पहले तरीके में किसान रोपाई करने से पहले पूरे खेत में हल्का पानी लगा देते हैं और उसके बाद पौधे रोपते हैं। दूसरे तरीके में सूखे खेत में पहले पौधों की रोपाई की जाती है और उसके तुरंत बाद पानी दिया जाता है। यदि रोपाई के बाद सिंचाई की जा रही है, तो पूरे खेत को पानी से भरने की भूल कभी नहीं करनी चाहिए। शुरुआत के एक सप्ताह तक केवल पौधे की जड़ों के आसपास ही सीमित मात्रा में पानी देना चाहिए। अगर पूरे खेत में ज्यादा पानी भर दिया जाए, तो नाजुक पौधे की जड़ें गल सकती हैं और फसल खराब हो सकती है। एक बार जब पौधे जमीन में अपनी जड़ें मजबूती से जमा लें, तब पूरे खेत की सामान्य सिंचाई की जा सकती है। इस सटीक तकनीक से गोभी के फूल का साइज काफी बड़ा और ठोस बनता है।


















