शहरी घरों की बालकनी में अगर बागवानी का शौक पूरा करना हो, तो सितंबर का मौसम खीरे की बुवाई के लिए काफी मुफीद साबित होता है। खीरे की बेलें बहुत अधिक क्षैतिज फैलाव की मांग नहीं करतीं, बल्कि इन्हें लंबवत दिशा में सहारा देकर बहुत कम जगह में भी आसानी से चढ़ाया जा सकता है। अगर बीज बोने के शुरुआती चरण से ही गमले के आकार, मिट्टी की उर्वरता, पानी के निकास और धूप की उपलब्धता का ख्याल रखा जाए, तो महज 40 से 50 दिनों की अवधि के भीतर यह पौधा ताजे फलों की पैदावार शुरू कर देता है।
सही माप का गमला और जल निकासी की व्यवस्था
खीरा मूल रूप से एक बेलदार वनस्पति है, जिसकी जड़ प्रणाली को भीतर तक मजबूती से फैलने के लिए पर्याप्त आयतन की आवश्यकता होती है। इसके लिए कम से कम 12 से 15 इंच गहरा और उतना ही चौड़ा कंटेनर अथवा गमला चुनना सबसे उपयुक्त रहता है। साधारण मिट्टी के गमलों के अलावा इसी आकार के फैब्रिक या प्लास्टिक ग्रो बैग का चयन भी बालकनी के लिए किया जा सकता है। कंटेनर में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सुनिश्चित करना है कि उसके निचले हिस्से में जल निकासी के लिए उचित छेद बने हों। अगर अतिरिक्त पानी नीचे से बाहर नहीं निकलेगा, तो गमले के भीतर नमी सड़न पैदा कर सकती है।
पोषक तत्वों से भरपूर भुरभुरी मिट्टी तैयार करना
इस बेल को पनपने के लिए ऐसी मिट्टी की दरकार होती है जो भुरभुरी हो और जिसमें अतिरिक्त जल आसानी से छनकर निकल जाए। पौधे के स्वस्थ विकास के लिए सामान्य बगीचे की मिट्टी में वर्मीकम्पोस्ट या फिर अच्छी तरह से सड़ी हुई जैविक खाद मिलाना आवश्यक होता है। गमले में कभी भी अत्यधिक भारी, चिकनी या गाद वाली मिट्टी न भरें, क्योंकि ऐसी मिट्टी पानी को सोखकर दलदल बना देती है, जिससे जड़ें गलने लगती हैं। बीजारोपण से ठीक पहले पूरी मिट्टी को खुरपी से उलट-पलट कर अच्छी तरह ढीला और वायु-युक्त बना लेना चाहिए।
बीज बोने की सही तकनीक और छंटाई
बुवाई के लिए हमेशा उच्च गुणवत्ता वाले और रोगमुक्त प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करना चाहिए। गमले की मिट्टी के बीच में करीब 1 से 1.5 इंच की गहराई वाला गड्ढा बनाकर उसमें 2 से 3 बीज डाल दें। इसके बाद बीजों को ऊपर से हल्की भुरभुरी मिट्टी की परत से ढक देना चाहिए और हाथ या फव्वारे से हल्का पानी छिड़कना चाहिए ताकि बीज अपनी जगह से न हिलें। जब अंकुरण के बाद पौधे बाहर आ जाएं और उन पर कुछ पत्तियां विकसित हो जाएं, तो कमजोर दिखने वाले पौधों को धीरे से हटा दें और गमले में केवल एक या दो सबसे मजबूत व स्वस्थ पौधे ही बाकी रहने दें।
ट्रेलिस और बांस के सहारे की जरूरत
खीरे की बेलों का विकास बहुत तेज गति से होता है, इसलिए उन्हें ऊपर चढ़ाने के लिए एक मजबूत संरचनात्मक सहारे की तत्काल जरूरत पड़ती है। बालकनी की सीमित जगह में बेल को ऊपर की तरफ फैलाने के लिए पतली बांस की खपच्चियों, नायलॉन की जाली या फिर मजबूत ट्रेलिस का ढांचा खड़ा करना चाहिए। इस सहारे से बेल को लंबवत बढ़ने की दिशा मिलती है, जिससे बालकनी का फर्श खाली रहता है। इसके साथ ही फल सीधे गीली मिट्टी के संपर्क में आने से बच जाते हैं और हवा का संचार बेहतर बना रहने से पौधे बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं।
धूप, सिंचाई और फलों की सही समय पर तुड़ाई
खीरे के समुचित विकास के लिए पौधे को रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलनी अनिवार्य है। गमले में पानी तभी देना चाहिए जब मिट्टी की ऊपरी सतह छूने पर सूखी महसूस हो, लेकिन ध्यान रखें कि जड़ों के पास पानी ठहरने न पाए। तेज गर्मी या सूखे मौसम में पौधे की पानी की मांग बढ़ सकती है, इसलिए नमी पर नजर रखना जरूरी है। अनुकूल वातावरण मिलने पर 40 से 50 दिनों के भीतर पीले फूल खिलने लगते हैं और नन्हें खीरे फल का रूप लेने लगते हैं। पैदावार की मात्रा पौधे की किस्म और देखभाल पर टिकी होती है। जब खीरे मध्यम आकार के और गहरे हरे रंग के हों, तभी उनकी नियमित तुड़ाई कर लेनी चाहिए, जिससे पौधे पर नए फल तेजी से आते रहते हैं।



















