रसोई में रखे तांबे और पीतल के बर्तनों की चमक वक्त बीतने के साथ फीकी पड़ने लगती है और उन पर जिद्दी काले धब्बे जमा हो जाते हैं। जब धातु हवा के संपर्क में आती है तो उस पर एक सख्त परत चढ़ जाती है, जिसे सामान्य साबुन या पानी से छुड़ाना बेहद मुश्किल काम साबित होता है। इस मैल को हटाने के लिए कई लोग बाजार से रासायनिक क्लीनर खरीद लाते हैं, जो काफी महंगे पड़ते हैं। इसकी जगह घर की रसोई में पहले से मौजूद कुछ सामान्य चीजों की मदद से इन पारंपरिक बर्तनों की कुदरती चमक फिर से पाई जा सकती है। खट्टी दही, नमक, नींबू, इमली और बेकिंग सोडा का सही मिश्रण बर्तनों पर जमी गहरी से गहरी कालिख को भी पूरी तरह हल्का कर देता है।
नींबू और बेकिंग सोडा का असरदार पेस्ट
पीतल के कारोबारी राघव खन्ना के अनुसार, रसोई में रखे इन पारंपरिक बर्तनों को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए कई आसान घरेलू तरीके बेहद कारगर रहते हैं। यदि बर्तन बहुत अधिक काले पड़ गए हैं, तो बेकिंग सोडा और ताजे नींबू के रस को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जा सकता है। इस तैयार पेस्ट को बर्तन की सतह पर हल्के हाथों से मलें और थोड़ी देर तक धीरे-धीरे रगड़ें। कुछ पलों की इस प्रक्रिया के बाद जब बर्तन को ताजे साफ पानी से धोया जाता है, तो उस पर जमी पुरानी गंदगी और काले जिद्दी निशान आसानी से गायब हो जाते हैं।
नमक, खट्टी दही और इमली के पारंपरिक उपाय
बर्तनों की देखभाल के लिए नींबू और नमक का प्रयोग सदियों पुराना आजमाया हुआ तरीका रहा है। इसके लिए एक नींबू को बीच से आधा काटकर उसके कटे हुए हिस्से पर थोड़ा सा नमक छिड़क लें और फिर सीधे बर्तन की काली पड़ चुकी सतह पर हल्के हाथों से रगड़ें। नमक का खुरदुरापन और नींबू का खट्टापन मिलकर मैल को तुरंत ढीला कर देते हैं। इसके अतिरिक्त खट्टी दही या भीगी हुई इमली के गूदे का लेप लगाने से भी तांबे तथा पीतल के लोटे, गिलास और थाली पर जमी जिद्दी परत आसानी से साफ हो जाती है। थोड़े समय तक लेप रखने के बाद बर्तन को रगड़कर सादे पानी से धो देने पर पुरानी धातु चमकने लगती है।
मूर्तियों की सफाई में बरतें खास सावधानी
घरों में रोज काम आने वाले बर्तनों और पूजा घर में रखी पीतल की मूर्तियों की बनावट में गहरा फर्क होता है, इसलिए उनकी सफाई भी एक तरीके से नहीं की जानी चाहिए। राघव खन्ना ने आगाह किया है कि पीतल की मूर्तियों पर कभी भी नींबू, बेकिंग सोडा, इमली या बाजार के किसी क्लीनर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कई पीतल की मूर्तियों के ऊपर सुरक्षा के लिए लैकर की एक बेहद महीन कोटिंग की जाती है। यदि इन पर खट्टी चीजें या सोडा लगाया जाए, तो लैकर की यह सुरक्षात्मक परत हमेशा के लिए खराब हो जाती है, जिससे मूर्ति की चमक स्थायी रूप से बिगड़ सकती है। मूर्तियों को सुरक्षित रखने का सबसे सही तरीका उन्हें केवल सादे पानी से पोंछना और धोना है।
रोजमर्रा के बर्तनों की सही देखभाल
घर में नियमित खान-पान और पूजा-पाठ में काम आने वाली पीतल और तांबे की थाली, लोटे और गिलासों को इन प्राकृतिक तरीकों से लंबे समय तक नया जैसा रखा जा सकता है। किसी भी बर्तन को साफ करते समय उसकी ऊपरी सतह की स्थिति को जरूर जांच लें ताकि धातु को नुकसान न पहुंचे। जिद्दी निशानों पर बेकिंग सोडा और नींबू का पेस्ट हल्का दबाव देकर लगाने के बाद खूब सारे पानी से धोकर सुखा लेने पर धातु बरसों-बरस बेदाग बनी रहती है।



















