वजन घटाने का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में उबला हुआ बेस्वाद खाना, कड़े परहेज और जिम में घंटों पसीना बहाने की तस्वीरें उभरने लगती हैं। लेकिन हाल ही में एक फिटनेस कोच शिखा सुराना ने इस पुरानी सोच को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने बिना किसी कठोर डाइट प्लान या थका देने वाले वर्कआउट के अपना वजन 72 किलोग्राम से घटाकर सीधे 49 किलोग्राम कर लिया। इस तरह उन्होंने कुल 23 किलोग्राम वजन कम किया। उनका मानना है कि इस बड़ी कामयाबी के पीछे कोई जादुई डाइट नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन की उन मामूली गलतियों को सुधारना है जो अनजाने में वजन बढ़ा रही थीं। अपनी इन छोटी-छोटी आदतों को बदलकर उन्होंने यह बेहतरीन फिटनेस हासिल की है।
सुबह का नाश्ता छोड़ने की आदत को पूरी तरह बदला
पहले के समय में सुबह का नाश्ता न करना उनकी दिनचर्या का एक सामान्य हिस्सा बन चुका था। यह आदत उनके लिए काफी नुकसानदेह साबित हुई, क्योंकि इसके कारण दोपहर या शाम तक उन्हें बहुत तेज भूख लग जाती थी। इतनी तेज भूख लगने पर वे खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाती थीं और जरूरत से ज्यादा यानी ओवरईटिंग कर लेती थीं। इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने सुबह सोकर उठने के ठीक एक घंटे के भीतर एक सेहतमंद और पौष्टिक नाश्ता करना अनिवार्य बना दिया। इस छोटे से सुधार ने उनके शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखा और असमय लगने वाली भूख को नियंत्रित किया।
मीठे और अधिक कैलोरी वाले ड्रिंक्स से बनाई दूरी
अक्सर लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि वे दिनभर में विभिन्न प्रकार के ड्रिंक्स के जरिए कितनी भारी मात्रा में कैलोरी का सेवन कर लेते हैं। चीनी वाली चाय, तरह-तरह की कॉफी, डिब्बाबंद फलों के जूस और ठंडे मीठे ड्रिंक्स में बहुत अधिक छिपी हुई कैलोरी होती है, जो पेट को भरे बिना शरीर का वजन बढ़ा देती हैं। शिखा सुराना ने अपनी जीवनशैली से इन लिक्विड कैलोरी को पूरी तरह से हटा दिया। उन्होंने इनकी जगह सादा पानी, बिना चीनी वाली ब्लैक कॉफी और सादी चाय पीना शुरू किया, जिससे उनके शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जाना बंद हो गई।
पौष्टिक भोजन की भी सीमित मात्रा यानी पोर्शन कंट्रोल तय किया
लोगों के बीच यह एक आम गलतफहमी है कि अगर कोई चीज सेहत के लिए अच्छी है, तो उसे जितनी चाहें उतनी मात्रा में खाया जा सकता है। मखाना, सूखे मेवे, विभिन्न प्रकार के बीज और पीनट बटर जैसी चीजें शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं, लेकिन इनमें कैलोरी की मात्रा काफी अधिक होती है। इन्हें बिना सोचे-समझे ज्यादा खाने से वजन कम होने के बजाय बढ़ सकता है। इस बात को समझते हुए उन्होंने हर हेल्दी चीज को भी एक सीमित मात्रा यानी पोर्शन कंट्रोल के तहत खाना शुरू किया, जिससे वे कैलोरी डेफिसिट में रहने में सफल रहीं।
सिर्फ कार्डियो के बजाय स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपनी कसरत में जोड़ा
शुरुआती दिनों में वजन कम करने के लिए वे केवल ट्रेडमिल पर घंटों दौड़ने यानी कार्डियो एक्सरसाइज पर ही निर्भर रहती थीं। हालांकि कार्डियो दिल की सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन शरीर को सही आकार देने और चर्बी घटाने के लिए केवल इसी पर निर्भर रहना काफी नहीं है। उनके वर्कआउट में असली बदलाव तब आया जब उन्होंने स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वेट ट्रेनिंग को अपने रूटीन का हिस्सा बनाया। इस बदलाव से न केवल उनके शरीर की अतिरिक्त चर्बी तेजी से कम हुई, बल्कि मांसपेशियां भी मजबूत हुईं और शरीर को एक बेहतरीन टोन मिला।
गहरी नींद को दी प्राथमिकता और मानसिक तनाव को किया कम
देर रात तक जागना और लगातार मानसिक तनाव में रहना सीधे तौर पर वजन बढ़ने का एक बड़ा कारण बनते हैं। नींद की कमी और तनाव के कारण शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं जो अनहेल्दी चीजें खाने की इच्छा को बढ़ाते हैं। इस चक्र को तोड़ने के लिए उन्होंने हर रात कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी और शांत नींद लेने को अपनी प्राथमिकता बनाया। पर्याप्त नींद लेने से उनका तनाव कम हुआ, मेटाबॉलिज्म में सुधार हुआ और शरीर को रिकवर होने के लिए पूरा समय मिला जिससे वजन तेजी से घटा।
बाहर होटल में खाने के बजाय घर का बना भोजन चुना
होटल, रेस्टोरेंट या बाहर के खाने में इस्तेमाल होने वाले तेल, मसालों, मक्खन और नमक की मात्रा पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता, जिससे अनजाने में बहुत अधिक कैलोरी पेट में चली जाती है। अपनी सेहत और कैलोरी इनटेक पर पूरा नियंत्रण रखने के लिए उन्होंने बाहर का खाना बंद कर दिया और घर पर खुद अपना भोजन तैयार करना शुरू किया। खुद खाना पकाने से उन्हें यह स्पष्ट जानकारी रहती थी कि वे क्या खा रही हैं और उनके भोजन में कितनी पौष्टिकता मौजूद है।
'ऑल-या-नथिंग' वाली मानसिक सोच को हमेशा के लिए छोड़ा
डाइटिंग करने वाले लोगों में अक्सर एक नकारात्मक सोच होती है कि अगर उन्होंने गलती से एक समोसा या कोई अनहेल्दी चीज खा ली, तो उनका पूरा डाइट प्लान बर्बाद हो गया। इस सोच के कारण लोग निराश होकर पूरा दिन अनहेल्दी खाने में बिता देते हैं। शिखा सुराना ने इस आत्मघाती सोच को बदला। अगर कभी उन्होंने कोई अनहेल्दी चीज खा भी ली, तो उन्होंने खुद को दोषी मानने या कोसने के बजाय अगले ही पल से दोबारा अपनी नियमित हेल्दी रूटीन को फॉलो करना शुरू कर दिया।
अस्थायी मोटिवेशन के भरोसे बैठने के बजाय अनुशासन को चुना
किसी भी काम को शुरू करने के लिए हमेशा किसी खास समय या मोटिवेशन का इंतजार करना एक बड़ी भूल साबित होता है, क्योंकि मोटिवेशन कभी भी एक जैसा नहीं रहता। उन्होंने यह महसूस किया कि यदि वे केवल अच्छे मूड या मोटिवेशन के भरोसे बैठी रहेंगी, तो कभी भी नियमित नहीं हो पाएंगी। इसलिए उन्होंने प्रेरणा के स्थान पर कड़े अनुशासन और अपनी दैनिक दिनचर्या पर भरोसा किया। चाहे मन हो या न हो, उन्होंने अपनी तय आदतों का सख्ती से पालन किया, जो अंततः उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बना।













