भोपाल कमिश्नरेट पुलिस ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए करोड़ों रुपये के लग्जरी कार ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने ट्रैवल एजेंसियों के संचालकों से सांठगांठ कर लोगों की महंगी गाड़ियां हड़प लीं और उन्हें दूसरे राज्यों में बेच डाला। पुलिस ने मौके से 5 करोड़ रुपये की 40 कारें और दो बाइकें बरामद की हैं, जबकि शैलेश जोशी समेत 6 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है।
एक शिकायत से खुली पूरी साजिश
इस पूरे नेटवर्क का सूत्र विदिशा के रहने वाले गोविंद कुशवाहा की एक शिकायत से जुड़ा। गोविंद ने अपनी कार बेचने के लिए आरोपी शैलेश जोशी को सौंपी थी, लेकिन वाहन बिकने के बावजूद उन्हें उसकी रकम कभी नहीं मिली। ठगा हुआ महसूस करने पर उन्होंने धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत पर अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की, जिसके बाद छापेमारी कर पूरे गिरोह को बेनकाब कर दिया गया।
कैसे करते थे वाहनों की हेराफेरी
जांच में सामने आया कि शैलेश जोशी अपने साथियों और कुछ ट्रैवल एजेंसी संचालकों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह चला रहा था। यह गिरोह लोगों से वाहन किराए पर लेने या उनकी बिक्री कराने के बहाने महंगी कारें अपने कब्जे में ले लेता था और फिर चुपचाप उन्हें दूसरे राज्यों में बेच देता था। चौंकाने वाली बात यह रही कि कई गाड़ियां ऐसे लोगों को बेची गईं, जिनके पास वाहन चलाने के वैध दस्तावेज तक मौजूद नहीं थे।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक इस ठगी का जाल सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली तक फैला हुआ था। यही वजह है कि पुलिस इसे एक अंतरराज्यीय गिरोह मान रही है, जिसकी जड़ें कई राज्यों में गहरी हैं।
कौन-कौन गिरफ्तार, कौन फरार
इस मामले में पुलिस ने शैलेश जोशी, वहीद अली, अजय जोशी, अरुण नाथ, राजा मीणा और रेहान खान को गिरफ्तार किया है। वहीं गिरोह के मुख्य आरोपी विजयजीत सिंह गौर समेत बाकी फरार आरोपियों की तलाश अब भी जारी है।
15 से 20 गाड़ियां पहले ही बिक चुकीं
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह अब तक 15 से 20 महंगी गाड़ियों को बेच चुका है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े का दायरा और भी कई राज्यों तक फैला हो सकता है, यही कारण है कि जांच का घेरा लगातार बड़ा किया जा रहा है।













