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सागर की टिकीटोरिया पहाड़ी पर बनेगा बुंदेलखंड का पहला रोपवे, 300 सीढ़ियों की चढ़ाई अब चंद मिनटों में होगी पूरीमध्य प्रदेश
13 जून 2026, 10:27 am (47 दिन पहले)· 0

सागर की टिकीटोरिया पहाड़ी पर बनेगा बुंदेलखंड का पहला रोपवे, 300 सीढ़ियों की चढ़ाई अब चंद मिनटों में होगी पूरी

मध्य प्रदेश के सागर जिले में टिकीटोरिया स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर तक पहुंचने के लिए अब 300 से ज्यादा सीढ़ियां नहीं चढ़नी होंगी। 17 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से बुंदेलखंड का पहला रोपवे बन रहा है, जो 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।

हरे-भरे पेड़ों से घिरी एक ऊंची पहाड़ी और उसकी चोटी पर संगमरमर से बना मां विंध्यवासिनी का मंदिर — यही है सागर जिले का वह स्थान जिसे श्रद्धालु टिकीटोरिया के नाम से जानते हैं। पूरे इलाके में आस्था का केंद्र बन चुके इस भव्य दरबार को लोग प्यार से मिनी मैहर भी कहते हैं। हर दिन यहां सैकड़ों भक्त माथा टेकने पहुंचते हैं, और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर परिसर में 40 से अधिक प्रसाद और नाश्ते की दुकानें स्थाई रूप से चलती हैं।

लेकिन इस आस्था के रास्ते में एक बड़ी अड़चन रही है — मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 300 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। नौजवानों के लिए तो यह मुमकिन है, पर बीमार और बुजुर्ग भक्तों के लिए यह चढ़ाई किसी परीक्षा से कम नहीं। दर्शन की चाह दिल में रहती है, मगर इतनी सीढ़ियां देखकर कई लोग हिम्मत ही नहीं जुटा पाते।

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17 करोड़ 28 लाख की लागत, बुंदेलखंड का पहला रोपवे

इसी परेशानी का हल निकालने के लिए यहां रोपवे बनाया जा रहा है, ताकि तीर्थ क्षेत्र में आने वाले हर श्रद्धालु के दर्शन की इच्छा पूरी हो सके। इस परियोजना पर कुल 17 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि यह बुंदेलखंड का पहला रोपवे होने जा रहा है। फिलहाल करीब 3 महीने से निर्माण कार्य जारी है और उम्मीद की जा रही है कि नए साल 2027 में यह बनकर तैयार हो जाएगा और चालू कर दिया जाएगा।

फेनिकुलर तकनीक — हवा में नहीं, ट्रैक पर चलेंगी ट्रॉली

यहां रोपवे को अंतरराष्ट्रीय फेनिकुलर तकनीक से बनाया जा रहा है। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें श्रद्धालुओं को ले जाने और लाने के लिए दो ट्रॉली होती हैं — एक ऊपर की ओर जाती है तो दूसरी उसी समय नीचे की ओर आती है। आम रोपवे की तरह ये ट्रॉली हवा में नहीं लटकतीं, बल्कि ट्रेन की तरह एक ट्रैक पर ऊपर-नीचे आती-जाती हैं। इसी वजह से बिजली की बचत होती है और दुर्घटना की आशंका भी ना के बराबर रह जाती है।

इस रोपवे की कुल लंबाई 250 मीटर होगी। अभी सीढ़ियां चढ़कर मंदिर तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को लगभग 15 से 30 मिनट लग जाते हैं, लेकिन रोपवे बन जाने के बाद यही सफर महज दो से तीन मिनट में पूरा हो जाएगा — और सबसे बड़ी राहत यह कि थकान भी नहीं होगी।

ढाई साल पहले अटका था काम, अब तेज रफ्तार

दरअसल इस रोपवे को बनाने की शुरुआत लगभग ढाई साल पहले ही हो गई थी, मगर किसी वजह से यह मामला बीच में अटक गया था। पिछले दो-तीन महीनों से काम दोबारा शुरू हुआ है और अब यह तेज गति से आगे बढ़ रहा है। जानकारी के मुताबिक जो काम सामान्य रूप से 18 महीने में पूरा होना था, उसे एक साल में ही निपटाने की संभावना जताई जा रही है।

ढाई सौ साल पुराना सिद्ध क्षेत्र

इस सिद्ध क्षेत्र मंदिर का इतिहास भी दिलचस्प है। इसे करीब ढाई सौ साल पहले सागर की मराठा शासन काल की रानी लक्ष्मीबाई खेर ने बनवाया था, और तब यह सिर्फ पहाड़ी पर ही सीमित था। पिछले 30-40 सालों में यहां एक समिति बनने के बाद लगातार तरह-तरह के विकास कार्य होते रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल रही है और वे आराम से दर्शन-पूजन कर पा रहे हैं। इसी कड़ी में क्षेत्रीय विधायक गोपाल भार्गव की पहल पर, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की मदद से बुंदेलखंड के इस पहले रोपवे का निर्माण हो रहा है।

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