मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर हाल ही में हुए तनाव के बाद जामा मस्जिद और शाही मस्जिद क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। जुमे की नमाज के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों को अत्यंत सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शहर में अमन-चैन और कानून-व्यवस्था पूरी तरह बरकरार रहे। पूरे इलाके में शांति बनाए रखने के लिए 2,500 सुरक्षा बल के जवान तैनात किए गए हैं, जिनकी कमान मैदानी स्तर पर 5 एएसपी और 21 डीएसपी स्तर के अधिकारियों के हाथों में सौंपी गई है। संवेदनशील गलियों और चौराहों पर 100 सीसीटीवी कैमरों और उड़ते ड्रोन के जरिए हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है।
डिजिटल अफवाहों पर साइबर सेल का प्रहार
जमीनी मुस्तैदी के साथ-साथ इंटरनेट जगत में भी कड़ी चौकसी बरती जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नफरत फैलाने वाले संदेश, भड़काऊ रील और मनगढ़ंत अफवाहें पोस्ट करने वाले अकाउंट्स पर पुलिस की तकनीकी शाखा लगातार ट्रैकिंग कर रही है। साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई के चलते अब तक इंटरनेट से 100 से ज्यादा भ्रामक पोस्ट हटवाए जा चुके हैं। इस बीच मुस्लिम समाज की ओर से स्पष्ट किया गया कि पूर्व में सोशल मीडिया के जरिए गलतफहमी फैली थी। नमाजियों ने भरोसा जताया कि उज्जैन की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहजीब को अक्षुण्ण रखने और सौहार्द का संदेश देने के लिए ही नमाज पढ़ी जाएगी।
28 सितंबर के टकराव की पृष्ठभूमि और सुरक्षा उपाय
उज्जैन में सुरक्षा की यह अभूतपूर्व घेराबंदी 28 सितंबर को हुए हिंसक घटनाक्रम के मद्देनजर की गई है। सिंहस्थ कुंभ की व्यापक तैयारियों के तहत सड़क चौड़ी करने के प्रोजेक्ट के लिए जब मस्जिद का एक हिस्सा हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब बड़ी संख्या में एकत्रित भीड़ और पुलिस के बीच तीखा टकराव पैदा हो गया था। पत्थरबाजी की घटनाओं के बाद अनियंत्रित स्थिति को संभालने के लिए पुलिसकर्मियों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा था। इसके बाद रैपिड एक्शन फोर्स के दस्तों को मौके पर उतारकर मोर्चा संभालना पड़ा।
हाई कोर्ट में समझौता और मस्जिद की नई रूपरेखा
ताजा सुरक्षा व्यवस्था के तहत मस्जिद के चारों तरफ एक मजबूत लोहे का ढांचा खड़ा किया गया है, जबकि सड़कों पर पुलिस ने घुड़सवार गश्त करके अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। एहतियात के तौर पर मस्जिद से सटी स्थानीय दुकानों को पुलिस निगरानी में पहले ही खाली करवा लिया गया था। इस दौरान कानूनी मोर्चे पर भी बड़ा समाधान सामने आया, जहां मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शाही मस्जिद कमेटी और राज्य प्रशासन के बीच आपसी सहमति बनने के बाद विवाद से संबंधित याचिका का निपटारा कर दिया।
कमेटी की पैरवी कर रहे वकील कुलदीप पाठक के विवरण के अनुसार, नगर प्रशासन ने शुरुआत में 9.5 फीट जगह की मांग रखी थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के तहत केवल तीन फीट का हिस्सा हटाने पर अंतिम मुहर लगी है। प्रशासन ने परियोजना से प्रभावित होने वाले दुकानदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने, मानक नियमों के अनुरूप उचित मुआवजा वितरित करने और मस्जिद की मीनार को परिसर के भीतर ही पुनर्स्थापित करने की शर्तों को स्वीकार कर लिया है।





















