कोलकाता में अपनी पार्टी के सांसदों को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विपक्षी राजनीति और चुनाव संचालन व्यवस्था पर कई अहम टिप्पणियां कीं। राहुल गांधी को विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के निर्णय व्यक्तिगत आधार पर नहीं लिए जा सकते। उनके अनुसार विपक्षी गठबंधन एक सम्मिलित परिवार की तरह कार्य करता है, जहां सर्वोच्च पद की दावेदारी को लेकर सभी घटक दल आपसी सहमति से अंतिम निर्णय लेंगे। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के साथ अपने जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि अखिलेश यादव अथवा अरविंद केजरीवाल उन्हें आमंत्रित करते हैं, तो वह उनके चुनावी मंचों पर पहुंचकर सक्रिय प्रचार करेंगी।
कांग्रेस की तरफ से ममता को पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव
विपक्षी एकता पर तृणमूल सुप्रीमो के इस रुख के बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का एक बिल्कुल अलग दृष्टिकोण सामने आया। उन्होंने ममता बनर्जी को सुझाव दिया कि वह अपने समस्त सांसदों और विधायकों को साथ लेकर विधिवत रूप से कांग्रेस में शामिल हो जाएं। अधीर रंजन चौधरी ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए यह भी कहा कि यदि ममता बनर्जी कांग्रेस में सम्मिलित होने का कदम उठाती हैं, तो पूरी पार्टी उनके नेतृत्व के अधीन काम करने को सहर्ष तैयार रहेगी। इस बयान ने गठबंधन के आंतरिक समीकरणों और नेतृत्व की खींचतान को एक नया मोड़ दे दिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला
संसदीय दल की इस बैठक में ममता बनर्जी का रुख भारत निर्वाचन आयोग के प्रति बेहद आक्रामक रहा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे निशाने पर लेते हुए उन्हें हिरासत में लिए जाने की पुरजोर मांग उठाई। तृणमूल कांग्रेस ने कटाक्ष करते हुए उन्हें एक ऐसा अधिकारी करार दिया जिसने पश्चिम बंगाल के नागरिकों के लोकतांत्रिक मताधिकार को पूरी तरह गायब कर दिया है। ममता बनर्जी ने सख्त लहजे में कहा कि जनता इस तरह के आचरण को कभी माफ नहीं करेगी। पार्टी ने इस संदर्भ में ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग से जुड़े पोस्टर भी चस्पा किए हैं।
तृणमूल नेतृत्व ने एसआईआर प्रक्रिया के पीछे भारतीय जनता पार्टी की भूमिका होने का दावा किया। पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए कहा कि तृणमूल जब आयोग से जवाबदेही मांगती है, तब बचाव में सत्ताधारी दल खड़ा नजर आता है। अभिषेक बनर्जी के अनुसार राज्य के 150 विधानसभा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उनका कहना है कि हटाए गए नामों की यह तादाद कई सीटों पर उम्मीदवारों की जीत और हार के फासले से भी अधिक है। इसके अतिरिक्त ममता बनर्जी ने वर्ष 2023 में पारित कानून के तहत चुनाव आयुक्तों को प्रदान की गई कानूनी सुरक्षा पर भी सवाल उठाए।
ईवीएम में आगजनी और सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप
मतदान व्यवस्था पर आगे बात करते हुए तृणमूल प्रमुख ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि बंगाल में कुल 4000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को जलाकर जबरन चुनावी नतीजे बदले गए। उन्होंने बताया कि जिस इमारत के छठे और सातवें तल पर मतदान मशीनें सुरक्षित रखी गई थीं, वहां भीषण आग लगाई गई। उनका दावा है कि आगजनी की इस घटना में केवल उन्हीं मशीनों को निशाना बनाया गया जिनमें तृणमूल कांग्रेस को स्पष्ट बढ़त हासिल थी।
इसके साथ ही ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान जिन इलाकों में तृणमूल ने जीत दर्ज की थी, वहां चार गुना अधिक वोटरों के नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए। अपने निजी हालात पर चर्चा करते हुए उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि उन्हें अदालती निर्देश के बिना अपने आवास से बाहर जाने की अनुमति नहीं मिल पा रही है। उन्होंने यह भी साझा किया कि उनके घर के समीप प्रतिदिन 200 से 300 अराजक तत्व एकत्र होकर निरंतर अशांति फैलाते हैं।





















