अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर चौतरफा बिकवाली का दबाव गहरा गया है, जिसके चलते प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक में तेज गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई सुस्ती और फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं के नरम रुख के मिले-जुले प्रभाव ने डॉलर के हालिया मजबूत रुख को झटका दिया है। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की एक बास्केट के मुकाबले डॉलर के मूल्य का आकलन करने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) अपने साप्ताहिक उच्च स्तर 103.00 के करीब से लुढ़क कर शुक्रवार को 101.60 के निचले स्तर तक आ गया। इस तीव्र गिरावट के साथ ही डॉलर इंडेक्स बीते एक महीने में अपनी पहली साप्ताहिक गिरावट दर्ज करने की कगार पर पहुंच चुका है।
तकनीकी संकेतकों पर बेयरिश दबाव और चार्ट के रुझान
मुद्रा बाजार के तकनीकी विश्लेषण पर नजर डालें तो डॉलर इंडेक्स के साप्ताहिक चार्ट पर एक बेयरिश एनगल्फिंग कैंडल का निर्माण देखा जा रहा है। वित्तीय बाजारों में यह कैंडलस्टिक पैटर्न आमतौर पर किसी स्थापित तेजी के रुझान में संभावित बड़े बदलाव और मंदी की ओर पलटने का एक प्रमुख संकेत माना जाता है। चार्ट पर दिख रही इस कमजोरी को दुनिया के कई बड़े वाणिज्यिक बैंकों के मुद्रा विश्लेषकों का भी समर्थन मिल रहा है, जिनका मानना है कि मूलभूत आर्थिक परिस्थितियां भी इस मंदी के रुख को बल दे रही हैं। विश्लेषकों का आकलन है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI क्षेत्र की वास्तविक लाभप्रदता को लेकर गहराते संदेह और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अत्यधिक सख्ती किए जाने के बढ़े हुए अनुमान आने वाले महीनों में अमेरिकी डॉलर की सेहत पर भारी पड़ सकते हैं।
फेडरल रिजर्व के नीतिगत संकेत और विश्लेषकों का गणित
फेडरल रिजर्व के भीतर चल रहे नीतिगत मंथन पर वित्तीय संस्थानों ने बारीकी से नजर रखी है। एमयूएफजी/बीटीएमयू (MUFG/BTMU) के विश्लेषकों ने फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श के ताजा रुख पर गौर करते हुए कहा कि उनके बयानों से इस नए फेड तंत्र के तहत भविष्य में मिलने वाले अप्रत्याशित झटकों की संभावना पर कोई स्पष्ट पर्दा नहीं उठा है। बैंक का मानना है कि आने वाले समय में जब मुद्रास्फीति और AI से जुड़े विभिन्न कार्य समूह अपनी निष्कर्ष रिपोर्ट सौंपेंगे, तब फेड की वास्तविक दिशा अधिक स्पष्ट होकर सामने आएगी।
बैंक के विश्लेषकों के अनुसार, दिसंबर के महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की प्रबल संभावना अभी भी बनी हुई है, लेकिन 2027 तक दरों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहने का बाजार का अनुमान काफी हद तक अतिशयोक्तिपूर्ण नजर आता है। यही दृष्टिकोण फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के वरिष्ठ सदस्यों में शामिल न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट विलियम्स ने भी साझा किया है, जिसकी ओर वित्तीय विश्लेषकों ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है।
मुद्रास्फीति के आंकड़े और डॉलर की स्थिरता पर सवाल
दूसरी तरफ, कॉमर्जबैंक (Commerzbank) के विशेषज्ञों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया आंकड़ों के व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया है। बुधवार को सामने आए अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अप्रत्याशित रूप से मजबूत आंकड़ों के बाद उत्पादक मूल्य और खुदरा बिक्री के आंकड़े भी अनुमान से कहीं अधिक मजबूत दर्ज किए गए थे। इन आंकड़ों से साफ होता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मूल्य वृद्धि का दबाव लगातार व्यापक होता जा रहा है। इसके बावजूद, कॉमर्जबैंक का अवलोकन है कि डॉलर बुधवार को मिली इस बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम साबित हुआ।
बैंक के विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि अमेरिकी डॉलर को लंबी अवधि के लिए ठोस सहारा पाना है, तो वित्तीय बाजारों को दरों में पूर्व अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक सख्ती को स्वीकार करना होगा। हालांकि, बाजार में अब तक ऐसा कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है, क्योंकि चालू वर्ष के अंत तक के लिए अमेरिकी ब्याज दरों के अनुमान हाल के दिनों में लगभग स्थिर बने हुए हैं।
फेडरल रिजर्व का दोहरा जनादेश और मूल्य दबाव की चुनौती
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का मुख्य दायित्व दोहरे जनादेश पर आधारित है, जिसमें अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना और कीमतों में स्थिरता बनाए रखना शामिल है। इस आधिकारिक जनादेश के तहत, मुद्रास्फीति को सालाना आधार पर करीब 2% के आसपास रखा जाना चाहिए। हालांकि, जब से दुनिया ने वैश्विक महामारी का सामना किया है, तब से मुद्रास्फीति को काबू में रखना केंद्रीय बैंक के निर्देशों का सबसे कमजोर पहलू साबित हुआ है, और यह स्थिति वर्तमान समय तक खिंचती चली आई है।
आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी बाधाओं और अड़चनों के कारण कीमतों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक कई दशकों के उच्चतम स्तरों के करीब टिका हुआ है। इस बेकाबू महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए फेडरल रिजर्व पहले ही कई कड़े कदम उठा चुका है और उम्मीद की जा रही है कि वह निकट भविष्य में भी अपना आक्रामक रुख बनाए रखेगा।
वैश्विक मुद्राओं का पलटवार और सर्राफा बाजार में तेजी
डॉलर पर बढ़ते दबाव का सीधा असर शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान प्रमुख वैश्विक मुद्रा जोड़ों पर साफ दिखाई दिया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) के युग्म ने दोबारा गति पकड़ी और अपनी बढ़त को 0.6950 के स्तर की ओर आगे बढ़ा दिया। फेड चेयरमैन वॉर्श की टिप्पणियों ने अमेरिकी मुद्रा पर बिकवाली के दबाव को और तीव्र कर दिया, जिससे इस मुद्रा युग्म को मजबूती हासिल करने में मदद मिली। वॉर्श ने स्पष्ट किया कि वह भविष्य में ब्याज दरों के तय मार्ग पर बिना कोई संकेत दिए, मूल्य स्थिरता बहाल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
इसी तरह, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी भी नए सिरे से बिकवाली के घेरे में आ गई। शुक्रवार को एशियाई सत्र में डॉलर की ताजा बिकवाली के बीच इस जोड़ी ने 158.00 का अहम स्तर गंवा दिया। भविष्य में मौद्रिक सख्ती के रास्ते को लेकर फेड चेयरमैन की अनिर्णायक टिप्पणियों ने डॉलर के साथ-साथ इस जोड़ी पर भारी दबाव बनाए रखा।
दूसरी ओर, सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली कीमती धातुओं में जोरदार चमक देखी गई। सोना लगातार दूसरे कारोबारी दिन तेजी की राह पर आगे बढ़ते हुए 4,180 डॉलर के करीब कारोबार करता नजर आया, जहां खरीदार अक्टूबर के कारोबारी दायरे के शीर्ष स्तर 4,230 डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य बना रहे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की ओर से सप्ताह के दौरान आई नरम टिप्पणियों ने बहुमूल्य धातुओं को मजबूत सहारा दिया है, जिससे ग्रीनबैक को मिलने वाला सट्टा समर्थन काफी कमजोर पड़ गया है।



















