भारतीय प्राथमिक पूंजी बाजार में अब तक के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। रिलायंस समूह की डिजिटल और दूरसंचार शाखा जियो प्लेटफॉर्म्स अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ लाने जा रही है, जिसका कुल आकार 30,213 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। यह निर्गम पूरी तरह से 27 करोड़ नए इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू होगा, जिससे जुटाई जाने वाली पूरी पूंजी सीधे कंपनी के खाते में जाएगी। बाजार में निवेशकों के भारी उत्साह को देखते हुए विभिन्न ब्रोकरेज मंचों ने आधिकारिक बोली शुरू होने से पहले ही प्री-अप्लाई की सुविधा सक्रिय कर दी है, जिससे बोलीदाता अपने आवेदन पहले ही दर्ज करा पा रहे हैं।
निर्गम की समय-सारणी और महत्वपूर्ण तारीखें
सार्वजनिक निर्गम की प्रक्रिया के तहत संस्थागत एंकर निवेशकों के लिए बोली की खिड़की सोमवार, 19 अक्टूबर को खुलेगी। इसके पश्चात आम निवेशकों, गैर-संस्थागत खरीदारों और पात्र शेयरधारकों के लिए सब्सक्रिप्शन बुधवार, 21 अक्टूबर को शुरू होगा। बोली लगाने की अंतिम तिथि शुक्रवार, 23 अक्टूबर निर्धारित की गई है। तीन दिनों की इस बोली प्रक्रिया के समापन के बाद शेयरों के आवंटन आधार को सोमवार, 26 अक्टूबर को अंतिम रूप दिया जाना संभावित है।
जिन आवेदकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे, उनके बैंक खातों में धनराशि का रिफंड तथा सफल आवेदकों के डीमैट खातों में शेयरों का ट्रांसफर मंगलवार, 27 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद कंपनी के शेयरों की घरेलू शेयर बाजारों नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग बुधवार, 28 अक्टूबर को प्रस्तावित है। हालांकि लिस्टिंग की यह तारीख पूरी तरह से नियामक प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर करते हुए अस्थायी रखी गई है।
प्राइस बैंड, लॉट साइज और न्यूनतम निवेश राशि
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने इस सार्वजनिक निर्गम के लिए प्रति शेयर 10 रुपये के अंकित मूल्य पर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा यानी प्राइस बैंड तय किया है। किसी भी खुदरा निवेशक को आवेदन करने के लिए कम से कम एक लॉट की बोली लगानी होगी, जिसके तहत 12 शेयर शामिल किए गए हैं। इसका सीधा अर्थ है कि मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर 1,119 रुपये के आधार पर एक खुदरा निवेशक को न्यूनतम 13,428 रुपये का निवेश करना होगा।
कंपनी के पात्र कर्मचारियों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत उन्हें प्रति शेयर 54 रुपये की छूट दी जाएगी। इस निर्गम के जरिए कंपनी का पोस्ट-इश्यू अनुमानित बाजार मूल्यांकन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जो इसे घरेलू शेयर बाजार की शीर्ष मूल्यवान कंपनियों की कतार में मजबूती से खड़ा करता है। इस विशाल निर्गम के प्रबंधन के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी को बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है, जबकि पूरी आवंटन प्रक्रिया और तकनीकी प्रबंधन का जिम्मा रजिस्ट्रार के रूप में केफिन टेक्नोलॉजीज संभालेगी।
आरक्षण संरचना और रिलायंस शेयरधारकों के लिए विशेष कोटा
निर्गम में शेयरों के वितरण के लिए एक सुनियोजित कोटा संरचना तैयार की गई है। कुल निर्गम का 50 प्रतिशत हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों के लिए निर्धारित किया गया है, जबकि 15 प्रतिशत हिस्सा गैर-संस्थागत उच्च निवल मूल्य वाले निवेशकों के लिए सुरक्षित रखा गया है। वहीं सामान्य खुदरा व्यक्तिगत निवेशकों को 35 प्रतिशत का आवंटन दिया जाएगा।
इस सार्वजनिक पेशकश का एक महत्वपूर्ण पहलू मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों के लिए रखा गया विशेष आरक्षण है। निर्गम का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा, जो करीब 2,500 करोड़ रुपये बैठता है, रिलायंस के शेयरधारकों के लिए आरक्षित किया गया है। रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, जिस किसी निवेशक के पास 14 अक्टूबर या उससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज का कम से कम एक शेयर डीमैट खाते में मौजूद था, वह इस विशेष श्रेणी में आवेदन करने का हकदार है। यह कोटा केवल व्यक्तिगत खुदरा निवेशकों और हिंदू अविभाजित परिवारों के लिए मान्य है। चूंकि 14 अक्टूबर की कट-ऑफ तारीख पहले ही निकल चुकी है, इसलिए अब रिलायंस के शेयर खरीदने वाले नए निवेशक इस कोटे का लाभ नहीं ले सकेंगे, यद्यपि वे सामान्य खुदरा श्रेणी में अपनी बोली प्रस्तुत कर सकते हैं।
ओएफएस का अभाव और फ्रेश इश्यू की खासियत
आमतौर पर बड़े निर्गमों में मौजूदा प्रवर्तक या शुरुआती निवेशक ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलते हैं, लेकिन जियो प्लेटफॉर्म्स के मामले में स्थिति भिन्न है। 30,213 करोड़ रुपये का यह पूरा निर्गम विशुद्ध रूप से नए इक्विटी शेयरों का आवंटन है। इसका तात्पर्य यह है कि वर्तमान शेयरधारकों में से कोई भी अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहा है। जुटाया गया समूचा धन सीधे कंपनी के कारोबार विस्तार, प्रौद्योगिकी उन्नयन और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाने में काम आएगा, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करेगा।
प्री-अप्लाई की कार्यप्रणाली और आवेदन की चरणबद्ध प्रक्रिया
निवेशकों की भारी मांग को सुगम बनाने के लिए ब्रोकर ऐप्लिकेशनों पर प्री-अप्लाई का विकल्प पेश किया गया है। यह सुविधा निवेशकों को 21 अक्टूबर को निर्गम औपचारिक रूप से खुलने से पहले ही अपनी बोली सबमिट करने की अनुमति देती है। जब कोई निवेशक प्री-अप्लाई करता है, तो उसका आवेदन ब्रोकर के सिस्टम में सुरक्षित दर्ज हो जाता है और जैसे ही 21 अक्टूबर को बोली शुरू होती है, ऑर्डर अपने आप स्टॉक एक्सचेंज के सिस्टम में चला जाता है।
प्री-अप्लाई करने से बैंक खाते का पैसा तुरंत ब्लॉक नहीं होता है। जब निर्गम आधिकारिक तौर पर खुलता है और ऑर्डर एक्सचेंज को भेजा जाता है, तब निवेशक के यूपीआई ऐप्लिकेशन पर एक मैंडेट रिक्वेस्ट आती है। जब निवेशक उस यूपीआई मैंडेट को अपनी पिन डालकर मंजूरी देता है, केवल तभी संबंधित राशि बैंक खाते में ब्लॉक होती है।
आवेदन करने के लिए निवेशकों को अपने ब्रोकर के ऐप या वेबसाइट के आईपीओ खंड में जाना होगा। वहां जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ का चयन करके अपनी श्रेणी खुदरा अथवा रिलायंस शेयरधारक चुननी होगी। इसके बाद वांछित लॉट की संख्या और बोली का मूल्य भरना होगा, जिसमें कट-ऑफ मूल्य का चयन करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। अंत में अपनी वैध यूपीआई आईडी दर्ज करके आवेदन जमा करना होगा। मोबाइल पर प्राप्त यूपीआई मैंडेट को समय रहते अधिकृत करते ही आवेदन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो जाती है और धनराशि आवंटन प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रूप से ब्लॉक रहती है।


















