अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में मध्य पूर्व के तनाव के बावजूद कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रमुख अर्थशास्त्रियों के एक नए अध्ययन के अनुसार, पश्चिम एशिया से कच्चे तेल का निर्यात लगभग युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर पर पहुंच गया है। इस आपूर्ति बहाली में सबसे बड़ी भूमिका होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते टैंकरों की गुप्त आवाजाही ने निभाई है, जिसे समुद्री व्यापार में डार्क ट्रांजिट कहा जाता है। आपूर्ति में इस सुधार के बावजूद वर्तमान में वायदा बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास काफी ऊंची बनी हुई हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में भू-राजनीतिक जोखिमों से जुड़ा भारी प्रीमियम धीरे-धीरे कम होगा और चालू वर्ष के अंत तक कच्चे तेल के भाव गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल की तरफ फिसल सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुप्त टैंकरों की आवाजाही और आपूर्ति में सुधार
कॉमर्सबैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री डॉक्टर जोर्ग क्रेमर, डॉक्टर विंसेंट स्टैमर और उनके सहयोगियों ने इस पूरे घटनाक्रम का गहन विश्लेषण किया है। उनका कहना है कि फारस की खाड़ी के इस बेहद संवेदनशील समुद्री रास्ते पर कई पाबंदियों और सुरक्षा खतरों के बावजूद जहाजों ने ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके यात्राएं जारी रखी हैं। इन्हीं गुप्त गतिविधियों के सहारे तेल उत्पादक देश अपनी खेप वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में कामयाब रहे हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि डार्क ट्रांजिट की बदौलत निर्यात में यह बढ़ोतरी इसी तरह जारी रहती है, तो जल्द ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती आपूर्ति के चलते कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बनने लगेगा।
हालांकि वर्तमान में जीवाश्म ईंधन की कीमतें ऊंचे स्तर पर टिकी हुई हैं। कच्चा तेल, डीजल और प्राकृतिक गैस अभी भी उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए महंगे बने हुए हैं। वायदा अनुबंधों में 104 डॉलर प्रति बैरल का भाव यह दर्शाता है कि आपूर्ति की खबरें आने के बाद भी वित्तीय बाजार पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं और किसी भी बड़े व्यवधान की आशंका को देखते हुए सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
लाल सागर और यमन में बढ़ता जोखिम प्रीमियम
बाजार में तेल की कीमतों के ऊंचे बने रहने की सबसे प्रमुख वजह सुरक्षा से जुड़े लगातार बने हुए गंभीर खतरे हैं। यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों ने पिछले कई हफ्तों से संघर्ष में अपनी भागीदारी काफी बढ़ा दी है। लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पहले से कहीं अधिक बढ़ चुका है। इस मार्ग पर हमलों की आशंका ने नौवहन कंपनियों के लिए बीमा खर्च और परिचालन लागत में भारी इजाफा किया है।
इसके अलावा क्षेत्र में एक और बड़ा संकट हमेशा बना रहता है। ईरान स्वयं फारस की खाड़ी के महत्वपूर्ण जलक्षेत्र में जहाजों पर अपने हमलों को तेज कर सकता है या फिर पड़ोसी सऊदी अरब की अहम तेल पाइपलाइनों और उत्पादन बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि इन्हीं भू-राजनीतिक आशंकाओं की वजह से तेल की कीमतों में एक बड़ा रिस्क प्रीमियम जुड़ा हुआ है। फिर भी, यदि समय बीतने के साथ ये खतरे घटते हैं और बुनियादी आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित बनी रहती है, तो साल के अंत तक कच्चे तेल का रुख 85 डॉलर की ओर तय माना जा रहा है।
यूरोप में डीजल, गैस की कीमतें और मुद्रास्फीति का संकट
कच्चे तेल में अनुमानित गिरावट के बावजूद आम उपभोक्ताओं और यूरोपीय अर्थव्यवस्था को तुरंत पूरी राहत मिलने की उम्मीद कम है। वाणिज्यिक शोध के अनुसार, डीजल और यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमतों में नरमी की गति काफी धीमी रहेगी। यह धीमापन यूरो क्षेत्र की समग्र महंगाई को प्रभावित करेगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि ऊर्जा की ऊंची लागतों के कारण यूरो क्षेत्र में मुद्रास्फीति का स्तर वर्ष 2027 के मध्य तक अपेक्षाकृत ऊंचा ही बना रह सकता है, जिससे केंद्रीय बैंकों के सामने नीतिगत चुनौतियां बनी रहेंगी।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर पर दबाव
ऊर्जा क्षेत्र के घटनाक्रमों के साथ-साथ वैश्विक मुद्रा और जिंस बाजारों में भी तेजी से समीकरण बदल रहे हैं। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर में मजबूती दर्ज की गई और यह जोड़ी उछलकर 0.6950 के स्तर की तरफ बढ़ गई। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श की ताजा टिप्पणियों ने अमेरिकी मुद्रा पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया है। वॉर्श ने स्पष्ट किया कि वह मूल्य स्थिरता हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों की दिशा को लेकर कोई निश्चित संकेत नहीं दिए। इस गैर-प्रतिबद्ध बयान से ग्रीनबैक कमजोर हुआ।
अमेरिकी डॉलर में आई ताजा कमजोरी के चलते डॉलर बनाम जापानी येन में भी भारी बिकवाली देखी गई और यह जोड़ी गिरकर 158.00 के अहम स्तर से नीचे आ गई। डॉलर इंडेक्स में नरमी से अन्य प्रमुख मुद्राओं को संभलने का मौका मिला है।
सोने में मजबूती और अक्टूबर के उच्चतम स्तर की ओर कदम
मुद्रा बाजार के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी तेजी का रुख दिखाई दे रहा है। सोने की कीमतें लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज करते हुए 4,180 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गईं। तेजी की उम्मीद रखने वाले कारोबारियों का अगला लक्ष्य 4,230 डॉलर का स्तर है, जो अक्टूबर महीने के कारोबारी दायरे का ऊपरी छोर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की इस हफ्ते आई नरम टिप्पणियों ने सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को जोरदार सहारा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर में सट्टेबाजी समर्थन काफी कमजोर पड़ गया है।


















