अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में बहुमूल्य धातु सोना इन दिनों कड़े इम्तिहान के दौर से गुजर रहा है। पिछले सत्रों में आठ सप्ताह के निचले स्तर 4,110 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़कने के बाद सर्राफा बाजार में जो हल्की रिकवरी आई थी, वह अब 4,200 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ठीक नीचे सुस्त पड़ती नजर आ रही है। बुधवार के शुरुआती कारोबारी सत्र में एशियाई घंटों के दौरान धातु में ठहराव देखा गया। बाजार की पूरी निगाहें अब अमेरिका के आने वाले दो बेहद अहम आंकड़ों पर टिकी हैं, जिनमें निजी क्षेत्र का एडीपी रोजगार आंकड़ा और फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना यानी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स शामिल हैं। इन आंकड़ों के नतीजे ही तय करेंगे कि केंद्रीय बैंक आगामी बैठकों में मौद्रिक सख्ती जारी रखेगा या ढील देगा।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल के तेवर
कीमती धातुओं के बाजार को एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग का समर्थन मिलना चाहिए था, मगर स्थिति इसके उलट जटिल हो चुकी है। हाल के दिनों में उभरी नई कूटनीतिक और भू-राजनीतिक चिंताओं के साथ-साथ कच्चे तेल के दामों में होने वाले उतार-चढ़ाव ने महंगाई को लेकर निवेशकों के माथे पर सिलवटें ला दी हैं। यही कारण है कि सोने की कीमतों में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिल रहा है। हालांकि, कुछ राहत भरी खबरें भी मध्य पूर्व से आती दिखीं, जहां कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ताएं दोबारा पटरी पर लौटने की उम्मीद बंधी। इस कूटनीतिक पहल के चलते कच्चे तेल में आई तेज बिकवाली ने सर्राफा को थोड़ी सांस लेने का मौका दिया और धातु 4,110 डॉलर के गर्त से ऊपर उठ पाई। इसके बावजूद जब तक तेल के रुख और समग्र आपूर्ति श्रृंखला पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक सोने पर दबाव बने रहने की आशंका है।
फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी नीति को लेकर वायदा कारोबारियों के दांव में बड़ा फेरबदल हुआ है। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर महीने में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना अब घटकर 47 फीसदी रह गई है। केवल एक दिन पहले तक बाजार करीब 70 प्रतिशत से अधिक संभावना मानकर चल रहा था कि फेड दरें बढ़ाएगा। इस धारणा में अचानक आए बदलाव के पीछे न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स का बयान प्रमुख कारण रहा। उन्होंने संकेत दिया कि मुद्रास्फीति को केंद्रीय बैंक के 2 फीसदी के वार्षिक लक्ष्य पर वापस लाने के लिए नीति निर्माताओं को इस साल संभवतः सिर्फ एक और बार ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
विलियम्स ने नीतिगत फैसलों में हड़बड़ी न दिखाने की बात कही। उन्होंने रेखांकित किया कि सितंबर की बढ़ोतरी के बाद स्थिति का आकलन धैर्य से करना जरूरी है। यदि आर्थिक आंकड़े उम्मीद के अनुरूप रहते हैं, तो एक और दर वृद्धि काफी हो सकती है। उनकी इस नपी-तुली टिप्पणी से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में सभी अवधियों के दौरान गिरावट दर्ज की गई। यील्ड पर बने दबाव ने अमेरिकी डॉलर में मुनाफावसूली को बढ़ावा दिया, जिससे ग्रीनबैक में नरमी आई और सोने को नीचे के स्तरों पर खरीदारी का सहारा मिला।
तकनीकी स्तरों पर बिकवाली का साया
दैनिक तकनीकी चार्ट पर अगर नजर डालें, तो सोने का रुख अब भी मंदी के दायरे में ही दिखाई दे रहा है। हाजिर बाजार में धातु 4,175.27 डॉलर प्रति औंस के करीब घूम रही है और यह अपने सभी प्रमुख सिंपल मूविंग एवरेज के नीचे फिसल चुकी है। पहले जो तकनीकी स्तर मजबूती का आधार थे, वे अब सख्त रुकावट यानी रेजिस्टेंस बन चुके हैं। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, 21-दिवसीय एसएमए 4,320.18 डॉलर पर, 50-दिवसीय एसएमए 4,322.71 डॉलर पर, 100-दिवसीय एसएमए 4,287.98 डॉलर पर और 200-दिवसीय लंबी अवधि का एसएमए 4,538.15 डॉलर पर स्थित है। ये सभी ऊपर की तरफ मजबूत बाधा बनकर खड़े हैं।
इसके अलावा, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 39.78 के स्तर पर चल रहा है, जो तटस्थ क्षेत्र से ठीक नीचे रहकर यह दर्शाता है कि हालिया गिरावट के बाद भी मंदी की गति बरकरार है, यद्यपि यह अत्यधिक ओवरसोल्ड स्थिति में नहीं है। ऊपर की तरफ पहला तात्कालिक अवरोध 4,312.54 डॉलर के करीब गिरती ट्रेंड लाइन पर है। इसके पार जाने पर 4,320 से 4,323 डॉलर का सघन दायरा सामने आएगा। दूसरी ओर, गिरावट की स्थिति में 3,999.15 डॉलर के दायरे से शुरू होने वाली चढ़ती हुई ट्रेंड लाइन सबसे अहम बुनियादी सपोर्ट है। यदि यह सपोर्ट स्तर टूटता है, तो सोने में एक व्यापक सुधारात्मक गिरावट का रास्ता खुल सकता है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सत्र में सोना 4,180 डॉलर पर सपाट बना हुआ है, जबकि इसका 52-सप्ताह का दायरा 3,821 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। दैनिक तकनीकी संकेतकों में आरएसआई 34 के आसपास है और एमएसीडी -55.46 पर रहकर मंदी का रुझान दिखा रहा है। औसत ट्रू रेंज 99.30 पर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दर्शाती है। सत्र के लिए दैनिक पिवट बिंदु 4,203 डॉलर पर है, जबकि तात्कालिक सपोर्ट 4,155 डॉलर (एस1) और 4,130 डॉलर (एस2) तथा रेजिस्टेंस 4,228 डॉलर (आर1) और 4,276 डॉलर (आर2) पर आंका गया है।
मुद्रास्फीति, केंद्रीय बैंक और सोने का आपसी तालमेल
वित्तीय बाजारों में मुद्रास्फीति और मुद्रा की चाल का गणित समझना जरूरी है। अमेरिका का ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस अपनी जीडीपी रिपोर्ट के बाद पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स के साथ व्यक्तिगत आय और खर्च के आंकड़े जारी करता है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के नीति निर्माता वार्षिक कोर पीसीई को महंगाई का सबसे प्रामाणिक पैमाना मानते हैं क्योंकि यह खाद्य और ईंधन जैसी अत्यधिक अस्थिर कीमतों को बाहर रखता है। यदि यह आंकड़ा अपेक्षा से अधिक आता है, तो अमेरिकी डॉलर को बल मिलता है क्योंकि इससे फेड द्वारा सख्त नीति जारी रखने के आसार बढ़ जाते हैं।
आमतौर पर जब किसी देश में कोर महंगाई दर केंद्रीय बैंक के निर्धारित 2 फीसदी के दायरे से ऊपर भागती है, तो नीति निर्माता ब्याज दरों में बढ़ोतरी का हथियार अपनाते हैं। ऊंची ब्याज दरें विदेशी पूंजी को आकर्षित करती हैं, जिससे उस देश की मुद्रा मजबूत होती है। परंपरागत रूप से निवेशक महंगाई से बचाव के लिए सोने में पूंजी लगाते थे, मगर आधुनिक मौद्रिक व्यवस्था में ऊंची ब्याज दरें सोने के आकर्षण को कम कर देती हैं। चूंकि सोने पर कोई ब्याज या लाभांश नहीं मिलता, इसलिए निश्चित आय वाले बॉन्ड या नकद खातों की तुलना में इसे रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जब महंगाई घटती है और केंद्रीय बैंक दरें घटाते हैं, तो सोने की चमक फिर लौट आती है।
वैश्विक मुद्राओं का मिजाज
बुधवार को केवल सोने में ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार में भी हलचल सीमित रही। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब कारोबार करता दिखा। अगस्त महीने के ऑस्ट्रेलियाई अंतर्निहित सीपीआई आंकड़े कमजोर आने से रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा आगे ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फिर गया। दूसरी ओर, डॉलर-येन जोड़ी 157.00 के नीचे दबाव में रही क्योंकि बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित बाजार हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन को सहारा दिया, भले ही जापान के घरेलू औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री के आंकड़े कमजोर रहे हों। समग्र वित्तीय बाजार अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की दिशा देखकर ही अपनी अगली चाल तय करेगा।



















