अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में जापानी येन ने अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत रुख दिखाया है, जिससे यूरो और येन की विनिमय दर दबाव में आ गई है। टोक्यो में नीति निर्माताओं और शीर्ष वित्त अधिकारियों की ओर से मुद्रा में तेज गिरावट को लेकर दी गई चेतावनियों के असर से येन को खासा सहारा मिला। इसके परिणामस्वरूप EUR/JPY मुद्रा जोड़ी 178.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गई है। बाजार के तकनीकी संकेतकों से पता चलता है कि यह करेंसी क्रॉस फिलहाल एक ढलान वाले चैनल के भीतर फंसा हुआ है, जहां अल्पकालिक और मध्यम अवधि के मूविंग एवरेज कीमतों पर भारी दबाव बनाए हुए हैं।
जापानी नीति निर्माताओं के कड़े रुख से बदला बाजार का मिजाज
वैश्विक मुद्रा बाजारों में जब अधिकांश संपत्तियों में रक्षात्मक रुख देखा जा रहा था, तब जापानी मुद्रा ने एक अलग ही दिशा पकड़ी। स्कॉटियाबैंक के विश्लेषकों ने इस बात को रेखांकित किया कि जी10 मुद्राओं के बीच येन अकेला ऐसा अपवाद रहा जिसने व्यापक मंदी के रुख को तोड़ा। एशियाई व्यापार सत्र के अंतिम पहर में इस मुद्रा में तेजी तब आई जब जापान के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप मंत्री अत्सुशी मिमुरा ने बाजार को स्पष्ट संदेश दिया।
अत्सुशी मिमुरा ने बाजार सहभागियों को आगाह करते हुए पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री ताकाइची और वित्त मंत्री कातायामा द्वारा दी गई चेतावनियों को गंभीरता से लेने की याद दिलाई। जब देश के सर्वोच्च नीतिगत स्तरों से मुद्रा के अवमूल्यन पर इस तरह की निरंतर चेतावनियां दोहराई जाती हैं, तो ट्रेडर और बड़े फंड येन में शॉर्ट पोजीशन काटने के लिए मजबूर होते हैं। इस कूटनीतिक और वित्तीय रुख ने क्रॉस करेंसियों में जापानी मुद्रा को मजबूती दी, जबकि अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों में सुस्ती का माहौल छाया रहा।
तकनीकी परिदृश्य: चार्ट पर बिकवाली का दबाव और मूविंग एवरेज
तकनीकी मोर्चे पर EUR/JPY का रुख निकट अवधि में मंदी का बना हुआ है। इसका मुख्य कारण यह है कि कीमतें 9-अवधि और 50-अवधि के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA से नीचे बनी हुई हैं। जब छोटी अवधि का मूविंग एवरेज लंबी अवधि के औसत के नीचे रहता है और हाजिर भाव दोनों से नीचे कारोबार करता है, तो यह कई परतों वाली रेजिस्टेंस छत की तरह काम करता है। तकनीकी आंकड़ों के अनुसार 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 31.77 पर आ गया है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के काफी करीब है। यह स्थिति दर्शाती है कि बिकवाली की गति भले ही थोड़ी धीमी हो रही हो, लेकिन इसमें किसी निर्णायक उलटफेर का कोई ठोस प्रमाण नहीं दिखा है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के संदर्भ में देखें तो EUR/JPY 178.32 के स्तर पर देखा गया, जो पिछले बंद भाव 178.92 से 0.33 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 174.83 से 187.93 के बीच रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर सामान्य बना हुआ है। अन्य संकेतकों में आरएसआई 34 के स्तर पर दर्ज किया गया, जबकि एमएसीडी -1.07 पर है जो -1.13 के सिग्नल स्तर के मुकाबले 0.07 का मामूली हिस्टोग्राम दिखाता है। मूविंग एवरेज की स्थिति देखें तो 20-दिवसीय ईएमए 180.24, 50-दिवसीय ईएमए 181.97 और 200-दिवसीय ईएमए 182.75 पर स्थित हैं। इसी तरह 50-दिवसीय एसएमए 182.67 और 200-दिवसीय एसएमए 184.07 पर बना हुआ है, जिसमें लंबी अवधि का डाउनट्रेंड और डेथ क्रॉस (50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे जाना) स्पष्ट नजर आ रहा है।
नीचे के सपोर्ट और ऊपर की रुकावटों के प्रमुख स्तर
यदि बिकवाली का यह मौजूदा दबाव बना रहता है, तो EUR/JPY गिरकर अपने अवरोही चैनल की निचली सीमा 176.90 तक जा सकता है। चार्ट पर इससे नीचे का अगला बड़ा स्तर 175.70 पर स्थित है, जो नवंबर 2025 में दर्ज किया गया 11 महीने का निचला स्तर था। इसके विपरीत, यदि बाजार में कोई तकनीकी उछाल आता है, तो मुद्रा जोड़ी सबसे पहले 9-दिवसीय ईएमए यानी 179.13 की ओर बढ़ सकती है।
इस अल्पकालिक मूल्य औसत से ऊपर निकलना बाजार में तेजी के उलटफेर का संकेत दे सकता है, जिसके बाद अगला लक्ष्य 50-दिवसीय ईएमए 181.83 का परीक्षण करना होगा। यदि खरीदार नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो अगली रुकावट 184.50 के आसपास चैनल की ऊपरी सीमा पर मिलेगी। इस मुद्रा जोड़ी का सर्वकालिक उच्चतम स्तर 187.95 पर दर्ज है, जो 17 अप्रैल को बना था। लाइव तकनीकी ढांचे के लिहाज से 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 176.89 से 182.46 के बीच फैला है, जिसका मध्य स्तर 179.67 है। 14-दिवसीय एडीएक्स 31 पर रहकर एक सक्रिय ट्रेंडिंग बाजार की पुष्टि कर रहा है। स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 24 और सिग्नल लाइन 30 पर है, जबकि 14-दिवसीय एटीआर 1.44 दैनिक अस्थिरता दर्शाता है। इंट्राडे स्तरों में पिवट 178.07 पर है, जिसमें सपोर्ट स्तर एस1 177.58 और एस2 176.83 पर तथा रेजिस्टेंस आर1 178.82 और आर2 179.32 पर देखे जा रहे हैं।
बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति और मुद्रा के उतार-चढ़ाव का इतिहास
जापान का केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ जापान देश में मौद्रिक नीति तय करने का सर्वोच्च निकाय है। इसका प्राथमिक अधिदेश बैंक नोट जारी करना और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्रा तथा मौद्रिक नियंत्रण बनाए रखना है, जिसके तहत करीब 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति का लक्ष्य रखा गया है। जापान दशकों तक कम मुद्रास्फीति और मंदी के दबाव से जूझता रहा, जिससे निपटने के लिए बैंक ऑफ जापान ने 2013 में एक बेहद ढीली मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी।
इस रणनीति का मुख्य आधार क्वांटिटेटिव एंड क्वालिटेटिव ईजिंग यानी QQE था। इसके तहत केंद्रीय बैंक ने बाजार में नकदी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए नोट छापकर सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड जैसी संपत्तियों की व्यापक स्तर पर खरीदारी शुरू की। 2016 में केंद्रीय बैंक ने अपनी इस योजना को और आक्रामक बना दिया। उसने पहले नकारात्मक ब्याज दरों की व्यवस्था लागू की और फिर अपने 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड के यील्ड को सीधे तौर पर नियंत्रित करना शुरू किया जिसे यील्ड कर्व कंट्रोल कहा गया। हालांकि, जब घरेलू और वैश्विक आर्थिक समीकरण बदले, तो मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की और अपनी दशकों पुरानी अति-ढीली मौद्रिक नीति के रुख से पीछे हटने का औपचारिक फैसला लिया।
नीतिगत अंतर और येन के मूल्यह्रास का व्यापक प्रभाव
बैंक ऑफ जापान द्वारा दिए गए भारी वित्तीय प्रोत्साहन और नोट छापने की नीति का जापानी मुद्रा पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ा था। इस वजह से येन अपनी सभी प्रमुख प्रतिस्पर्धी वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले काफी कमजोर हो गया। यह स्थिति 2022 और 2023 में बहुत अधिक बिगड़ गई। उस दौरान दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने कई दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंची महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में आक्रामक रूप से बढ़ोतरी की, जबकि बैंक ऑफ जापान अपनी बेहद ढीली नीति पर टिका रहा।
इस नीतिगत अंतर के चलते अन्य विदेशी मुद्राओं और येन के यील्ड में बड़ा अंतर पैदा हो गया, जिसने येन के मूल्य को भारी नुकसान पहुंचाया। यह रुझान 2024 में आंशिक रूप से बदला, जब जापानी केंद्रीय बैंक ने अपनी अति-ढीली नीति को अलविदा कह दिया। कमजोर येन और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में आए उछाल ने जापानी मुद्रास्फीति को बढ़ा दिया, जिससे यह बैंक ऑफ जापान के 2 प्रतिशत के लक्ष्य को पार कर गई। इसके साथ ही देश में वेतन वृद्धि की उम्मीदों ने भी महंगाई को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई।
व्यापक एशियाई बाजार में अन्य मुद्राओं और कमोडिटी की चाल
बुधवार के एशियाई सत्र में व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिली। AUD/USD की जोड़ी गिरकर 0.6950 के पास दो महीने के निचले स्तर पर आ गई। दरअसल अगस्त महीने के ऑस्ट्रेलियाई अंतर्निहित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिसने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके अलावा चीन के विनिर्माण पीएमआई आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई मदद नहीं मिल सकी, भले ही अमेरिकी डॉलर की बढ़त थमी हुई थी।
दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी बुधवार के एशियाई सत्र में 157.00 से नीचे बनी रही। बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त नीतिगत कदमों की अपेक्षाओं और मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने घरेलू औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री के कमजोर आंकड़ों के बावजूद जापानी येन को संभाले रखा। इस दौरान अमेरिकी डॉलर में आई व्यापक नरमी ने भी इस जोड़ी को नीचे धकेलने में भूमिका निभाई। कमोडिटी बाजार में, सोना अपने आठ सप्ताह के निचले स्तर 4,110 डॉलर से सुधरने के बाद एशियाई सत्र में स्थिरता दिखाता रहा, लेकिन अमेरिकी एडीपी रोजगार रिपोर्ट और मुख्य पीसीई मूल्य सूचकांक के आंकड़ों से पहले यह 4,200 डॉलर से नीचे ही कारोबार करता दिखा।



















