वैश्विक सर्राफा बाजार में शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार आंकड़ों यानी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट के जारी होने से पहले कारोबारी नई दिशा तय करने से बच रहे हैं। अमेरिकी डॉलर करीब डेढ़ साल के उच्च स्तर के आसपास मजबूती से टिका हुआ है, जिससे पीली धातु की तेजी पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों के कारण उपजी मुद्रास्फीति की चिंताओं ने अमेरिकी बांड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनाए रखा है, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में लिवाली की गति धीमी पड़ गई है।
एशियाई कारोबारी सत्र में सोने में कुछ बिकवाली देखी गई, हालांकि किसी बड़े गिरावट के बजाय भाव एक सीमित दायरे में बंधे रहे। बाजार का पूरा ध्यान अमेरिकी श्रम बाजार के ताजा आंकड़ों पर टिका है, जो केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर निर्णयों के लिए स्पष्ट संकेत दे सकते हैं। सितंबर महीने के लिए पेरोल संख्या में करीब 90,000 नौकरियों के जुड़ने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले महीने के 162,000 के आंकड़े से उल्लेखनीय रूप से कम है। वहीं बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर रहने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा प्रति घंटा औसत कमाई में होने वाले बदलाव से मजदूरी आधारित महंगाई का रुख स्पष्ट होगा, जो फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को दिशा देने में मदद करेगा।
तकनीकी स्तर और चार्ट पर अहम रुकावटें
चार्ट विश्लेषण के अनुसार सोने की कीमतों में किसी भी संभावित सुधार को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यदि भाव 4,200 डॉलर के स्तर को पार करते हैं, तो उन्हें तुरंत 61.8% रिट्रेसमेंट स्तर 4,230 डॉलर के करीब मजबूत रुकावट मिल सकती है। इसके ऊपर 50% रिट्रेसमेंट स्तर 4,319 डॉलर पर स्थित है, जो 200-पीरियड सिंपल मूविंग एवरेज यानी 4,386 डॉलर और 38.2% रिट्रेसमेंट 4,408 डॉलर से ठीक पहले अगला अवरोधक क्षेत्र बनता है। यह पूरा दायरा एक सघन आपूर्ति क्षेत्र को दर्शाता है, जिसमें 23.6% रिट्रेसमेंट स्तर 4,519 डॉलर पर ऊपरी सीमा के रूप में मौजूद है। मौजूदा मंदी के रुख को पूरी तरह पलटने के लिए इस ऊपरी स्तर को पार करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
गिरावट की स्थिति में सोने के लिए शुरुआती समर्थन 78.6% फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 4,103 डॉलर पर देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो हालिया निचला स्तर 3,942 डॉलर के करीब अगला अहम सपोर्ट साबित हो सकता है। मौजूदा बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना 4,213 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 4,202 डॉलर से 0.25% अधिक है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 38 पर दर्ज है, जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD -59.45 पर सिग्नल लाइन -37.81 से नीचे मंदी का संकेत दे रहा है। 50-दिवसीय और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज के बीच डेथ क्रॉस की स्थिति भी मध्यम अवधि में सतर्क रहने का इशारा कर रही है।
अमेरिकी पेरोल रिपोर्ट और मौद्रिक नीति का संबंध
नॉन-फार्म पेरोल आंकड़े अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स द्वारा जारी की जाने वाली मासिक श्रम रिपोर्ट का एक केंद्रीय हिस्सा हैं। यह आंकड़ा कृषि क्षेत्र को छोड़कर पिछले महीने के दौरान अर्थव्यवस्था में जुड़े या घटे कामकाजी लोगों की संख्या को मापता है। यह डेटा फेडरल रिजर्व की दोहरी जिम्मेदारी, यानी पूर्ण रोजगार सुनिश्चित करने और महंगाई दर को 2% के लक्ष्य पर बनाए रखने की प्रगति का मूल्यांकन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जब पेरोल आंकड़े अनुमान से बेहतर आते हैं, तो यह दर्शाता है कि अधिक लोगों के पास रोजगार है, उनकी आमदनी बढ़ रही है और वे बाजार में खर्च करने में सक्षम हैं। मजबूत रोजगार बाजार के कारण मांग जनित महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा होता है, जिससे निपटने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है या उन्हें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रख सकता है। इसके विपरीत, यदि रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो श्रम बाजार को सहारा देने के लिए नीतिगत दरों में कटौती की संभावना बढ़ जाती है। अक्टूबर बैठक को लेकर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कमजोर पड़ने के बावजूद निवेशक इस रिपोर्ट से नई दिशा तलाश रहे हैं।
डॉलर और सोने की कीमतों पर प्रभाव की गणित
ऐतिहासिक रूप से नॉन-फार्म पेरोल और अमेरिकी डॉलर के बीच सकारात्मक सह-संबंध देखा जाता है। जब रोजगार के आंकड़े बाजार के अनुमान से अधिक मजबूत आते हैं, तो अमेरिकी डॉलर में आमतौर पर तेज उछाल आता है क्योंकि यह सख्त मौद्रिक नीति और ऊंची ब्याज दरों का संकेत देता है। इसके विपरीत कमजोर आंकड़े डॉलर पर दबाव डालते हैं। डॉलर की चाल का सीधा असर सोने पर पड़ता है, क्योंकि अधिकांश अंतरराष्ट्रीय जिंसों की तरह सोने की कीमतें भी अमेरिकी मुद्रा में तय होती हैं।
सोने और रोजगार रिपोर्ट के बीच आम तौर पर नकारात्मक सह-संबंध देखने को मिलता है। डॉलर के मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए एक औंस सोना खरीदना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित होती है। इसके अलावा, ऊंची ब्याज दरों के माहौल में नकदी और बांड जैसी संपत्तियां निवेशकों को निश्चित प्रतिफल प्रदान करती हैं, जिससे बिना ब्याज देने वाले सोने की निवेश आकर्षण क्षमता कम हो जाती है। जब रोजगार आंकड़े मजबूत आते हैं, तो यह सोने की कीमतों पर दबाव डालने का काम करता है, जबकि कमजोर आंकड़े सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन प्रदान करते हैं।
रोजगार रिपोर्ट के अन्य घटकों की अहमियत
बाजार केवल मुख्य पेरोल संख्या पर ही प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि कई बार रिपोर्ट के अन्य घटक पूरी दिशा बदल देते हैं। उदाहरण के लिए, यदि मुख्य रोजगार संख्या अनुमान से अधिक आती है लेकिन औसत साप्ताहिक कमाई में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज होती है, तो बाजार मुख्य आंकड़े के मुद्रास्फीति प्रभाव को नजरअंदाज कर सकता है और कमाई में कमी को मंदी का संकेत मान सकता है।
इसके साथ ही श्रम भागीदारी दर और काम के औसत साप्ताहिक घंटे भी बाजार की धारणा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। वित्तीय संकट या श्रम बाजार में बड़े संरचनात्मक बदलावों के दौर में इन आंतरिक घटकों का असर काफी गहरा देखा गया है। इसलिए जब तक रिपोर्ट के सभी आंकड़े स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक व्यापारी किसी एक दिशा में आक्रामक सौदे बनाने से बचते हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य मुद्राओं का रुख
रोजगार रिपोर्ट से पहले मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों में भी हलचल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर शुक्रवार के सत्र में सुधरकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ा है। डॉलर के 17 महीने के उच्चतम स्तर से मुनाफावसूली के चलते पीछे हटने का लाभ ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मिला है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक यील्ड में मजबूती और महंगाई के जोखिमों के बीच ऑस्ट्रेलिया में नवंबर महीने में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावनाओं ने भी इसे सहारा दिया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन 158.00 के स्तर के पास नई गति पाने के लिए संघर्ष करता दिखाई दिया। टोक्यो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुमान से अधिक गर्म रहने और डॉलर में आई सामान्य नरमी के कारण यह अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से नीचे फिसल गया। विभिन्न मुद्राओं के व्यापारी अपने पोर्टफोलियो को पुनर्गठित कर रहे हैं ताकि रोजगार रिपोर्ट के जारी होने के बाद पैदा होने वाली किसी भी बड़ी अस्थिरता से निपटा जा सके। सोने में भी एशिया सत्र के दौरान 4,200 डॉलर के स्तर को दोबारा हासिल करने के कई प्रयास विफल रहे हैं, जिससे यह साफ है कि आगामी सरकारी आंकड़े ही बाजार का अगला बड़ा रुख तय करेंगे।



















