ब्रिटेन के वित्तीय बाजारों में केंद्रीय बैंक के नवीनतम नीतिगत फैसलों के बाद एक अहम मोड़ देखने को मिला है। बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने के निर्णय के साथ-साथ क्वांटिटेटिव टाइटनिंग योजना में किए गए अप्रत्याशित पुनर्गठन ने सरकारी बॉन्ड बाजार को उल्लेखनीय सहारा दिया है। ब्याज दरों में स्थिरता की उम्मीद वित्तीय विश्लेषकों को पहले से ही थी, क्योंकि बैठक से ठीक पहले बाजार केवल 2 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना देख रहा था। वास्तविक आश्चर्य नीतिगत दरों से नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट को सिकोड़ने की अद्यतन रूपरेखा से सामने आया है। इस तकनीकी फेरबदल ने आगामी बजट से पहले सरकारी ऋण बाजार के जोखिमों को काफी हद तक हल्का कर दिया है, जिसका असर ब्रिटिश पाउंड और दीर्घकालिक प्रतिभूतियों पर साफ दर्ज किया गया।
गिल्ट बिक्री का नया ढांचा और लंबी अवधि के बॉन्ड पर असर
बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा घोषित क्वांटिटेटिव टाइटनिंग योजना के तहत सरकारी ऋण प्रतिभूतियों की बिक्री के तौर-तरीकों में बड़ा संरचनात्मक बदलाव किया गया है। केंद्रीय बैंक ने तय किया है कि 2035 से 2049 के बीच परिपक्व होने वाले 20 अरब पाउंड मूल्य के गिल्ट्स की सक्रिय वार्षिक बिक्री अब खुले बाजार में सीधे करने के बजाय ऋण प्रबंधन कार्यालय यानी डीएमओ को की जाएगी। द्वितीयक खुले बाजार के बजाय सीधे सरकारी ऋण एजेंसी को बॉन्ड स्थानांतरित करने की इस व्यवस्था का सबसे गहरा असर लंबी अवधि की प्रतिभूतियों पर पड़ा।
इस निर्णय के तुरंत बाद 30 वर्षीय गिल्ट की यील्ड में 12 आधार अंकों की तेज गिरावट दर्ज की गई। सरकारी बॉन्ड यील्ड में यह नरमी दर्शाती है कि बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति को लेकर जो आशंकाएं बनी हुई थीं, वे तुरंत कम हो गई हैं। हालांकि इस घोषणा के बाद ब्रिटिश पाउंड में प्रारंभिक गिरावट देखी गई, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि 28 अक्टूबर को पेश होने वाले आगामी बजट से पहले गिल्ट बाजार के जोखिमों का घटना पाउंड के लिए किसी भी बड़े नकारात्मक झटके को सीमित करने का काम करेगा। सरकारी उधारी की लागत स्थिर होने से नीतिगत घोषणाओं के दौरान मुद्रा पर पड़ने वाला अनपेक्षित दबाव काफी हद तक नियंत्रित रह सकता है।
बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और येन पर बढ़ता दबाव
वैश्विक केंद्रीय बैंकों की गतिविधियों के बीच एशियाई सत्र में बैंक ऑफ जापान का कदम भी केंद्र में रहा। बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया यह कदम कई हफ्तों से बाजार की आम अपेक्षाओं के अनुरूप ही था। इस निर्णय के पक्ष में सात सदस्यों ने मतदान किया, जबकि दो सदस्यों ने बढ़ोतरी के खिलाफ असहमति दर्ज कराई।
नीतिगत दर में बढ़ोतरी और बैंक गवर्नर उएदा की सख्त टिप्पणियों के बावजूद जापानी येन में मजबूती के बजाय कमजोरी का रुख देखने को मिला। बोर्ड के भीतर दो सदस्यों के अप्रत्याशित विरोध ने निवेशकों का ध्यान खींचा, जिससे नीतिगत सख्ती की निरंतरता को लेकर संदेह पैदा हुआ। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर के मुकाबले येन में गिरावट बढ़ गई और डॉलर-येन जोड़ी यूरोपीय कारोबारी सत्र में अपने दो सप्ताह के उच्चतम स्तर को छूते हुए 158.00 के करीब पहुंच गई।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त और मजबूत होता सोना
मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख युग्मों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार दूसरे दिन सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता दिखा। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान एयूडी-यूएसडी जोड़ी 0.7100 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर टिकी रही। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी ने डॉलर में आक्रामक तेजी चाहने वाले खरीदारों को बैकफुट पर रखा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को संभलने का मौका मिला। इसके अलावा रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलक की नीतिगत सख्ती की ओर इशारा करने वाली टिप्पणियों ने वहां ब्याज दर बढ़ने के अनुमानों को हवा दी, जिसने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर के नुकसान को सीमित रखा और मुद्रा जोड़ी की ऊपरी बढ़त पर कुछ हद तक ब्रेक लगाया।
कीमती धातुओं के क्षेत्र में सोने ने भी अपनी चमक बनाए रखी। यूरोपीय सत्र के पहले पहर में लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज करते हुए सोने की कीमतें नए साप्ताहिक स्तरों को छूती रहीं। बाजार के खरीदार आगे और लंबी तेजी की स्थिति बनाने से पहले 4,400 डॉलर प्रति औंस के पार एक स्थिर ब्रेकआउट की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने प्रमुख अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के आगामी भाषणों से पहले डॉलर की मजबूती को सीमित रखा, जिससे सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है।
बिटकॉइन का सुधार और डिजिटल परिसंपत्तियों का परिदृश्य
पारंपरिक वित्तीय साधनों के साथ-साथ डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी रिकवरी के स्पष्ट संकेत दिखाई दिए हैं। बिटकॉइन ने जुलाई में 57,800 डॉलर के वार्षिक निचले स्तर तक फिसलने के बाद जोरदार वापसी की है। इस प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी ने अपने निचले स्तर से लगभग 33% की मजबूत बढ़त दर्ज की है और जुलाई तथा अगस्त के महीनों में लगातार दो महीने मासिक लाभ दर्ज करने में सफलता हासिल की है।
इस ठोस उछाल के बावजूद बिटकॉइन अभी भी अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर से लगभग 40% नीचे बना हुआ है। बाजार के विश्लेषक और तकनीकी व्यापारी इस समय एक बुनियादी सवाल पर विचार कर रहे हैं कि क्या यह मौजूदा सुधार एक नए बड़े बुल मार्केट चक्र की शुरुआत है, या फिर यह व्यापक मंदी के चक्र के भीतर केवल एक अस्थायी राहत रैली है। बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंकों के रुख और व्यापक लिक्विडिटी की स्थिति आने वाले हफ्तों में डिजिटल परिसंपत्तियों की आगे की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

















