गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन में आई तेज बढ़त के कारण ब्रिटिश पाउंड में भारी गिरावट दर्ज की गई। लगातार दूसरे दिन विदेशी मुद्रा बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे जीबीपी/जेपीवाई (GBP/JPY) क्रॉस गिरकर तीन और आधे हफ्ते के निचले स्तर 212.75-212.70 के दायरे में आ गया। बाजार में येन की चौतरफा मांग बढ़ने से स्पॉट कीमतों पर असर पड़ा है। इस समय मंदी का रुख रखने वाले कारोबारी कीमतों को 200-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर से नीचे धकेलने की कोशिश में जुटे हैं।
बैंक ऑफ जापान की दरों में बढ़ोतरी और हाजिमे तकाता का बयान
जापानी येन की इस मजबूती के पीछे मुख्य वजह बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदें हैं। विदेशी मुद्रा बाजार के कारोबारी अब इस बात की काफी संभावना जता रहे हैं कि केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा करेगा। वायदा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 17-18 सितंबर को होने वाली बैंक ऑफ जापान की अगली बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (bps) की वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही, दिसंबर में भी एक और दर वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
दरों में बढ़ोतरी की इन अटकलों को बैंक ऑफ जापान के बोर्ड सदस्य हाजिमे तकाता के बयानों से और बल मिला। बुधवार को अपने संबोधन में हाजिमे तकाता ने कहा कि केंद्रीय बैंक को हर छह महीने में दरें बढ़ाने के तय ढर्रे पर चलने के बजाय स्थिति के अनुसार अधिक फुर्तीला रुख अपनाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद निवेशकों का विश्वास बढ़ा कि बैंक ऑफ जापान अनुमान से पहले मौद्रिक नीति में बदलाव कर सकता है, जिससे येन को मजबूत समर्थन मिला।
रेट चेक की चर्चा और सरकारी हस्तक्षेप की आशंका
जापानी येन में आई तेजी का एक अन्य प्रमुख कारण बाजार में फैली यह आशंका है कि जापानी अधिकारियों ने रेट चेक की प्रक्रिया शुरू की है। विदेशी मुद्रा बाजार में रेट चेक को अक्सर केंद्रीय बैंक द्वारा अपनी मुद्रा को संभालने के लिए किए जाने वाले प्रत्यक्ष हस्तक्षेप का शुरुआती संकेत माना जाता है। इस डर से सट्टेबाजों ने अपनी पोजीशन बदली, जिससे पाउंड पर दबाव और बढ़ गया।
हालांकि, येन में आई इस तेजी के बीच विश्लेषकों का मानना है कि जापान की राजकोषीय समस्याएं इसकी बढ़त को एक सीमा में रख सकती हैं। जापान पर मौजूद भारी सरकारी कर्ज के कारण येन की दीर्घकालिक मजबूती पर असर पड़ सकता है। वहीं, ब्रिटिश पाउंड में मामूली मजबूती निचले स्तरों पर स्पॉट कीमतों को सहारा दे सकती है। इस हफ्ते के आंकड़ों से पता चलता है कि जापानी येन प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रही, जिसमें न्यूजीलैंड डॉलर के खिलाफ इसकी सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की गई।
जीबीपी/यूएसडी और ईयूआर/यूएसडी बाजार की स्थिति
जीबीपी/जेपीवाई में आई इस गिरावट के साथ-साथ अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ों में भी हलचल देखी गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD), जिसे केबल भी कहा जाता है, में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहा। हालांकि, बुधवार को 1.3470 के चार हफ्ते के निचले स्तर को छूने के बाद इसमें हल्का सुधार दर्ज किया गया। डॉलर के सुस्त प्रदर्शन और वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं के बावजूद केबल में यह सुधारात्मक गिरावट देखने को मिली है।
दूसरी ओर, ईयूआर/यूएसडी (EUR/USD) जोड़ी पर भी बिकवाली का दबाव बना रहा और बुधवार को उत्तरी अमेरिकी सत्र की समाप्ति तक यह 1.1580 के स्तर के पास पहुंच गई। अमेरिकी डॉलर धीरे-धीरे अपनी खोई हुई जमीन हासिल कर रहा है और निचले स्तरों से उबरते हुए यूरोपीय मुद्राओं पर दबाव बना रहा है।
ऊर्जा बाजार का हाल: अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड रिकॉर्ड स्तर पर
मुद्रा बाजार के अलावा ऊर्जा क्षेत्र से भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। हालांकि कच्चे तेल का बाजार पिछले कुछ महीनों की तुलना में शांत नजर आ रहा है, लेकिन रिफाइंड उत्पादों के बाजार में तनाव साफ देखा जा सकता है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड के बीच का अंतर दिखाता है, इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया।
दिन के कारोबार के दौरान यह क्रैक स्प्रेड $102.00 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। रिफाइनिंग मार्जिन में हुई यह तेज बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहने के बावजूद मिडिल डिस्टिलेट्स की आपूर्ति काफी तंग बनी हुई है। डीजल रिफाइनिंग की बढ़ती लागत का असर आने वाले समय में वैश्विक परिवहन और माल ढुलाई के खर्च पर पड़ सकता है।



















