अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में सोमवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन में जोरदार मजबूती दर्ज की गई, जिसके चलते ब्रिटिश पाउंड में गिरावट आई और यह 208.40 के स्तर के करीब फिसल गया। कारोबारी दिन की शुरुआत लगभग 209.10 के सपाट स्तर पर हुई थी, लेकिन बाद में ब्रिटिश पाउंड 0.3% की कमजोरी दर्ज करते हुए दबाव में आ गया। इस मुद्रा जोड़े पर बिकवाली का मुख्य कारण जापान की तरफ से सरकारी कर्ज जारी करने को लेकर आया सख्त रुख रहा। जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार नए ऋण जारी करने पर कड़ा नियंत्रण लागू करेगी, जिससे मुद्रा कारोबारियों के बीच येन की साख और मांग दोनों में इजाफा देखा गया।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले जापानी येन का प्रदर्शन
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में जापानी येन सोमवार को कई प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं की तुलना में बढ़त हासिल करने में सफल रहा। मुद्रा विनिमय तालिका और हीट मैप के आंकड़ों से पता चलता है कि जापानी येन सबसे ज्यादा मजबूती यूरो के मुकाबले दर्ज कर रहा था। इस बाजार हीट मैप में बाईं तरफ की पंक्ति आधार मुद्रा को दर्शाती है और शीर्ष स्तंभ कोट मुद्रा को रेखांकित करता है। जब येन को आधार मुद्रा मानकर अमेरिकी डॉलर जैसी अन्य मुद्राओं के मुकाबले देखा जाता है, तो दोनों के बीच प्रतिशत परिवर्तन साफ तौर पर येन की सुधरती स्थिति को दर्शाता है।
विशेष रूप से यूरो भारी बिकवाली के दबाव का सामना कर रहा था, क्योंकि फ्रांस में बढ़ते राजकोषीय और वित्तीय जोखिमों ने यूरोपीय साझा मुद्रा पर नकारात्मक असर डाला है। ऐसे समय में जब यूरोप में वित्तीय अनिश्चितता छाई हुई है, जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए की अनुशासित वित्तीय नीति संबंधी टिप्पणी ने एशिया प्रशांत क्षेत्र की इस अहम मुद्रा को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूती प्रदान की है। सुरक्षित निवेश परिसंपत्ति के रूप में येन की मांग ऐसे तनावपूर्ण कारोबारी माहौल में तेजी से बढ़ी है।
टोक्यो मुद्रास्फीति के आंकड़ों से मौद्रिक नीति में सख्ती की उम्मीदें
जापान के मौद्रिक नीति परिदृश्य पर नजर डालें तो शुक्रवार को जारी हुए सितंबर महीने के टोक्यो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़े अनुमान से कहीं अधिक गर्म रहे हैं। इन आंकड़ों ने यह संभावना काफी बढ़ा दी है कि बैंक ऑफ जापान आने वाले समय में अपनी मौद्रिक नीतियों को और सख्त कर सकता है। राजधानी टोक्यो के मुद्रास्फीति आंकड़े पूरे देश में मूल्य दबाव के प्रमुख अग्रिम संकेतक के तौर पर देखे जाते हैं, इसलिए वित्तीय विश्लेषकों का ध्यान बुनियादी महंगाई की रफ्तार पर केंद्रित हो गया है।
एमयूएफजी/बीटीएमयू के विश्लेषकों ने इस बात पर जोर दिया है कि हालिया मुद्रास्फीति रिपोर्ट ने मूल्य दबावों को बाजार की चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। एमयूएफजी/बीटीएमयू के अनुसार, हेडलाइन टोक्यो सीपीआई सितंबर में सालाना आधार पर बढ़कर 2.7% तक पहुंच गया, जो बाजार की आम सहमति वाले 2.5% और अगस्त के 1.9% के आंकड़े से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। इसके अलावा, ताजे फल और ऊर्जा को छोड़कर कोर टोक्यो सीपीआई सालाना आधार पर 3.0% तक पहुंच गया, जबकि इसका अनुमान 2.5% था और अगस्त में यह 2.0% दर्ज किया गया था। यह ताकाइची प्रशासन के तहत अब तक का सबसे उच्चतम स्तर दर्ज किया गया है, जिससे केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में और बढ़ोतरी का आधार तैयार हो रहा है।
वैश्विक वित्तीय तंत्र में येन की भूमिका और बैंक ऑफ जापान का इतिहास
जापानी येन दुनिया की सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्राओं में शुमार है। इसके मूल्य का निर्धारण व्यापक तौर पर जापानी अर्थव्यवस्था की सेहत, बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक दिशा, जापानी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के अंतर तथा विदेशी मुद्रा कारोबारियों की जोखिम उठाने की क्षमता से तय होता है। बैंक ऑफ जापान के मुख्य दायित्वों में मुद्रा का स्थिरीकरण भी शामिल है, इसलिए केंद्रीय बैंक के कदम येन की दिशा के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। पूर्व में केंद्रीय बैंक ने मुद्रा बाजार में सीधे हस्तक्षेप कर येन के मूल्य को प्रभावित करने के प्रयास किए हैं, खासकर इसके मूल्य को कम रखने के लिए, हालांकि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के राजनीतिक विरोध के चलते ऐसे कदम अक्सर टाल दिए जाते हैं।
वर्ष 2013 से 2024 के बीच बैंक ऑफ जापान की अत्यधिक उदार मौद्रिक नीति ने येन को प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले काफी कमजोर किया था, क्योंकि जापान और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों में भारी अंतर आ गया था। विशेषकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने और जापान द्वारा बेहद सस्ती ऋण नीति जारी रखने से 10 वर्षीय अमेरिकी और जापानी सरकारी बॉन्ड यील्ड का अंतर बहुत चौड़ा हो गया था, जिससे अमेरिकी डॉलर को येन की तुलना में भारी बढ़त मिली थी। हालांकि, 2024 में केंद्रीय बैंक द्वारा इस अति उदार मौद्रिक नीति को धीरे-धीरे समाप्त करने के फैसले और दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों में कटौती शुरू करने से यह अंतर अब लगातार सिमट रहा है, जिससे येन को व्यापक समर्थन मिल रहा है। तनाव के समय में वैश्विक निवेशक येन की स्थिरता और विश्वसनीयता पर भरोसा जताते हैं, जिससे जोखिम भरी मुद्राओं की तुलना में येन मजबूत हो जाता है।
डॉलर मजबूती और व्यापक कमोडिटी बाजार का परिदृश्य
विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य मोर्चों पर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बिकवाली का दबाव देखा गया और सोमवार को देर से एशियाई कारोबार में एयूडी/यूएसडी गिरकर 0.6900 के स्तर की ओर फिसल गया। अमेरिकी डॉलर में आई ताजा मजबूती, मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच इस मुद्रा जोड़े पर भारी पड़ रही है। निवेशक अब कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की आगामी नीतिगत उम्मीदों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि नए व्यापारिक संकेत मिल सकें।
उधर यूएसडी/जेपीवाई ने एशियाई सत्र में अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई की और 158.00 का स्तर फिर से हासिल कर लिया, जो एक सप्ताह पुराने कारोबारी दायरे के भीतर घूम रहा है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने के बावजूद वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है, हालांकि बैंक ऑफ जापान की सख्ती की उम्मीदें और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप का खतरा डॉलर की बढ़त को सीमित रख सकता है।
कीमती धातुओं के बाजार में, सोना यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक 4,150 डॉलर प्रति औंस से नीचे कारोबार करते हुए सीमित दायरे में बना रहा। शुक्रवार के निराशाजनक अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर ने जोरदार वापसी की और अप्रैल 2025 के बाद के अपने नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस डॉलर उछाल ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है, हालांकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की संभावना कमजोर पड़ने से सोने की गिरावट थमी हुई है।
क्रिप्टोकरेंसी और यूरोपीय साझा मुद्रा का रुख
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में, बीएनबी, जिसे पहले बाइनेंस कॉइन के नाम से जाना जाता था, लगातार तीन हफ्तों की बढ़त के बाद सोमवार को थोड़ा नरम होकर लगभग 790 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। डेरिवेटिव्स बाजार में ओपन इंटरेस्ट में बढ़ोतरी और सकारात्मक फंडिंग दरें यह संकेत दे रही हैं कि ट्रेडर्स के बीच तेजी की स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।
दूसरी ओर, यूरो/यूएसडी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को यह गिरकर 1.1312 पर आ गया था और यह जनवरी के अपने 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे चल रहा है। यूरोप की मुद्रा में यह बड़ी गिरावट अमेरिकी डॉलर की जबर्दस्त मजबूती, अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से यूरोपीय अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान की चिंताओं के साझा दबाव का परिणाम है।


















