अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में चीनी मुद्रा युआन अपने उल्लेखनीय सुधार के दौर से गुजर रही है। युआन वर्ष 2022 के बाद से अपने सबसे मजबूत व्यापारिक स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मूल्यांकन संकेत देते हैं कि चीनी मुद्रा अपने वास्तविक मूल्य से काफी नीचे बनी हुई है। वैश्विक वित्तीय संस्थान सोसिएते जेनेराले के अनुसार, मुद्रा की यह मजबूती देश की आंतरिक आर्थिक स्थिति की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। चीन वर्तमान में एक के-आकार के सुधार से जूझ रहा है, जहां एक ओर विदेशी मांग और विनिर्माण क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू मांग और आंतरिक उपभोग में सुस्ती बरकरार है।
मुद्रा मूल्यांकन और आंतरिक आर्थिक असंतुलन
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के मुताबिक, चीनी युआन का अवमूल्यन 17.3 प्रतिशत से 25.3 प्रतिशत के दायरे में बना हुआ है, जिसका मध्य बिंदु लगभग 21.3 प्रतिशत बैठता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति चीन के आंतरिक आर्थिक असंतुलन को सीधे तौर पर दर्शाती है। हालांकि मुद्रा विनिमय बाजार में युआन में मजबूती आई है, लेकिन व्यापक अर्थव्यवस्था में सुधार एक समान नहीं है। विनिर्माण और निर्यात आधारित क्षेत्रों को वैश्विक मांग का लाभ मिल रहा है, जबकि सेवा क्षेत्र और खुदरा उपभोग अपेक्षित गति हासिल नहीं कर पा रहे हैं। इस असमानता ने आर्थिक नीति निर्माताओं के लिए एक पेचीदा स्थिति पैदा कर दी है, जिन्हें मुद्रा की मजबूती और घरेलू व्यापारिक दबावों के बीच संतुलन साधना पड़ रहा है।
महंगाई के मिले-जुले संकेत और कारखानों पर बढ़ता दबाव
चीन के घरेलू बाजार से सामने आए मुद्रास्फीति के आंकड़े अर्थव्यवस्था की धीमी गति की पुष्टि करते हैं। सितंबर महीने में मुख्य हेडलाइन मुद्रास्फीति मामूली रूप से बढ़कर 0.9 प्रतिशत पर पहुंची, जबकि कोर मुद्रास्फीति बिना किसी बदलाव के 1.0 प्रतिशत पर स्थिर रही। ये आंकड़े बताते हैं कि आम उपभोक्ता स्तर पर मांग बेहद सीमित है। इसके विपरीत, थोक उत्पादन स्तर पर स्थिति अलग दिख रही है। कारखानों की लागत मापने वाला उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई सितंबर में बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो अगस्त में 3.8 प्रतिशत दर्ज किया गया था। कारखाने की उत्पादन लागत में यह तेज उछाल इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि उत्पादक अपनी बढ़ी हुई इनपुट लागत को उपभोक्ताओं पर डालने में असमर्थ हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ रहा है।
निर्यात में भारी उछाल और 2026 के विकास लक्ष्य
आंतरिक सुस्ती के विपरीत, चीन के विदेशी व्यापार ने असाधारण प्रदर्शन दर्ज किया है। सितंबर महीने में देश के निर्यात में सालाना आधार पर 29.6 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। विदेशी बिक्री में आई इस तेज वृद्धि ने चीन के मासिक व्यापार अधिशेष को बढ़ाकर 133.53 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा दिया। बाहरी मांग से मिलने वाले इस मजबूत सहारे के दम पर अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि चीन अपने वर्ष 2026 के विकास लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकता है। अधिकारियों ने 2026 के लिए 4.5 प्रतिशत से 5.0 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। जानकारों का कहना है कि मौद्रिक नीतियों में थोड़े अतिरिक्त लचीलेपन और लक्षित वित्तीय समर्थन के जरिए इस विकास दर को सुरक्षित किया जा सकता है। आने वाले दिनों में नीतिगत भाषणों और अतिरिक्त आर्थिक आंकड़ों से इस दिशा में और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख से विदेशी मुद्रा बाजार में फेरबदल
चीनी मुद्रा के साथ-साथ दुनिया भर के मुद्रा बाजारों में भी अमेरिकी केंद्रीय बैंक के संकेतों के बाद तेज हलचल देखने को मिल रही है। फेडरल रिजर्व के प्रमुख वॉर्श की टिप्पणियों ने अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया है। वॉर्श ने स्पष्ट किया कि वे मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों के रुख को लेकर कोई निश्चित संकेत नहीं दिया। उनकी इस गैर-प्रतिबद्धता भरी टिप्पणी के कारण डॉलर कमजोर हुआ, जिसका सीधा फायदा अन्य प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को मिला।
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत वापसी करते हुए 0.6950 के स्तर की ओर छलांग लगाई। दूसरी तरफ, डॉलर की चौतरफा बिकवाली के चलते यूएसडी/जेपीवाई विनिमय दर पर भारी दबाव देखा गया और जापानी येन के मुकाबले डॉलर 158.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों को अपनी मुद्रा रणनीतियों में बदलाव करने पर विवश कर दिया है।
कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार की चाल
मुद्रा बाजार के अलावा कीमती धातुओं और डिजिटल संपत्तियों में भी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना शुक्रवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के प्रमुख स्तर के नीचे लगातार घट-बढ़ के दौर से गुजरता रहा। अमेरिकी डॉलर में आई नरमी और ट्रेजरी प्रतिफल में आई हल्की रिकवरी के बीच पीली धातु की कीमतें किसी एक स्पष्ट दिशा में बढ़ने में असमर्थ दिखीं। निवेशक व्यापक आर्थिक संकेतों और केंद्रीय बैंकों के अगले कदमों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
डिजिटल परिसंपत्तियों के मोर्चे पर भी अक्टूबर का महीना चुनौतीपूर्ण रहा है। दुनिया की सबसे प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन इस हफ्ते 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई थी। हालांकि शुक्रवार को इसमें मामूली सुधार देखा गया और यह संभलकर लगभग 82,000 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। व्यापक आर्थिक चिंताओं, धीमी संस्थागत मांग और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण क्रिप्टो बाजार पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिससे कारोबारी सतर्कता बरत रहे हैं।

















