यूरो क्षेत्र में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर अब अन्य उपभोक्ता उत्पादों और सेवाओं तक फैलने के संकेत मिलने लगे हैं। कमरज़बैंक के आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, आने वाले महीनों में ऊर्जा लागत में इजाफे के मद्देनजर कंपनियां अन्य वस्तुओं और सेवाओं के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। ईंधन के दामों में वृद्धि के साथ-साथ प्राकृतिक गैस की बढ़ती लागत आगामी तिमाहियों में बिजली और अन्य बुनियादी सेवाओं के खर्चों में बड़ा इजाफा कर सकती है, जिसे फर्में सीधे तौर पर ग्राहकों पर डालने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
ऊर्जा संकट और बढ़ती लागत का व्यापक प्रभाव
व्यापारिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के सामने कच्चे माल और संचालन लागत की गंभीर चुनौती खड़ी हो रही है। जब प्राकृतिक गैस और ईंधन के भाव चढ़ते हैं, तो उसका सीधा असर विनिर्माण, परिवहन और बिजली उत्पादन पर पड़ता है। कमरज़बैंक का मानना है कि आने वाले महीनों में बहुत सी फर्में बढ़ी हुई ऊर्जा लागत का बोझ अंतिम उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित करेंगी। यह दबाव केवल कुछ खास क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय पूरी अर्थव्यवस्था की उत्पादन शृंखला को प्रभावित कर सकता है, जिससे सेवा क्षेत्र और सामान्य उत्पादों की कीमतों में भी तेजी आ सकती है।
कोर महंगाई दर 3 प्रतिशत से ऊपर जाने के संकेत
मुद्रास्फीति के आंकड़ों का आकलन बताता है कि वार्षिक दर की तुलना में हालिया गति अधिक तीव्र बनी हुई है। वर्तमान में तीन महीने की वार्षिक कोर महंगाई दर लगभग 3 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच चुकी है, जो कि सालाना दर से भी अधिक है। यह अंतर इस बात का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में मुख्य कोर महंगाई दर में और बढ़ोतरी दर्ज होगी। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले साल के मध्य तक कोर दर बढ़कर 3 प्रतिशत से भी ऊपर निकल सकती है।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर प्रभाव
अगर कोर महंगाई दर में इस प्रकार का उछाल आता है, तो यह ईसीबी यानी यूरोपीय केंद्रीय बैंक के तय अनुमानों से काफी अधिक होगा। केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्यों से ऊपर रहने वाली महंगाई नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है। इस स्थिति के चलते अगले साल ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी का जोखिम काफी बढ़ जाएगा। जब तक मांग और मूल्य दबाव नियंत्रण में नहीं आते, तब तक मौद्रिक सख्ती जारी रहने की संभावना प्रबल बनी रहेगी।
अमेरिकी राजनीति और वैश्विक मुद्रा बाजार की हलचल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान राजनीतिक घटनाक्रमों का गहरा असर देखा गया। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों के कारण राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई, जिससे अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव देखने को मिला। इसके चलते यूएसडी/जेपीवाई बुधवार को भारी बिकवाली के दबाव में आकर एशियाई कारोबार के दौरान 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गया और अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर पर आ गया। वॉशिंगटन में गतिरोध की संभावना ने सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ावा दिया, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट दर्ज की गई और डॉलर पर दबाव और बढ़ गया। दूसरी ओर, एयूडी/यूएसडी बुधवार को एशियाई सत्र में 0.6965 के करीब कारोबार करते हुए दो सप्ताह के निचले स्तर के ऊपर स्थिर बना रहा। हालांकि, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित कर दिया।
सोने की कीमतों में उछाल और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की स्थिति
कमजोर होते डॉलर और घटती बॉन्ड यील्ड का फायदा सुरक्षित निवेश संपत्तियों को मिला है। सोना लगातार दो दिनों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए बुधवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के प्रमुख स्तर को पार करने में सफल रहा। अमेरिकी डॉलर में भारी गिरावट, यील्ड कर्व में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की कमी और कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने सोने की इस रिकवरी में अहम भूमिका निभाई। दूसरी तरफ, व्यापक क्रिप्टो बाजार में जोखिम लेने की भावना में सुधार देखने को मिला। बिटकॉइन बुधवार को 78,000 डॉलर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। एथेरियम ने भी इसी प्रकार के सुधार के संकेत दिए और 2,300 डॉलर के ऊपर बना रहा, जबकि एक्सआरपी ने लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज करते हुए 1.28 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार किया।



















