यूरोपीय मुद्रा में मंगलवार को शुरुआती बढ़त के बाद गिरावट देखी गई, जिससे EUR/USD जोड़ी दैनिक चार्ट पर नकारात्मक दायरे में आ गई और 1.1625 के स्तर तक खिसक गई। जर्मनी के नए व्यापार आंकड़ों में निर्यात में गिरावट के बावजूद अधिशेष बढ़ने की बात सामने आई है। इसके साथ ही मध्य पूर्व में ऊर्जा अवसंरचना को लेकर बढ़ती चेतावनियों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने यूरोपीय अर्थव्यवस्था की विकास संभावनाओं पर असर डाला है।
जर्मनी का व्यापार अधिशेष बढ़ा पर निर्यात घटे
जर्मनी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जुलाई महीने में देश का व्यापार अधिशेष बढ़कर 21.3 अरब यूरो पहुंच गया। यह आंकड़ा जून के 15.4 अरब यूरो के अधिशेष और बाजार के 16 अरब यूरो के अनुमान से काफी बेहतर है। हालांकि व्यापार अधिशेष में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण आयात में आई बड़ी गिरावट रही।
जुलाई के दौरान जर्मन निर्यात में 0.8% की अप्रत्याशित कमी दर्ज की गई, जबकि बाजार को इसके स्थिर (0%) रहने की उम्मीद थी। दूसरी ओर आयात में 5.7% की भारी गिरावट आई, जिसने जून में दर्ज की गई 4.5% की वृद्धि को पूरी तरह पलट दिया। आयात में इस तेज संकुचन ने ही निर्यात की कमी की भरपाई करते हुए कुल व्यापार अधिशेष को ऊंचा बनाए रखा।
भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा बाजारों का दबाव
व्यापार आंकड़ों के अलावा भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी तनाव भी यूरो की किसी भी संभावित तेजी को रोक रहा है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों में स्थित ऊर्जा ढांचों, जिनमें अमेरिकी तेल और गैस ठिकाने भी शामिल हैं, पर नए हमलों की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इस बयानबाज़ी ने जारी संघर्ष के जल्द समाधान की उम्मीदों को झटका दिया है। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा ले जाने वाला हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है। इन परिस्थितियों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। ऊर्जा की ये ऊंची कीमतें यूरो ज़ोन की आर्थिक वृद्धि के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
अमेरिकी डॉलर और आगामी मुद्रास्फीति आंकड़े
अमेरिका में हाल ही में जारी नॉन-फार्म पेरोल (NFP) आंकड़ों ने अमेरिकी डॉलर को कुछ सहारा दिया है। हालांकि वित्तीय संस्था ओसीबीसी के विश्लेषकों का मानना है कि यह डेटा अकेले डॉलर में लंबी तेजी लाने के लिए पर्याप्त नहीं है। मजबूत रोजगार आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं और फेडरल रिजर्व द्वारा सख्ती बनाए रखने की संभावना को जीवित रखते हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों की नज़र अब इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों पर टिकी है। यदि मुद्रास्फीति के आंकड़े अनुमान से अधिक आते हैं, तो यह डॉलर में नई मजबूती का कारण बन सकते हैं। इसके विपरीत, यदि आंकड़े नरम रहते हैं, तो विनिमय दर में दोनों तरफ का उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
एशियाई सत्र में अन्य मुद्राओं और जिंसों का हाल
एशियाई कारोबार के दौरान AUD/USD जोड़ी 0.7200 से ऊपर बनी रही, जो 14 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। जापानी येन में आई तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। इसके साथ ही रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा इस महीने ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदों ने भी इसे गति दी, हालांकि चीन के मिले-जुले व्यापार आंकड़ों ने बढ़त सीमित रखी।
दूसरी ओर USD/JPY जोड़ी 153.50 के पास छह महीने के निचले स्तर पर कारोबार करती दिखी। जापान में बेहतर वेतन वृद्धि और दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में संशोधन के बाद बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगले सप्ताह दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।
सोने के बाजार में दो दिनों की गिरावट के बाद एशियाई सत्र में खरीदारी लौटी, क्योंकि डॉलर तीन हफ्ते के उच्चतम स्तर से पीछे हटा। हालांकि फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बनी उम्मीदों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण डॉलर को निचला सहारा मिलता रहा, जिससे बिना ब्याज वाले सोने की तेजी सीमित रही।
इधर डीजल बाजार में भारी तेजी देखी गई है। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI के बीच का अंतर (क्रैक स्प्रेड) पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जिसने कारोबार के दौरान 102.00 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ।



















