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ईरान से बातचीत की उम्मीद में कच्चे तेल में भारी गिरावट, सोना और चांदी चमकेबाज़ार
4 अग॰ 2026, 3:45 am (2 दिन पहले)· 0

ईरान से बातचीत की उम्मीद में कच्चे तेल में भारी गिरावट, सोना और चांदी चमके

कच्चे तेल में तेज गिरावट से महंगाई की चिंता कम हुई और हाजिर सोना $4,060 प्रति औंस के पार, तो चांदी $58 के ऊपर पहुंच गई। ईरान के साथ शांति वार्ता दोबारा शुरू होने की खबर ने बाजार का रुख बदल दिया।

सोमवार को सोने की कीमतों में तेजी लौटी और यह $4,060 प्रति औंस के पार पहुंच गया। कच्चे तेल के दामों में आई तेज गिरावट ने महंगाई की चिंता को कम किया, जिससे निवेशक दोबारा कीमती धातुओं की ओर लौटे। हाजिर सोना 0.6% चढ़ा और पिछले सत्र में हुए नुकसान की भरपाई कर ली। यह उछाल तब आया जब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता आज फिर से शुरू होगी। मध्य पूर्व में तनाव घटने की उम्मीद ने तेल की कीमतों को नीचे धकेला, और इसी ने महंगाई तथा ब्याज दरों को लेकर पूरा नजरिया बदल दिया, जो सोने के बाजार को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।

कच्चे तेल में बड़ी गिरावट

सत्र की सबसे बड़ी हलचल ऊर्जा बाजार से आई। ब्रेंट क्रूड 5% से ज्यादा टूटकर $84 प्रति बैरल के नीचे आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड ऑयल करीब 6% लुढ़ककर $80 प्रति बैरल से नीचे फिसल गया। एक ही सत्र में इतनी बड़ी गिरावट असामान्य मानी जाती है और यह इस बात का संकेत देती है कि दुनिया के सबसे अहम तेल उत्पादक क्षेत्र में टकराव के जोखिम को लेकर कारोबारियों की सोच तेजी से बदली है। जैसे ही आपूर्ति बाधित होने का डर कम होता है, कच्चे तेल की कीमत में जुड़ा युद्ध वाला जोखिम प्रीमियम तेजी से बाहर निकल जाता है, और यहां ठीक यही देखने को मिला।

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वह वार्ता जिसने बाजार का रुख मोड़ा

तेल में बिकवाली की असली वजह वॉशिंगटन के रुख में आया बदलाव रही। ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब समेत मध्य पूर्व के प्रमुख सहयोगियों ने उनसे नियोजित हमले टालकर कूटनीतिक समझौते की राह पकड़ने का आग्रह किया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द दोबारा खोलने की अपनी मांग भी दोहराई, वह संकरा समुद्री रास्ता जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्री तेल गुजरता है। इस रास्ते के खुले रहने और सैन्य कार्रवाई टलने का कोई भी संकेत आपूर्ति में झटके का डर घटाता है, और कारोबारियों ने तुरंत तेल के दाम नीचे धकेल दिए।

सस्ता तेल सोने को क्यों चढ़ाता है

पहली नजर में गिरता तेल और चढ़ता सोना एक-दूसरे के उलट लग सकते हैं, क्योंकि दोनों को अक्सर अनिश्चितता के दौर में खरीदा जाता है। लेकिन असली कड़ी महंगाई और ब्याज दरों से जुड़ी है। सस्ता कच्चा तेल ईंधन और उत्पादन की लागत घटाता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव कम होता है। और जब महंगाई नरम पड़ती है, तो केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरें आक्रामक तरीके से बढ़ाने के बजाय नीति को ढीला रखने की गुंजाइश बनती है। सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए जब दरें बढ़ने की आशंका ठंडी पड़ती है, तब यह ज्यादा आकर्षक हो जाता है। महंगाई का खतरा छोटा दिखने पर निवेशकों ने फिर से सोने में पैसा लगाना ठीक समझा और धातु ने एक ही सत्र पहले गंवाई बढ़त वापस पा ली।

चांदी में उछाल, डॉलर कमजोर

चांदी भी सोने के साथ कदम मिलाकर चली, बल्कि उससे कुछ ज्यादा। हाजिर चांदी 1% से अधिक चढ़कर $58 प्रति औंस के ऊपर पहुंच गई। जिन ताकतों ने सोने को सहारा दिया, उन्हीं का असर पूरी कीमती धातु श्रेणी पर पड़ा। इस बीच अमेरिकी डॉलर 99.5 के स्तर से नीचे फिसल गया। कमजोर डॉलर आमतौर पर सोने और चांदी को अतिरिक्त सहारा देता है, क्योंकि दोनों धातुओं की कीमत डॉलर में तय होती है और डॉलर के नरम पड़ने पर दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए ये सस्ती हो जाती हैं। गिरते डॉलर और शांत होते भू-राजनीतिक माहौल के मेल ने धातुओं को साफ तौर पर हवा दी।

फेडरल रिजर्व का फैसला अब भी बड़ा सवाल

दिनभर की सुर्खियों के नीचे निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल फेडरल रिजर्व ही बना हुआ है। पिछले हफ्ते हुई बैठक में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें जस की तस रखीं। यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं हुआ, तीन अधिकारियों ने असहमति जताई और चेताया कि कदम उठाने में बहुत देर करना आगे चलकर केंद्रीय बैंक को और आक्रामक सख्ती करने पर मजबूर कर सकता है। यह मतभेद दिखाता है कि नीति-निर्माता महंगाई पर काबू पाने और जरूरत से ज्यादा सख्ती से बचने के बीच कितना नाजुक संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल बाजार सख्त नीति की ओर झुका है और सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी की करीब 68% संभावना जता रहा है।

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों का अहम हफ्ता

अगली बड़ी परीक्षा श्रम बाजार से आएगी। निवेशकों का ध्यान अब अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के भरे-पूरे हफ्ते पर टिक गया है, जिसमें शुक्रवार को आने वाली मासिक रोजगार रिपोर्ट सबसे अहम है। यह रिपोर्ट अर्थव्यवस्था की मजबूती के ताजा संकेत देगी और सितंबर में फेडरल रिजर्व के कदम को लेकर उम्मीदों का रुख बदल सकती है। आंकड़े मजबूत रहे तो दर बढ़ोतरी का पक्ष मजबूत होगा, और नरम रहे तो ये दांव उलटी दिशा में जा सकते हैं। सोने के कारोबारी इस पर पैनी नजर रखेंगे, क्योंकि धातु की अगली चाल काफी हद तक ब्याज दरों के नजरिये में आने वाले बदलाव पर निर्भर करेगी।

धातुओं के लिए आगे क्या

फिलहाल तस्वीर कीमती धातुओं के तेजड़ियों के पक्ष में है। सोने का $4,060 के ऊपर और चांदी का $58 के ऊपर टिके रहना, गिरता डॉलर और तेल में आई तेज गिरावट, ये सब मिलकर बता रहे हैं कि युद्ध का डर घटने और महंगाई की उम्मीदें नरम पड़ने का असर हावी है। यहां से आगे की राह इस पर टिकी है कि ईरान के साथ कूटनीतिक कोशिश कितनी टिकाऊ रहती है, और शुक्रवार के रोजगार आंकड़े तथा फेडरल रिजर्व का सितंबर वाला फैसला ब्याज दरों की दिशा को लेकर क्या इशारा करते हैं।

सवाल-जवाब

आज सोने की कीमत में कितनी तेजी आई?
हाजिर सोना 0.6% चढ़कर $4,060 प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया और पिछले सत्र का नुकसान वापस पा लिया।
चांदी का क्या हाल रहा?
हाजिर चांदी 1% से ज्यादा चढ़कर $58 प्रति औंस के ऊपर पहुंच गई।
कच्चे तेल के दाम क्यों गिरे?
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता आज फिर शुरू होगी, जिससे आपूर्ति बाधित होने का डर कम हुआ और तेल नीचे आया।
कच्चा तेल कितना गिरा?
ब्रेंट क्रूड 5% से ज्यादा टूटकर $84 प्रति बैरल के नीचे और अमेरिकी WTI क्रूड करीब 6% गिरकर $80 प्रति बैरल के नीचे आ गया।
ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्या कहा?
उन्होंने इस रास्ते को जल्द दोबारा खोलने की अपनी मांग दोहराई।
सितंबर में फेडरल रिजर्व से क्या उम्मीद है?
बाजार 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी की करीब 68% संभावना जता रहा है।
सस्ता तेल सोने को कैसे फायदा पहुंचाता है?
सस्ता तेल महंगाई का दबाव घटाता है, जिससे आक्रामक ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका ठंडी पड़ती है और सोना ज्यादा आकर्षक हो जाता है।
निवेशक किन आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं?
अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़े, खासकर शुक्रवार को आने वाली मासिक रोजगार रिपोर्ट।
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