अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर का दबदबा लगातार बना हुआ है, जिसके चलते यूरो की कीमतों पर भारी दबाव देखने को मिल रहा है। वित्तीय अनुसंधान फर्म नॉर्डिया के रणनीतिकारों के अनुसार, यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर ने पहली छमाही 2027 के लिए तय 1.12 के लक्ष्य को अनुमान से काफी पहले ही छू लिया है। इस तीव्र बदलाव के बाद बैंक ने अमेरिकी मुद्रा में और अधिक मजबूती आने का अनुमान लगाया है। डॉलर के पक्ष में झुकते इस संतुलन को देखते हुए रणनीतिकारों ने चालू वर्ष के अंत के लिए अपने मुद्रा पूर्वानुमान को संशोधित कर दिया है।
मुद्रा विनिमय दरों के नए अनुमान और समयसीमा
नॉर्डिया ने वर्ष के अंत के लिए यूरो बनाम डॉलर के अपने पूर्व अनुमान 1.14 को घटाकर अब 1.10 कर दिया है। बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2027 के शुरुआती छह महीनों में यह विनिमय दर गिरकर 1.08 के निचले स्तर का भी परीक्षण कर सकती है। हालांकि, लंबी अवधि में यूरो में पुनः सुधार की उम्मीद जताई गई है। अनुमान के अनुसार, 2027 की दूसरी छमाही तक यह जोड़ी वापस 1.14 के स्तर तक पहुंच सकती है, जबकि 2028 के अंत तक इसके सुधरकर 1.20 के स्तर पर जाने का परिदृश्य तैयार किया गया है।
रणनीतिकारों का कहना है कि वे आगामी छह से नौ महीनों के दौरान यूरो की तुलना में डॉलर के रुख को लेकर पूरी तरह सकारात्मक बने हुए हैं। अमेरिकी डॉलर की इस संभावित मजबूती के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण बताए गए हैं। इनमें दोनों क्षेत्रों के बीच ब्याज दरों का अंतर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई क्षेत्र में हो रहे बड़े पैमाने के पूंजीगत निवेश और यूरोपीय देशों में बनी राजनीतिक अनिश्चितताएं शामिल हैं। अमेरिका में आधुनिक तकनीकों के विकास से जुड़ा भारी विदेशी निवेश डॉलर को निरंतर सहारा दे रहा है, जबकि यूरोप के भीतर राजनीतिक जोखिम साझा मुद्रा पर दबाव बना रहे हैं।
फेड चेयर वॉर्श के बयानों से डॉलर पर तात्कालिक दबाव
दीर्घकालिक मजबूत दृष्टिकोण के बावजूद एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान डॉलर को कुछ तात्कालिक झटकों का सामना करना पड़ा। फेडरल रिजर्व के प्रमुख वॉर्श की टिप्पणियों के बाद मुद्रा बाजार में डॉलर की बिकवाली देखने को मिली। वॉर्श ने स्पष्ट किया कि वे मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने आने वाले समय में नीतिगत ब्याज दरों के रुख को लेकर कोई निश्चित संकेत नहीं दिया। सख्त मौद्रिक कदमों पर ठोस प्रतिबद्धता न जताने के कारण अमेरिकी मुद्रा में मुनाफावसूली शुरू हो गई।
इस अस्थिरता का सीधा असर अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर भी पड़ा। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी मुद्रा के खिलाफ दोबारा गति पकड़ी और इसका मूल्य उछलकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ गया। वहीं दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले डॉलर पर नया बिकवाली दबाव बना, जिसके चलते यह जोड़ी शुक्रवार के कारोबारी सत्र में फिसलकर 158.00 के स्तर से नीचे आ गई। फेड अध्यक्ष की अनिर्णायक टिप्पणियों ने निवेशकों को डॉलर में अपनी सट्टेबाजी कम करने पर मजबूर किया।
ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से सोने में लगातार दूसरे दिन तेजी
मुद्रा बाजार के साथ-साथ कीमती धातुओं के बाजार में भी तेजी का रुख देखा गया। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के नरम बयानों ने सोने की कीमतों को जबरदस्त सहारा दिया है। शुक्रवार को सोना लगातार दूसरे कारोबारी दिन बढ़त दर्ज करते हुए 4,180 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया।
बाजार के खरीदारों की नजर अब 4,230 डॉलर के स्तर पर टिकी है, जो अक्टूबर महीने के कारोबारी दायरे की ऊपरी सीमा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों की ओर से ब्याज दरों को लेकर आए नरम रुख के चलते डॉलर का आकर्षण कुछ समय के लिए कमजोर हुआ है, जिससे निवेशकों का रुझान सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की तरफ तेजी से बढ़ा है।



















