अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए तीव्र उछाल और अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीतियों को सख्त बनाए रखने के स्पष्ट संकेतों ने वैश्विक वित्तीय तंत्र को गहरे दबाव में ला खड़ा किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड उछलकर 5.03 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो 19 वर्षों से अधिक समय का एक नया ऐतिहासिक शिखर है। ऋण बाजार में आई इस अप्रत्याशित तेजी की सीधी वजह अमेरिकी सरकार के लिए बढ़ती उधारी लागत और अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूत होती महंगाई की आशंकाएं हैं, जिन्होंने दुनियाभर के निवेशकों को सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करने पर विवश कर दिया है।
कच्चे तेल में लगी आग और महंगाई का विकराल होता संकट
मध्य पूर्व में युद्ध की शुरुआत के बाद से बीते कई महीनों के दौरान कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें अत्यधिक ऊंचे स्तरों पर बनी हुई हैं। ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में दीर्घकालिक व्यवधान उत्पन्न होने की निरंतर चिंताओं के चलते वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ईंधन के इस तरह लगातार महंगे बने रहने की वजह से दुनिया भर में मुद्रास्फीति की प्रत्याशाएं पूरी तरह अस्थिर हो चुकी हैं, जिससे परिवहन और विनिर्माण लागत में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
लगातार बढ़ रहे मुद्रास्फीति के दबावों ने दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों को अपने मौद्रिक रुख को कड़ा करने के लिए बाध्य किया है। नीतिगत दरों को ऊपर खींचने के इसी सिलसिले के तहत इस महीने यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) अपनी प्रमुख दरों में 25 आधार अंकों (bps) की वृद्धि पहले ही अमल में ला चुका है, ताकि यूरो क्षेत्र में बेलगाम होती महंगाई को थामा जा सके।
फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक और ब्याज दरों में वृद्धि की प्रबल संभावना
अब वैश्विक वित्तीय बाजारों की सारी निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की दो दिवसीय नीतिगत बैठक पर टिकी हैं। वित्तीय विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि फेडरल रिजर्व पिछली लगातार पांच बैठकों से ब्याज दरों को यथावत रखने के अपने रुख को इस बुधवार को समाप्त कर सकता है। उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा करेगा, जिससे ब्याज दरें बढ़कर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंच जाएंगी। इसके साथ ही बाजार विशेषज्ञों ने निकट भविष्य में केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में और बढ़ोतरी करने की संभावनाओं को भी कीमतों में शामिल करना शुरू कर दिया है।
बीएनवाई (BNY) के रणनीतिकारों के अनुसार फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) द्वारा बुधवार को 25 आधार अंकों की वृद्धि किए जाने की 90 प्रतिशत से अधिक संभावना बाजार पहले ही मानकर चल रहा है। रणनीतिकारों का आकलन है कि यह निर्णय वित्तीय बाजारों की मौजूदा प्रत्याशाओं के बिल्कुल अनुकूल रहेगा, क्योंकि मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखना अनिवार्य प्रतीत हो रहा है।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा और येन तथा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर टिके रहने और संभावित दर वृद्धि के चलते अमेरिकी डॉलर को व्यापक मजबूती मिली है, जिसका सीधा प्रतिकूल असर अन्य वैश्विक मुद्राओं पर देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान मंगलवार को AUD/USD जोड़ी भारी दबाव में रही और 0.7150 के स्तर से नीचे फिसल गई। यह गिरावट बीते कारोबारी दिन छुए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के बेहद करीब दर्ज की गई है। इसके अलावा अगस्त महीने के लिए जारी हुए चीन के मिश्रित आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास संबल नहीं दिया।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भी कमजोरी देखी गई और मंगलवार सुबह USD/JPY जोड़ी बढ़कर 155.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ अग्रसर दिखी। व्यापारी इस पूरे सप्ताह फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की होने वाली बैठकों के नतीजों की प्रतीक्षा में हैं। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीतियों को सामान्य बनाने की दिशा में सख्त रुख अपनाए जाने की संभावनाओं ने जापानी येन को एक बुनियादी सहारा जरूर दिया है, जिससे USD/JPY की इस तेज बढ़त पर कुछ हद तक रोक लग सकती है।
सोने में भारी सुस्ती और एक महीने के निचले स्तर पर फंसी कीमतें
ऊंचे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और सख्त मौद्रिक रुख की सीधी मार बहुमूल्य धातुओं पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रही है। एशियाई सत्र में मामूली तकनीकी सुधार दर्ज करने के बावजूद सोना अपनी बढ़त को कायम रखने में पूरी तरह विफल रहा और पिछले सत्र में बने अपने एक महीने के निचले स्तर के समीप ही संघर्ष करता नजर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली धातु वर्तमान में 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ठीक नीचे कारोबार कर रही है। मंगलवार से शुरू हो रही फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण दो दिवसीय नीतिगत बैठक के औपचारिक फैसलों के सामने आने तक अधिकांश सर्राफा कारोबारी और संस्थागत निवेशक किसी भी बड़े सौदे से बचते हुए पूरी तरह सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।



















