कनाडा की अर्थव्यवस्था में महंगाई का रुख मिला-जुला बना हुआ है, जहां ऊर्जा उत्पादों की ऊंची लागत समग्र उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को नीचे नहीं आने दे रही है। सितंबर महीने के लिए जारी होने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े लगातार तीसरे महीने सालाना आधार पर 3 प्रतिशत के स्तर पर टिके रहने का अनुमान लगाया गया है। इस स्थिरता के पीछे मुख्य वजह घरेलू ईंधन तेल और गैसोलीन की कीमतों में आया उछाल है, जिसने जीवनयापन की बुनियादी लागत को ऊंचा बनाए रखा है। इसके विपरीत, खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की गति धीमी पड़ रही है, जिससे रोजमर्रा के खर्चों में राहत की कुछ गुंजाइश भी दिखाई दे रही है।
कोर महंगाई में गिरावट और ऊर्जा कीमतों का सीमित फैलाव
ईंधन और खाद्य उत्पादों की अस्थिर कीमतों को अलग रखकर यदि कोर मुद्रास्फीति का विश्लेषण किया जाए, तो स्थिति काफी भिन्न नजर आती है। विश्लेषकों का मानना है कि कोर मुद्रास्फीति अगस्त के 2.1 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 1.8 प्रतिशत पर आ सकती है। यह गिरावट स्पष्ट करती है कि अर्थव्यवस्था के व्यापक हिस्सों में कीमतों को लेकर दबाव कम हो रहा है। ऊर्जा की कीमतों में हुई वृद्धि का असर हवाई किराए जैसे कुछ सीधे जुड़े क्षेत्रों को छोड़कर अन्य मुख्य उपभोक्ता श्रेणियों में बड़े पैमाने पर नहीं फैला है। विश्लेषक परिवहन क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं क्योंकि ईंधन लागत में उतार-चढ़ाव का सबसे सीधा और त्वरित असर यात्रा तथा माल ढुलाई के खर्च पर पड़ता है।
मुद्रास्फीति के विस्तार को मापने वाला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का डिफ्यूजन इंडेक्स भी यह संकेत दे रहा है कि मूल्य वृद्धि का दायरा अभी चिंताजनक रूप से नहीं फैला है। हालांकि, औद्योगिक उत्पादन के स्तर पर तस्वीर थोड़ी सतर्क करने वाली है। औद्योगिक मूल्य सूचकांक से जुड़ा डिफ्यूजन इंडेक्स कीमतों में फैलाव के शुरुआती संकेत दे रहा है। उत्पादन के विभिन्न स्तरों से गुजरते हुए कारखानों की बढ़ी हुई लागत को खुदरा दुकानों की अलमारियों तक पहुंचने में लंबा वक्त लगता है, इसलिए निकट भविष्य में सामान्य उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर सीमित रहने की संभावना है।
फेडरल रिजर्व के रुख से अमेरिकी डॉलर पर दबाव
वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस दौरान अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नेतृत्व के बयानों का गहरा असर देखने को मिला है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श की ताजा टिप्पणियों के बाद अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। वॉर्श ने मूल्य स्थिरता बहाल करने के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता तो दोहराई, लेकिन भविष्य में ब्याज दरों के मार्ग को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। इस अनिश्चितता के कारण मुद्रा बाजार में डॉलर कमजोर हुआ और प्रतिद्वंद्वी मुद्राओं को मजबूती हासिल करने का मौका मिला।
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी बढ़त को आगे बढ़ाते हुए 0.6950 के स्तर की ओर छलांग लगाई। डॉलर की कमजोरी ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की। वहीं दूसरी तरफ, डॉलर के कमजोर पड़ने से जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का रुख नरम पड़ गया। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन का विनिमय अनुपात फिसलकर 158.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया। ब्याज दरों को लेकर नीति निर्माताओं की अस्पष्टता ने डॉलर के खरीदारों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की हलचल
कमोडिटी बाजार में सोने की चाल शुक्रवार को अनिर्णायक बनी रही, जहां पीली धातु की कीमत 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक नीचे घटती-बढ़ती देखी गई। अमेरिकी डॉलर में आई हल्की गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली सुधार के चलते सोने के भाव में कोई एकतरफा रुख नहीं बन सका। निवेशक बॉन्ड यील्ड में आने वाले उतार-चढ़ाव और मौद्रिक नीति से जुड़े नए संकेतों की प्रतीक्षा में सतर्क रुख अपना रहे हैं।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी इस अवधि के दौरान सतर्कता का माहौल देखने को मिला है। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में क्रिप्टोकरेंसी बाजार लगातार दबाव का सामना कर रहा है। प्रमुख डिजिटल टोकन बिटकॉइन हफ्ते की शुरुआत में फिसलकर 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे चला गया था। व्यापक आर्थिक चुनौतियों और बाजार में मांग के सुस्त पड़ने के कारण यह बिकवाली दर्ज की गई थी। हालांकि, शुक्रवार को इसमें सुधार देखा गया और बिटकॉइन संभलकर लगभग 82,000 डॉलर के स्तर पर वापस पहुंच गया। कुल मिलाकर, चाहे कनाडा में ऊर्जा प्रेरित महंगाई के आंकड़े हों या वैश्विक मुद्राओं और डिजिटल संपत्तियों में डॉलर की वजह से आई अस्थिरता, निवेशक किसी भी नए आर्थिक आंकड़े से पहले सतर्कता बरत रहे हैं।

















