अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कैनेडियन डॉलर ने अपने लगातार पांच हफ्तों के नुकसान के सिलसिले को तोड़ते हुए शानदार वापसी की है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कैनेडियन करेंसी में आई इस मजबूती के पीछे मुख्य वजह ग्रीनबैक यानी अमेरिकी मुद्रा में चौतरफा देखने को मिली कमजोरी है। अमेरिकी डॉलर और कैनेडियन डॉलर के विनिमय दर (USD/CAD) में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे कैनेडियन डॉलर छह हफ्तों के अंतराल के बाद अपनी पहली साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी से ग्रीनबैक पर दबाव
अमेरिकी मुद्रा में यह कमजोरी ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है। हालांकि बाजार में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और सख्ती किए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं, लेकिन सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई इस नरमी ने डॉलर पर भारी बिकवाली का दबाव बना दिया है। आमतौर पर यील्ड घटने से डॉलर पर मिलने वाला रिटर्न प्रभावित होता है, जिससे विदेशी निवेशक अन्य विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं। यही कारण है कि आने वाले महीनों में दरों में बढ़ोतरी की अटकलों के बावजूद ग्रीनबैक अपनी बढ़त को बनाए रखने में नाकाम रहा है।
फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ कनाडा की आगामी नीतियां
आगामी मौद्रिक नीति बैठकों को लेकर वित्तीय बाजारों में व्यापक आम सहमति नजर आ रही है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ कनाडा दोनों ही अक्टूबर के महीने में अपनी-अपनी नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेंगे और उन्हें यथावत बनाए रखेंगे।
सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा व्यापारी 27-28 अक्टूबर को होने वाली फेड की बैठक में ब्याज दर में बढ़ोतरी की केवल 15 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं। इसके विपरीत, दिसंबर की बैठक को लेकर बाजार का रुख बेहद सख्त है, जहां दरों में बढ़ोतरी की 90 प्रतिशत संभावना आंकी जा रही है। इसका मतलब है कि निकट भविष्य में अमेरिकी केंद्रीय बैंक ठहराव की नीति अपना सकता है, लेकिन साल के अंत तक नीतिगत सख्ती फिर से शुरू हो सकती है।
दूसरी ओर, कैनेडियन डॉलर से जुड़े परिदृश्य में भी व्यापारी दिसंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, अक्टूबर की बैठक में बैंक ऑफ कनाडा द्वारा दरों को स्थिर रखे जाने का अनुमान है, जैसा कि उसने पूरे चालू वर्ष के दौरान किया है। कनाडा में अंतर्निहित महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य के काफी करीब बनी हुई है। इसके साथ ही वहां के श्रम बाजार में सुस्ती और ढीलापन बढ़ता जा रहा है। ऐसे आर्थिक हालातों में बैंक ऑफ कनाडा के पास अल्पावधि में ब्याज दरों को बढ़ाने का कोई ठोस कारण नहीं बचता है।
कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के दबाव का सबसे प्रमुख स्रोत बनी हुई हैं। यह स्थिति विशेष रूप से तब से और गंभीर हो गई है जब फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ा था। तब से लेकर अब तक ऊर्जा बाजार लगातार तनाव के घेरे में है।
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता में अब तक कोई खास प्रगति नहीं दिख रही है। इसके साथ ही सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय स्थिरता को और अधिक खतरे में डाल दिया है। इन भू-राजनीतिक संकटों की वजह से ऊर्जा की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है, जिससे तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। यदि तेल के दाम इसी तरह बढ़े रहते हैं, तो महंगाई लंबे समय तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के तय लक्ष्य से ऊपर बनी रह सकती है, जो केंद्रीय बैंकों के लिए दरों में कटौती की राह को और मुश्किल बनाएगा।
प्रमुख मुद्राओं के बीच कैनेडियन डॉलर का प्रदर्शन
चालू सप्ताह के दौरान प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले कैनेडियन डॉलर का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। विभिन्न मुद्राओं के आपसी प्रतिशत बदलाव को दर्शाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, कैनेडियन डॉलर ने सबसे शानदार बढ़त ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के खिलाफ हासिल की है। यह विभिन्न करेंसियों के बीच पूंजी के रोटेशन को दर्शाता है, जहां कमोडिटी आधारित अन्य मुद्राओं की तुलना में कैनेडियन डॉलर को अधिक तरजीह मिली है।
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की जोड़ी में भी तेजी देखी गई और यह उछलकर 0.6950 के स्तर की तरफ बढ़ गई। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श के बयानों ने अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली के दबाव को और बढ़ा दिया, जिसका लाभ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मिला। वॉर्श ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह मूल्य स्थिरता लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों के रुख को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। भविष्य की नीति पर उनकी इस अनिर्णायक टिप्पणी से अमेरिकी मुद्रा को झटका लगा।
इसी तरह जापानी येन के मुकाबले भी अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) को भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा और शुक्रवार को एशियाई सत्र में यह फिसलकर 158.00 के नीचे आ गया। फेड चेयरमैन वॉर्श द्वारा मौद्रिक सख्ती के अगले कदमों पर ठोस प्रतिबद्धता न जताए जाने के कारण व्यापारियों ने डॉलर में मुनाफावसूली की, जिससे यह करेंसी जोड़ी नीचे आ गई।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की हलचल
मुद्रा बाजार के अलावा कमोडिटी और डिजिटल एसेट्स के बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल रहा। शुक्रवार को सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला और पीली धातु 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक नीचे सीमित दायरे में घटती-बढ़ती रही। अमेरिकी डॉलर में हल्की गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई मामूली सुस्ती ने सोने की कीमतों को एक स्पष्ट दिशा तय करने से रोक दिया।
दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर अक्टूबर के महीने में लगातार दबाव बना हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन (BTC) सप्ताह की शुरुआत में फिसलकर 80,000 डॉलर के नीचे चली गई थी। हालांकि शुक्रवार को इसमें हल्का सुधार देखा गया और यह संभलकर करीब 82,000 डॉलर के आसपास कारोबार करती दिखी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताओं, केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियों और खुदरा निवेशकों की मांग में आई कमी के चलते क्रिप्टो बाजार पर यह सुस्ती हावी है।


















