भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय घरेलू मुद्रास्फीति और विदेशी व्यापार के दोहरे मोर्चे पर एक दिलचस्प मोड़ से गुजर रही है। अगस्त के महीने में देश की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो जुलाई में 4.5 प्रतिशत के स्तर पर थी। हालांकि बाजार के विश्लेषक इसके 4.9 प्रतिशत तक जाने का अनुमान लगा रहे थे, फिर भी यह आंकड़ा दिसंबर 2024 के बाद का उच्चतम स्तर दर्शा रहा है। यह लगातार तीसरा ऐसा महीना है जब खुदरा मूल्य वृद्धि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 4 प्रतिशत के मध्यवर्ती लक्ष्य से ऊपर टिकी हुई है। इसके बावजूद वर्ष की शुरुआत से अब तक का औसत लगभग 3.8 प्रतिशत बना हुआ है, जो केंद्रीय बैंक द्वारा वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए तय 5.0 प्रतिशत के अनुमान और उसके 2 से 6 प्रतिशत के सहनशील दायरे के निचले हिस्से में आता है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ने का जोखिम लगातार बना रहेगा।
केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों पर दृष्टिकोण और नीतिगत संतुलन
महंगाई के इन ताज़ा आंकड़ों ने मौद्रिक नीति के भविष्य को काफी नाजुक संतुलन पर लाकर खड़ा कर दिया है। 7 अक्टूबर को प्रस्तावित अगली मौद्रिक समीक्षा बैठक में नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत के मौजूदा स्तर पर ही यथावत रखे जाने का अनुमान है, लेकिन इसके संकेत कड़े रुख वाले हो सकते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले शुक्रवार को स्पष्ट किया था कि बुनियादी मूल्य दबाव अभी भी सीमित दायरे में हैं। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि फिलहाल ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी या नीति को और सख्त करने की कोई असाधारण हड़बड़ी नहीं है। नीति निर्माताओं का ध्यान इस बात पर है कि विकास की गति को नुकसान पहुंचाए बिना मूल्य स्थिरता को कैसे साधकर रखा जाए।
विदेशी व्यापार घाटे में गिरावट और चालू खाता घाटे की स्थिति
मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच विदेशी व्यापार के मोर्चे से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अगस्त महीने का व्यापारिक घाटा घटकर 26.9 अरब डॉलर पर आ गया, जो जुलाई महीने में 32.0 अरब डॉलर दर्ज हुआ था। बाजार के आम अनुमान 32.2 अरब डॉलर रहने के थे, जिसकी तुलना में यह संकुचन काफी बेहतर साबित हुआ है। व्यापार घाटे में आई इस तेज गिरावट से देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह सुधार ऐसे वक्त में आया है जब चालू खाता पहली तिमाही के 6.5 अरब डॉलर के सरप्लस से पलटकर दूसरी तिमाही में 4.2 अरब डॉलर के घाटे में चला गया था। साथ ही विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए किए गए नीतिगत कदमों ने वित्तीय खाते को भी अतिरिक्त ताकत दी है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का व्यापक प्रभाव
विदेशी मुद्रा बाजारों में इस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी कदमों को लेकर भारी हलचल मची हुई है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले लगातार तीसरे दिन दबाव में रहा और 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करता दिखा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उपजी मुद्रास्फीति की आशंकाओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर वृद्धि के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इन परिस्थितियों में अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब मजबूती से टिका हुआ है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को और हवा दी है, जिसका नकारात्मक असर जोखिम वाली मुद्राओं पर पड़ रहा है।
येन की चाल और अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार का रुख
दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 155.00 के पार निकलकर एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले ट्रेडर्स द्वारा सतर्कता बरतने के कारण यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बनी रही। जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक निवेश में खरबों डॉलर के प्रवाह में अहम भूमिका निभाई थी और येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक रहा था। अब जब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह नीति सख्त करने की संभावना जताई जा रही है, तब वह दौर एक नए मोड़ पर पहुंच सकता है। जहां दुनिया की ज्यादातर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने ब्याज दरें बढ़ाई थीं, वहीं जापान लंबे समय तक अपवाद बना रहा था। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें यूरोपीय सत्र में 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे सीमित दायरे में फंसी नजर आईं। फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले किसी बड़े रुख को लेकर अनिश्चितता के चलते सोना हालिया हल्की बढ़त को भुनाने में संघर्ष करता दिखा।



















