हेल्थकेयर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी पार्क मेडी वर्ल्ड ने उत्तर प्रदेश के बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से एक अहम विस्तार योजना सार्वजनिक की है। कंपनी कानपुर शहर में 300 बिस्तरों वाले एक नए मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का प्रबंधन और संचालन शुरू करने जा रही है। इस घोषणा के सामने आने के बाद बुधवार, 16 सितंबर को शेयर बाजार में पार्क मेडी वर्ल्ड के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया और कंपनी का स्टॉक लाल निशान में बंद हुआ। अस्पताल का संचालन एक लंबी अवधि के समझौते के तहत किया जाएगा, जिसकी बदौलत कंपनी को बिना जमीन और भवन खरीदे अपनी क्षमता बढ़ाने का अवसर मिला है।
शेयर बाजार में कैसा रहा पार्क मेडी वर्ल्ड के स्टॉक का प्रदर्शन
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर 16 सितंबर के कारोबारी सत्र के दौरान पार्क मेडी वर्ल्ड का शेयर 276.80 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 2.35 रुपये या 0.84 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। दिन के कारोबार की शुरुआत में स्टॉक 278.65 रुपये पर खुला था। इसके बाद ट्रेडिंग सत्र के दौरान इसने 281.55 रुपये का इंट्राडे उच्च स्तर छुआ, जबकि बिकवाली के दबाव में यह 273 रुपये के निचले स्तर तक भी फिसला। कारोबारी सत्र के अंत में मामूली सुधार के बावजूद शेयर नुकसान से पूरी तरह उबर नहीं पाया।
एक्सिस एजुकेशनल सोसाइटी के साथ 28 साल का संचालन समझौता
पार्क मेडी वर्ल्ड की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह पूरी परियोजना उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अग्रवाल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (एएचआरएसपीएल) के माध्यम से पूरी की जा रही है। एएचआरएसपीएल ने कानपुर की इस स्वास्थ्य सुविधा के संचालन और प्रबंधन को लेकर एक्सिस एजुकेशनल सोसाइटी के साथ 28 वर्षों का एक दीर्घकालिक अनुबंध किया है। इस साझेदारी के तहत अस्पताल को एक्सिस हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के नाम से जाना जाएगा। यह नई स्वास्थ्य सुविधा कानपुर के रूमा इलाके में स्थित है। इसका कुल कवर्ड क्षेत्रफल लगभग 1.2 लाख वर्ग फुट है और इसे एक आधुनिक मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में तैयार करने की रूपरेखा बनाई गई है।
अस्पताल का स्वामित्व और ऑपरेशन शुरू होने की समयसीमा
दोनों पक्षों के बीच तय हुए समझौते की शर्तों के अनुसार, अस्पताल से जुड़े बुनियादी ढांचे यानी जमीन और इमारत का मालिकाना हक एक्सिस एजुकेशनल सोसाइटी के पास ही बना रहेगा। वहीं पार्क मेडी वर्ल्ड इस पूरे परिसर के संचालन, चिकित्सा सेवाओं और दिन-प्रतिदिन के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगी। वाणिज्यिक संचालन शुरू करने से पहले पार्क मेडी वर्ल्ड इस पूरे अस्पताल परिसर का नवीनीकरण करेगी, आधुनिकीकरण के काम पूरे करेगी और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की स्थापना करेगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक समयसीमा निर्धारित की गई है। नवीनीकरण, आधुनिकीकरण और मेडिकल उपकरणों के लगाने का काम पूरा होने के अधीन, यह अनुबंध 1 अप्रैल 2027 से पहले प्रभावी हो जाने की उम्मीद है।
एसेट-लाइट मॉडल और उसके वित्तीय प्रभाव
कानपुर की यह स्वास्थ्य परियोजना पूरी तरह से एसेट-लाइट विस्तार मॉडल पर आधारित है। सामान्य तौर पर एक नए अस्पताल के निर्माण में जमीन खरीदने और पूरी इमारत खड़ी करने में भारी पूंजी खर्च करनी पड़ती है। इसके विपरीत, पार्क मेडी वर्ल्ड पहले से मौजूद एक ढांचे के प्रबंधन और संचालन की कमान अपने हाथों में ले रही है और केवल उसे कार्यात्मक बनाने के लिए आवश्यक निवेश करेगी। अस्पताल संचालकों के लिए यह दृष्टिकोण संपत्ति से जुड़े बड़े शुरुआती पूंजीगत खर्च को काफी हद तक कम कर देता है। इसके माध्यम से कंपनी अपने नेटवर्क का विस्तार तेजी से कर सकती है। हालांकि, अस्पताल से राजस्व प्रवाह शुरू होने से पहले कंपनी को चिकित्सा उपकरण लगाने, जीर्णोद्धार करने, कुशल कर्मचारियों और डॉक्टरों की तैनाती तथा अन्य परिचालन जरूरतों पर उल्लेखनीय पूंजी व्यय करना होगा। पार्क मेडी वर्ल्ड के नजरिए से देखें तो यह व्यवस्था उसे उत्तर प्रदेश के एक रणनीतिक बाजार में बिना भारी अचल संपत्ति खरीदे सीधे 300 बेड की क्षमता जोड़ने में मदद करेगी।
राजस्व साझाकरण और न्यूनतम गारंटीशुदा भुगतान की शर्तें
एएचआरएसपीएल और एक्सिस एजुकेशनल सोसाइटी के बीच हुआ यह वाणिज्यिक समझौता राजस्व साझाकरण की शर्तों पर टिका है। समझौते के तहत एएचआरएसपीएल अस्पताल के कुल संग्रह यानी कलेक्शंस का 6 प्रतिशत हिस्सा एक्सिस एजुकेशनल सोसाइटी को अदा करेगी, जो लागू करों के अधीन होगा। इसके साथ ही अनुबंध में संपत्ति मालिक के लिए एक न्यूनतम मासिक भुगतान की गारंटी भी तय की गई है। अस्पताल संचालन के पहले वर्ष के दौरान, यह न्यूनतम गारंटीशुदा भुगतान 20 लाख रुपये प्रति माह होगा, जिसमें जीएसटी शामिल रहेगा। वहीं संचालन के दूसरे वर्ष से आगे यह भुगतान राशि 20 लाख रुपये प्रति माह के साथ अलग से अतिरिक्त जीएसटी के रूप में देय होगी। इस वित्तीय ढांचे का सीधा अर्थ यह है कि भवन और जमीन के मालिक को हर महीने एक निश्चित न्यूनतम आय सुनिश्चित रूप से मिलती रहेगी, और साथ ही वे अस्पताल के कुल संग्रह में भी अपनी हिस्सेदारी बनाए रखेंगे। दूसरी ओर, पार्क मेडी वर्ल्ड के लिए भुगतान का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर अस्पताल के वित्तीय प्रदर्शन और राजस्व संग्रह के उतार-चढ़ाव से जुड़ा रहेगा।



















