अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी किए जाने के बाद निवेशकों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ विश्लेषकों के अनुमानों से नीचे रहा है, हालांकि इसी अवधि के दौरान कंपनी के परिचालन से मिलने वाले राजस्व में सालाना आधार पर मामूली सुधार दर्ज किया गया है। सुजलॉन एनर्जी के वित्तीय प्रदर्शन और उसके बाद शेयर बाजार में आई हलचल का विस्तृत ब्योरा नीचे दिया गया है।
शेयर बाजार में सुजलॉन एनर्जी का प्रदर्शन और इंट्राडे रुझान
बुधवार, 29 जुलाई को शुरुआती कारोबार के दौरान सुजलॉन एनर्जी के शेयर लाल निशान में कारोबार करते हुए नजर आए। सुबह 10:20 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी का शेयर 1.89% की गिरावट के साथ 47.12 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट के बाद कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) घटकर 64,705.64 करोड़ रुपये पर आ गया।
बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान शेयर में काफी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। दिन के कारोबार में शेयर ने 48.71 रुपये प्रति शेयर का उच्चतम स्तर (इंट्राडे हाई) छुआ, जबकि बिकवाली का दबाव बढ़ने पर यह 47.01 रुपये प्रति शेयर के निचले स्तर (इंट्राडे लो) तक फिसल गया। वित्तीय नतीजों में उम्मीद से कमजोर आंकड़े सामने आने के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से शेयर में यह लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है।
Q1 FY27 के शुद्ध लाभ और परिचालन राजस्व के आंकड़े
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून तक की पहली तिमाही (Q1FY27) के दौरान सुजलॉन एनर्जी का समेकित शुद्ध लाभ 305.22 करोड़ रुपये रहा। अगर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि (Q1FY26) से इसकी तुलना की जाए, तो तब कंपनी ने 324.32 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। इस प्रकार सालाना आधार पर कंपनी के शुद्ध लाभ में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पिछली तिमाही यानी वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में कंपनी का शुद्ध लाभ 1,114.35 करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर रहा था, जिसकी तुलना में पहली तिमाही के मुनाफे में बड़ी क्रमिक (QoQ) गिरावट आई है।
मुनाफे में आई इस गिरावट के विपरीत कंपनी का परिचालन राजस्व मजबूत बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सुजलॉन एनर्जी का परिचालन से शुद्ध राजस्व 3,819.36 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में दर्ज किए गए 3,117.33 करोड़ रुपये के मुकाबले उल्लेखनीय रूप से अधिक है। हालांकि, पिछली तिमाही (Q4FY26) के 5,468.06 करोड़ रुपये के परिचालन राजस्व की तुलना में इसमें कमी आई है। समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कंपनी का कुल परिचालन राजस्व 3,862.53 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
विंड टरबाइन डिलीवरी और परिचालन खर्चों पर ब्रोकरेज की समीक्षा
वित्तीय नतीजों के जारी होने के बाद जारी एक शोध रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने बताया कि सुजलॉन एनर्जी का पहली तिमाही का मुनाफा उनके अनुमान से 2% कम रहा है। ब्रोकरेज के अनुसार, मुनाफे में इस कमी का मुख्य कारण विंड टरबाइन जनरेटर (WTG) की कम डिलीवरी, अनुमान से अधिक अन्य परिचालन खर्च और टरबाइन सेगमेंट से मिला कम योगदान रहा।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि Q1FY27 में कंपनी का कुल राजस्व INR38.3b रहा, जो सालाना आधार पर 22% की वृद्धि (+22% YoY) दर्शाता है, लेकिन तिमाही आधार पर इसमें 30% की कमी (-30% QoQ) आई है। यह राजस्व आंकड़ा मोतीलाल ओसवाल के अनुमान से 2% कम रहा, क्योंकि तिमाही के दौरान WTG की डिलीवरी 506MW रही, जबकि ब्रोकरेज ने 532MW डिलीवरी का अनुमान लगाया था।
इसके अलावा, कंपनी का कामकाजी मुनाफा यानी EBITDA इस तिमाही में 6 बिलियन रुपये (Rs 6 billion) रहा। इसमें तिमाही आधार पर 38% की भारी गिरावट आई है, जबकि सालाना आधार पर यह लगभग 1% कम है। कंपनी का समायोजित कर-पश्चात लाभ (Adjusted PAT) भी ब्रोकरेज के अनुमान से 26% पीछे रह गया।
मोतीलाल ओसवाल की 'बाय' रेटिंग और 65 रुपये का टारगेट प्राइस
पहली तिमाही के नतीजों में अनुमान से कम प्रदर्शन के बावजूद ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन एनर्जी के शेयर पर अपना सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा है। ब्रोकरेज ने इस स्टॉक पर अपनी 'Buy' रेटिंग को बरकरार रखा है और शेयर के लिए 65 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस (TP) तय किया है।
मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में टारगेट प्राइस के निर्धारण के पीछे के गणित को स्पष्ट करते हुए कहा है कि 65 रुपये का टारगेट प्राइस FY28E EPS पर 30x का टारगेट P/E मल्टीपल लागू करके हासिल किया गया है। यह मूल्यांकन मल्टीपल कंपनी के ऐतिहासिक औसत दो-वर्षीय फॉरवर्ड P/E मल्टीपल (27x) की तुलना में थोड़े प्रीमियम पर आधारित है। ब्रोकरेज का मानना है कि डिलीवरी में आई तात्कालिक सुस्ती के बावजूद कंपनी की दीर्घकालिक ऑर्डर बुक और बैलेंस शीट की स्थिति मजबूत बनी हुई है।



















