वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक तकनीकी मंदी के कारण एशियाई मुद्रा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ताइवान की इक्विटी संपत्तियों से विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी निकासी ने स्थानीय मुद्रा ताइवान डॉलर पर गहरा दबाव बना दिया है। तकनीकी शेयरों के लगातार गिरते मूल्यांकन और जोखिम से बचने की वैश्विक प्रवृत्ति के चलते विदेशी पूंजी की सुरक्षित ठिकानों की ओर वापसी तेज हो गई है। नतीजतन, स्थानीय विदेशी मुद्रा बाजार में ताइवान डॉलर में लगातार गिरावट दर्ज की गई, हालांकि कारोबार के अंतिम घंटों में केंद्रीय हस्तक्षेप की सुगबुगाहट के बाद नुकसान में कुछ हद तक कमी आई।
ताइवान के शेयर बाजार से ऐतिहासिक पूंजी निकासी
गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय फंडों ने ताइवान के शेयर बाजार से रिकॉर्ड 302.5 अरब ताइवान डॉलर के शेयर बेचे। इस अभूतपूर्व बिकवाली ने ताइवान के घरेलू शेयर सूचकांकों के साथ-साथ मुद्रा बाजार की स्थिरता को भी बुरी तरह प्रभावित किया। वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर तकनीकी कंपनियों के शेयरों में जारी तेज बिकवाली ने विदेशी निवेशकों को अपनी पूंजी समेटने पर विवश कर दिया। इस बड़े पैमाने पर पूंजी के बाहर जाने से विदेशी मुद्रा बाजार में स्थानीय मुद्रा की आपूर्ति अचानक बढ़ गई, जिसके कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ताइवान डॉलर की विनिमय दर में तेज गिरावट दर्ज की गई।
केंद्रीय बैंक का रुख और विश्लेषकों का मूल्यांकन
ओसीबीसी के रणनीतिकार सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, ताइवान डॉलर की गिरावट के पीछे इक्विटी बाजार से विदेशी पूंजी का निरंतर बाहर जाना मुख्य कारण है। एशियाई सत्र की समाप्ति के करीब मुद्रा के नुकसान की आंशिक भरपाई देखी गई, जिसका कारण बाजार में यह चर्चा रही कि केंद्रीय बैंक यानी सीबीसी अवमूल्यन की गति को थामने के लिए विपरीत दिशा में कदम उठा रहा है। हालांकि, रणनीतिकारों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है और स्पष्ट किया है कि केवल केंद्रीय बैंक द्वारा बाजार में स्थिरता लाने के प्रयास अत्यधिक अस्थिरता को सीमित कर सकते हैं, लेकिन वे मुद्रा की दिशा को पूरी तरह से उलट नहीं सकते। एक स्थायी और मजबूत सुधार के लिए बुनियादी निवेश प्रवाह में वास्तविक सुधार होना आवश्यक है। जब तक गुरुवार जैसी आक्रामक बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों का रुख नरम नहीं पड़ता, तब तक मुद्रा पर दबाव बना रह सकता है।
अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल
शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी के कारण अन्य वैश्विक मुद्राओं में मिला-जुला रुख देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) ने अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल करते हुए 0.6950 के स्तर की ओर उछाल दर्ज किया। वहीं दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) नई बिकवाली के दबाव में आ गया और शुक्रवार के एशियाई सत्र में 158.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गया। डॉलर में यह सुस्ती फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉश की टिप्पणियों के बाद और गहरी हो गई, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
फेडरल रिजर्व की नीतिगत टिप्पणी का असर
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉश की ताजा टिप्पणियों ने अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ाने का काम किया। अपने संबोधन में वॉश ने स्पष्ट किया कि वह भविष्य में ब्याज दरों के मार्ग पर कोई ठोस संकेत दिए बिना केवल मूल्य स्थिरता बनाए रखने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। भविष्य में मौद्रिक सख्ती या ढील के बारे में किसी स्पष्ट प्रतिबद्धता के अभाव ने नीतिगत अनिश्चितता पैदा कर दी। इस अनिर्णायक रुख के कारण मुद्रा कारोबारियों ने अमेरिकी डॉलर में अपने लंबे दांव को घटाना शुरू कर दिया, जिसका प्रत्यक्ष असर वैश्विक मुद्रा विनिमय दरों पर पड़ा और प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को कुछ सहारा मिला।
कीमती धातुओं और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल
मुद्रा बाजार के अलावा कमोडिटी और डिजिटल परिसंपत्ति बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। शुक्रवार को सोना 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक नीचे लाभ और हानि के बीच झूलता रहा। पीली धातु की इस अनिश्चित चाल के पीछे अमेरिकी डॉलर में मामूली गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में हल्का सुधार मुख्य वजह रहे। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार अक्टूबर के दौरान लगातार दबाव में बना रहा। बिटकॉइन (BTC) सप्ताह की शुरुआत में 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया था, लेकिन शुक्रवार को सुधरकर लगभग 82,000 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताओं और घटती मांग ने समग्र डिजिटल संपत्ति बाजार को सतर्क बना रखा है।

















