अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति को काफी मजबूत किया है। बुधवार को जारी हुए अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों के बाद पाउंड निचले स्तरों पर फिसल गया था, लेकिन वहां से एक तेज रिकवरी देखने को मिली है। इस ताजा बढ़त के सहारे पाउंड वापस 1.33 के मध्य क्षेत्र में कारोबार करने लगा है। तकनीकी चार्ट के लिहाज से यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि साप्ताहिक समय सीमा पर एक बड़ा आउटसाइड रेंज रिवर्सल पैटर्न तैयार हो रहा है, जो आने वाले कारोबारी सत्रों में पाउंड की मजबूती की ओर इशारा करता है।
तकनीकी स्तर और आने वाले हफ्तों का रुझान
विदेशी मुद्रा बाजार के तकनीकी ढांचे पर गौर करें तो पाउंड का यह ताजा उछाल अप्रैल के महीने से बने एक साइडवेज दायरे के निचले सिरे के आसपास आधार बनाने के बाद आया है। मुद्रा जोड़ी अपने इस लंबे दायरे के निचले स्तर पर टिकी रही और वहां से खरीदारों की सक्रियता दर्ज की गई। मौजूदा उछाल इस बात का संकेत दे रहा है कि आने वाले हफ्तों में ब्रिटिश मुद्रा इस दायरे की ऊपरी सीमा यानी 1.3650 से 1.3675 के स्तर को दोबारा छूने का प्रयास कर सकती है।
हालांकि, इस लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते में पाउंड को कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी बाधाओं को पार करना होगा। मुद्रा जोड़ी के सामने सबसे पहली और प्रमुख रेजिस्टेंस 1.3435 के स्तर पर मौजूद है, जहां इसका 200-दिवसीय मूविंग एवरेज (200-day MA) स्थित है। तकनीकी विश्लेषक 200-दिवसीय औसत को किसी भी मध्यम अवधि के रुझान के लिए बेहद निर्णायक रेखा मानते हैं। जब तक पाउंड इस स्तर के ऊपर स्थिर होकर टिकाव नहीं दिखाता, तब तक ऊपरी दायरे की ओर तेजी की गति सीमित रह सकती है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड और दरों का गणित
मुद्रा के इस तकनीकी सुधार को बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर बेली के हालिया बयानों से भी परखा जा रहा है। गवर्नर बेली ने कहा कि ब्रिटेन में महंगाई के दूसरे दौर के प्रभावों के अभी बहुत कम सबूत सामने आए हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि ब्रिटिश अर्थव्यवस्था पहले लगाए गए अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक लचीली और मजबूत साबित हुई है।
गवर्नर बेली की इस टिप्पणी का ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप (OIS) बाजार पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। वित्तीय डेरिवेटिव बाजार अभी भी पूरी तरह से इस संभावना को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रहा है कि अगले महीने की शुरुआत में बैंक ऑफ इंग्लैंड की तरफ से ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (25bps) की बढ़ोतरी की जाएगी। स्वैप बाजार में दर वृद्धि की यह मजबूत प्रतिबद्धता ब्रिटिश पाउंड के लिए एक ठोस सहारा बनी हुई है, क्योंकि नीतिगत सख्ती की निरंतरता मुद्रा के आकर्षण को बनाए रखती है।
बजट में बैंकों पर अधिभार बढ़ाने की तैयारी
मौद्रिक नीतियों के अलावा ब्रिटेन के वित्तीय मोर्चे पर भी बड़े कदम उठाए जाने की चर्चाएं हैं। सार्वजनिक वित्त को मजबूत बनाने के उद्देश्य से चांसलर हीली आगामी सप्ताह के बजट में बैंकों पर लगने वाले निगम कर अधिभार को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत करने की योजना बना रहे हैं। यह कदम ब्रिटेन की राजकोषीय स्थिति को स्थिरता देने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है। वित्तीय बाजार बजट के इन राजकोषीय प्रस्तावों पर भी बारीक नजर बनाए हुए हैं।
वैश्विक मुद्राओं और फेडरल रिजर्व का रुख
अमेरिकी डॉलर की व्यापक कमजोरी का असर अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में दोबारा मजबूती लौटी और यह 0.6950 के स्तर की तरफ बढ़ गया। दूसरी तरफ, डॉलर इंडेक्स पर दबाव के कारण अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) पर भी बिकवाली का दबाव बना, जिसके चलते यह जोड़ी 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गई।
अमेरिकी डॉलर पर यह नया बिकवाली दबाव फेड चेयर वॉर्श के हालिया बयानों के बाद और गहराया है। वॉर्श ने अपनी टिप्पणी में दोहराया कि वह मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों के रास्ते को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। भविष्य में नीतिगत सख्ती के रास्ते पर इस अस्पष्ट और अनिर्णायक रुख ने डॉलर की धारणा को कमजोर किया, जिसका सीधा फायदा अन्य प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को मिला।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की स्थिति
कमोडिटी बाजार में सोने की चाल असमंजस भरी दिखाई दी। शुक्रवार के दिन पीली धातु 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक नीचे सीमित दायरे में घटती-बढ़ती रही। अमेरिकी डॉलर में हल्की गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में आई मामूली बढ़त के बीच सोने की कीमतों में कोई एकतरफा दिशा नहीं बन सकी।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार की बात करें तो अक्टूबर के महीने में अब तक इस पर दबाव बना रहा है। व्यापक आर्थिक चुनौतियों और घटती मांग के कारण बिटकॉइन (BTC) सप्ताह के शुरुआती दिनों में 80,000 डॉलर से नीचे चला गया था। हालांकि, बाद में स्थिति कुछ संभली और शुक्रवार को यह सुधरकर लगभग 82,000 डॉलर के स्तर पर वापस पहुंच गया।


















