अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की चाल बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुकी है। हाल ही में 55.40 डॉलर प्रति औंस के साप्ताहिक निचले स्तर तक गोता लगाने के बाद सफेद धातु 57.12 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है। हालांकि निचले स्तरों से मामूली सुधार देखा गया है, लेकिन बाजार की पूरी संरचना अब भी मंदी के दबाव में नजर आ रही है। यदि बिकवाल 55.00 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को नीचे की ओर तोड़ने में कामयाब होते हैं, तो चांदी में तेज बिकवाली का नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे लंबी अवधि के प्रमुख सपोर्ट स्तरों की परीक्षा होगी।
तकनीकी संकेतकों का दबाव और सपोर्ट स्तर
चांदी के दैनिक तकनीकी चार्ट पर कमजोरी के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI वर्तमान में 37 के स्तर पर बना हुआ है, जो इसके ओवरसोल्ड क्षेत्र की ओर फिसलने का संकेत देता है। आमतौर पर जब RSI इस तरह नीचे झुकता है, तो बाजार में विक्रेताओं का प्रभुत्व बना रहता है। इसके साथ ही मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD इंडिकेटर भी मंदी के पक्ष में बना हुआ है, जहां इसकी मुख्य रेखा -1.86 पर है और सिग्नल लाइन -1.47 पर स्थित है, जिससे हिस्टोग्राम -0.39 का नकारात्मक आंकड़ा दिखा रहा है। औसत दिशात्मक सूचकांक यानी ADX 27 पर पहुंचकर एक सक्रिय ट्रेंड की पुष्टि कर रहा है।
यदि मौजूदा बिकवाली का दबाव बना रहता है और XAG/USD जोड़ी 55.00 डॉलर का अहम समर्थन स्तर गंवा देती है, तो अगला पड़ाव साल का निचला स्तर 54.77 डॉलर होगा। इस स्तर के टूटने पर 13 नवंबर 2025 का पूर्व उच्च स्तर, जो अब तकनीकी सपोर्ट में बदल चुका है, 54.39 डॉलर पर परीक्षण के लिए सामने आएगा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सहारा भी टूट गया, तो चांदी की कीमतें तेजी से 50.00 डॉलर के बड़े मनोवैज्ञानिक आंकड़े की तरफ लुढ़क सकती हैं। हालिया आंकड़ों में 20 दिनों का सपोर्ट 55.50 डॉलर पर दर्ज है, जबकि बोलिंगर बैंड की निचली सीमा 55.40 डॉलर और ऊपरी सीमा 66.30 डॉलर पर है, जिसका मध्य बिंदु 60.85 डॉलर पर स्थित है।
तेजी लौटने के लिए किन बाधाओं को पार करना होगा
यदि खरीदार बाजार में वापसी करना चाहते हैं, तो उन्हें कई मजबूत तकनीकी प्रतिरोधों को पार करना होगा। दैनिक धुरी यानी पिवट स्तर 57.43 डॉलर पर है, जिसके ऊपर पहला प्रतिरोध R1 57.83 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध R2 58.54 डॉलर पर स्थित है। किसी भी बड़े उलटफेर के लिए चांदी को सबसे पहले 14 अक्टूबर के उच्चतम स्तर 59.37 डॉलर को तोड़ना होगा। इस स्तर को पार करने के बाद ही कीमतें 60.00 डॉलर के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ सकती हैं।
दीर्घकालिक ट्रेंड के लिहाज से मुश्किलें और भी गंभीर हैं क्योंकि चार्ट पर 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA 62.40 डॉलर पर और 200-दिवसीय EMA 67.34 डॉलर पर स्थित है, जो एक क्लासिक डेथ क्रॉस स्थिति को रेखांकित कर रहा है। इसके अतिरिक्त, 100-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज यानी SMA 63.06 डॉलर पर और 50-दिवसीय SMA 63.90 डॉलर से 63.98 डॉलर के दायरे में अवरोध का काम कर रहे हैं। यदि बाजार इन सभी बाधाओं को पार कर 63.98 डॉलर से ऊपर टिकने में सफल रहता है, तब जाकर 65.00 डॉलर के स्तर को चुनौती देने का रास्ता खुलेगा। पिछले 52 हफ्तों के दौरान चांदी ने 45.85 डॉलर के निचले स्तर से लेकर 121.30 डॉलर के उच्च स्तर तक का विशाल दायरा तय किया है।
फेडरल रिजर्व की टिप्पणियां और डॉलर की चाल
कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अमेरिकी मैक्रोइकोनॉमिक घटनाक्रम अहम भूमिका निभा रहे हैं। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श की हालिया टिप्पणियों ने ब्याज दरों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। चेयरमैन वॉर्श ने मूल्य स्थिरता बहाल करने के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन भविष्य में ब्याज दरों में कटौती या बढ़ोतरी के रास्ते पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। उनकी इस गैर-प्रतिबद्धता वाली टिप्पणी से अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
मुद्रा बाजार में इस कमजोरी का असर तुरंत दिखाई दिया। एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर में आई गिरावट के चलते AUD/USD की जोड़ी मजबूत होकर 0.6950 के स्तर की ओर उछल गई। वहीं USD/JPY की जोड़ी नए बिकवाली दबाव में आकर 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गई। सामान्य तौर पर अमेरिकी डॉलर की कमजोरी चांदी जैसी धातुओं के लिए मददगार साबित होती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का मूल्य डॉलर में ही तय होता है। कमजोर डॉलर अन्य मुद्राओं के खरीदारों के लिए चांदी को सस्ता बनाता है, जबकि मजबूत डॉलर इसकी कीमतों पर दबाव डालता है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की स्थिति
कमोडिटी और जोखिम परिसंपत्तियों के व्यापक फलक पर भी मिलाजुला रुख देखा जा रहा है। सोना 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक नीचे सीमित दायरे में घट-बढ़ रहा है। डॉलर में आई हल्की नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आए मामूली सुधार के बीच सोने में कोई स्पष्ट दिशा तय नहीं हो पा रही है। चूंकि चांदी ऐतिहासिक रूप से सोने के कदमों का अनुसरण करती है, इसलिए सोने की यह हिचकिचाहट चांदी की बढ़त को भी सीमित कर रही है।
निवेशक सोने और चांदी के मूल्य मूल्यांकन के लिए गोल्ड/सिल्वर रेशियो पर करीबी नजर रखते हैं। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। जब यह अनुपात ऐतिहासिक औसत से बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो माना जाता है कि चांदी का मूल्यांकन सोने की तुलना में सस्ता है। इसके विपरीत, कम अनुपात चांदी के मुकाबले सोने के सस्ते होने की संभावना दर्शाता है। वहीं दूसरी ओर, डिजिटल एसेट बाजार में भी दबाव देखने को मिला है। अक्टूबर के दौरान बिटकॉइन गिरकर 80,000 डॉलर से नीचे चला गया था, जो बाद में सुधरकर 82,000 डॉलर के स्तर पर पहुंचा है, क्योंकि व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताएं और मांग में आई कमी जोखिम भरी संपत्तियों पर भारी पड़ रही हैं।
औद्योगिक मांग और वैश्विक उपभोग का गणित
चांदी केवल एक निवेश परिसंपत्ति नहीं है, बल्कि आधुनिक उद्योगों के लिए एक अनिवार्य कच्चा माल भी है। सभी धातुओं में सबसे अधिक विद्युत चालकता होने के कारण, जो तांबे और सोने से भी बेहतर है, चांदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर होता है। सोलर पैनलों के निर्माण में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। जब वैश्विक औद्योगिक उत्पादन मजबूत होता है, तो चांदी की मांग में उछाल आता है और कीमतें चढ़ती हैं, जबकि औद्योगिक सुस्ती इसकी कीमतों को नीचे खींचती है।
अमेरिका, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाएं चांदी के वैश्विक बाजार को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विनिर्माण प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में चांदी की खपत करते हैं। दूसरी ओर, भारत में आभूषण और घरेलू उपयोग के लिए चांदी की उपभोक्ता मांग बहुत अधिक रहती है, खासकर त्योहारी और शादियों के मौसम में। यह दोहरी प्रकृति—एक तरफ औद्योगिक धातु और दूसरी तरफ सुरक्षित निवेश विकल्प—चांदी की चाल को सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव भरी बनाती है। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या 55 डॉलर का रक्षात्मक कवच बिकवालों के प्रहार को झेल पाता है या फिर बाजार को 50 डॉलर की ओर नए सिरे से गिरावट का सामना करना पड़ेगा।

















