भारतीय स्टेट बैंक ने अपने सैलरी पैकेज खाताधारकों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम और स्वचालित जमा सह निकासी मशीनों पर लागू मुफ्त लेन-देन के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए रियायत घटा दी है। 1 अक्टूबर से प्रभावी हुए इस नए प्रावधान के तहत अब वेतन खाताधारक अन्य बैंकों की मशीनों से एक महीने के भीतर केवल पांच बार ही बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के लेन-देन कर सकेंगे। इससे पहले बैंक अपने इन ग्राहकों को हर महीने 10 मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा दे रहा था, जिसे अब आधा कर दिया गया है।
सैलरी पैकेज खातों के सभी वेरिएंट्स पर नया नियम लागू
बैंक प्रशासन द्वारा तय की गई यह नई सीमा एसबीआई सैलरी पैकेज अकाउंट के सभी वेरिएंट्स पर समान रूप से प्रभावी की गई है। चाहे ग्राहक किसी भी केंद्र या शहर में स्थित शाखा से जुड़ा हो, अन्य बैंकों की मशीनों का इस्तेमाल करने पर यही नियम लागू होगा। इस मासिक कोटे में वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों प्रकार के संचालन शामिल किए गए हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि नकदी की निकासी के अलावा मिनी स्टेटमेंट निकालना या खाते में मौजूद शेष राशि की जांच करना भी इन पांच मुफ्त मौकों में गिना जाएगा। निर्धारित पांच ट्रांजैक्शन पूरे होते ही ग्राहक को अगले प्रत्येक इस्तेमाल पर तय शुल्क चुकाना होगा।
मुफ्त सीमा समाप्त होने पर अतिरिक्त शुल्क का ढांचा
अन्य बैंकों के एटीएम और स्वचालित जमा सह निकासी मशीनों पर निर्धारित पांच मुफ्त लेन-देन की सीमा पार करने के बाद खाताधारकों पर अतिरिक्त सेवा शुल्क लगाया जाएगा। नकदी निकासी जैसे वित्तीय लेन-देन के लिए प्रति ट्रांजैक्शन 23 रुपये और उस पर लगने वाला जीएसटी वसूला जाएगा। वहीं बैलेंस चेक करने अथवा मिनी स्टेटमेंट देखने जैसे गैर-वित्तीय लेन-देन के लिए 11 रुपये और उस पर लागू जीएसटी का भुगतान करना होगा। पांच मौकों के बाद हर बार मशीन का इस्तेमाल करने पर यह राशि ग्राहक के खाते से काटी जाएगी।
असीमित से घटकर पांच पर पहुंची मुफ्त निकासी सुविधा
सैलरी खाताधारकों के लिए एटीएम नियमों में सख्ती का यह सिलसिला लगातार जारी है। पूर्व में इन खाताधारकों को अन्य बैंकों के एटीएम पर असीमित मुफ्त लेन-देन की सुविधा मिला करती थी। इसके बाद बैंक ने दिसंबर के महीने में पहली बार बदलाव करते हुए असीमित सुविधा को समाप्त किया और संशोधित शुल्कों के साथ अधिकतम 10 मुफ्त लेन-देन की सीमा तय की थी। अब 10 से घटाकर पांच किए जाने के ताजा फैसले ने नौकरीपेशा ग्राहकों के लिए बिना शुल्क अन्य बैंकों के एटीएम का उपयोग करने के विकल्पों को और अधिक सीमित कर दिया है।
एसबीआई के अपने एटीएम पर नियम पूर्ववत
यह संशोधित व्यवस्था केवल उन स्थितियों में लागू होगी जब सैलरी पैकेज खाताधारक अपने एसबीआई डेबिट कार्ड का प्रयोग किसी अन्य बैंक द्वारा संचालित एटीएम या स्वचालित जमा सह निकासी मशीन पर करेंगे। मौजूदा नियमों के अनुसार स्टेट बैंक के अपने एटीएम नेटवर्क पर सैलरी खाताधारकों को असीमित मुफ्त लेन-देन की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी। इसके अतिरिक्त सामान्य बचत खाताधारकों के लिए लागू एटीएम सीमाओं में किसी तरह का बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। एसबीआई अथवा अन्य बैंकों के एटीएम और स्वचालित मशीनों से कार्डलेस कैश निकासी पर लगने वाले शुल्क भी पुराने नियमों के तहत ही बने हुए हैं।
बेसिक बचत बैंक जमा खातों के लिए अलग प्रावधान
नियमित और सैलरी खातों से इतर बेसिक बचत बैंक जमा खातों के लिए अलग से दिशा-निर्देश निर्धारित हैं। आधार आधारित भुगतान प्रणाली के माध्यम से किए जाने वाले लेन-देन भी लागू सीमाओं के तहत शामिल होते हैं, जिनमें तय सीमा से अधिक उपयोग करने पर खाते की श्रेणी और लेन-देन के स्वरूप के आधार पर 15 रुपये से लेकर 23 रुपये तथा जीएसटी तक का शुल्क लग सकता है। बेसिक बचत खाताधारकों के लिए निर्धारित मुफ्त सीमा से अधिक निकासी पर 15 रुपये और जीएसटी का शुल्क लग सकता है, जबकि सैलरी खाताधारकों के लिए अन्य बैंकों की मशीनों पर पांच से अधिक वित्तीय लेन-देन करने पर 23 रुपये और जीएसटी का प्रभार रहेगा। बेसिक बचत खातों की सटीक शर्तों के लिए बैंक की आधिकारिक नियमावली देखने की आवश्यकता होती है।
अतिरिक्त शुल्क से बचने के व्यवहारिक उपाय
सैलरी पैकेज खाताधारक अपने मासिक लेन-देन की सही योजना बनाकर और अन्य बैंकों की मशीनों के इस्तेमाल पर नजर रखकर इन शुल्कों से बच सकते हैं। नकदी की जरूरत पड़ने पर स्टेट बैंक के अपने एटीएम नेटवर्क का रुख करना सबसे सुरक्षित विकल्प है, जहां असीमित मुफ्त लेन-देन की सुविधा बदस्तूर जारी है। इसके साथ ही बार-बार बैलेंस जांचने या छोटे भुगतानों के लिए यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग जैसे डिजिटल विकल्पों का उपयोग करने से एटीएम पर निर्भरता और संभावित अतिरिक्त खर्च दोनों को नियंत्रित किया जा सकता है।



















