अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इस समय अपने सालाना शिखर के बेहद नजदीक कारोबार कर रहा है, और पूरी दुनिया की नजरें आगामी सितंबर नॉनफार्म पेरोल यानी एनएफपी आंकड़ों पर टिक गई हैं। इस अहम आर्थिक रिपोर्ट के जारी होने से पहले वित्तीय विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों के दृष्टिकोण दो स्पष्ट धड़ों में विभाजित हो चुके हैं। इनमें से दो विश्लेषकों का मानना है कि रोजगार के मजबूत आंकड़े डॉलर की मौजूदा तेजी को और हवा देंगे, जिससे एक बड़ा अपसाइड ब्रेकआउट देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत, दो अन्य विश्लेषक तर्क दे रहे हैं कि डॉलर की यह तेजी जरूरत से ज्यादा खिंच चुकी है और बाजार ने फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को पहले ही जरूरत से ज्यादा भुना लिया है, जिसे सिर्फ एक रोजगार रिपोर्ट के दम पर सही साबित कर पाना मुश्किल होगा।
बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की महंगाई ने बढ़ाई अमेरिकी डॉलर की ताकत
अमेरिकी मुद्रा में जारी इस जबर्दस्त मजबूती के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और उससे उपजी महंगाई की चिंताओं की बड़ी भूमिका है। अमेरिका में हाल ही में जारी हुए पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने हालांकि अक्टूबर महीने में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आक्रामक उम्मीदों पर थोड़ा अंकुश जरूर लगाया था, लेकिन ऊर्जा लागत में उछाल ने ट्रेजरी यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तरों के आसपास बनाए रखा है। बॉन्ड बाजार से मिलने वाला यह ऊंचा प्रतिफल विदेशी पूंजी को अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित कर रहा है, जिससे वैश्विक मुद्राओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो महीने के निचले स्तर पर फंसा
गुरुवार के कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी AUD/USD अपने दो महीने के निचले स्तर के करीब सुस्ती के साथ कारोबार करती दिखी। एशियाई बाजार में यह जोड़ी 0.6900 के मध्य स्तर के इर्द-गिर्द घूमती रही। एक तरफ जहां अमेरिकी डॉलर की आक्रामक खरीदारी ने इस जोड़ी को दबाकर रखा, वहीं अमेरिका के पीसीई आंकड़ों ने ब्याज दर वृद्धि की कुछ चिंताओं को कम किया था। इसी दौरान ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा झटका देखने को मिला, जहां अगस्त महीने में देश का व्यापार अधिशेष तेजी से सिकुड़कर केवल 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया। व्यापार अधिशेष में आई इस भारी गिरावट का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बहुत सीमित असर देखा गया, क्योंकि अमेरिकी डॉलर का दबदबा बाजार में पूरी तरह छाया रहा।
जापानी येन पर भारी पड़ा डॉलर, 158.00 के पार निकला USD/JPY
जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भी अधिक आक्रामक रुख दिखा रही है। गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान USD/JPY मुद्रा जोड़ी अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे पर 158.00 के आंकड़े से ऊपर टिकी रही। बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त मौद्रिक नीति अपनाए जाने की अटकलें और जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के खतरे भी डॉलर की उड़ान को रोकने में नाकाम रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच गहराए भू-राजनीतिक गतिरोध ने भी डॉलर को एक सुरक्षित निवेश विकल्प यानी सेफ-हेवन एसेट के रूप में जबरदस्त सहारा दिया है, जिसके चलते निवेशकों ने येन के मुकाबले डॉलर को तरजीह दी है।
ट्रेजरी यील्ड के दबाव में थमी सोने की रिकवरी
कीमती धातुओं के बाजार में अमेरिकी डॉलर की चमक ने सोने की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। गुरुवार के कारोबार में सोना सीमित दायरे में फंसा नजर आया, क्योंकि अमेरिकी डॉलर में तेजी और आसमान छूती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ने सर्राफा की बढ़त को सीमित कर दिया। रिपोर्टिंग के समय, सोने का हाजिर भाव यानी XAU/USD लगभग 4,167 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसमें उस दिन केवल 0.26 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई थी। सोने में शुरुआती स्तरों से उबरने की कोशिशें जरूर दिखीं, लेकिन डॉलर की मजबूती के आगे वह कोई बड़ी रैली दर्ज करने में पूरी तरह असमर्थ रहा।
यूरो में ऐतिहासिक गिरावट, क्या महंगाई का नया झटका बनेगा सहारा?
यूरोपीय मुद्रा के लिए भी हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। EUR/USD गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़क गया है। बुधवार के सत्र में यह जोड़ी फिसलकर 1.1312 के स्तर तक पहुंच गई, जो जनवरी में दर्ज किए गए 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरो में इस तेज गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और यूरोप के ऊर्जा संकट के प्रति फिर से उजागर हुई संवेदनशीलता का घातक मेल है। हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति का कोई ताजा अप्रत्याशित झटका यूरो को सहारा दे सकता है और उसे मौजूदा मंदी से बाहर निकालने में मदद कर सकता है।
क्रिप्टो बाजार में हाइपरलिक्विड पर दबाव, 90 डॉलर के नीचे अटका
पारंपरिक मुद्राओं के अलावा डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी सतर्कता का माहौल देखने को मिला। हाइपरलिक्विड यानी HYPE टोकन में गुरुवार को 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत की बढ़त का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो गया। संस्थागत निवेशकों की मांग में कमी के साफ संकेत दिखे हैं, जहां बुधवार को इस टोकन से 5 मिलियन डॉलर की भारी निकासी दर्ज की गई। इस पूंजी बहिर्वाह ने अल्पावधि निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है। तकनीकी चार्ट के लिहाज से HYPE का दृष्टिकोण मिला-जुला बना हुआ है, क्योंकि इसकी कीमत 90 डॉलर के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे ही टिकी हुई है।

















