अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ है, जहां अमेरिकी डॉलर की तेजी और सरकारी बॉन्ड की घटती यील्ड एक दूसरे के असर को बेअसर करने में जुटी हैं। अमेरिकी करेंसी में आई नई मजबूती आम तौर पर कीमती धातुओं पर दबाव बनाती है, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी के प्रतिफल में आई गिरावट ने बुलियन निवेशकों को राहत दी है। बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति होने की वजह से जब बॉन्ड पर रिटर्न गिरता है, तो सोने की आकर्षण क्षमता बढ़ जाती है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी अनिश्चितताओं ने सेफ हेवन संपत्तियों की मांग को मजबूती प्रदान की है।
मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने बदला ब्याज दरों का समीकरण
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पसंदीदा महंगाई पैमाने, कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर मूल्य सूचकांक के हालिया आंकड़े सालाना आधार पर 3.4 फीसदी पर दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा पूर्व अनुमान के 3.3 फीसदी की तुलना में कुछ अधिक रहा, लेकिन पिछले स्तर से इसमें कोई बदलाव नहीं आया। इस आंकड़े के सामने आने के बाद मनी मार्केट में निवेशकों का नजरिया एकदम बदल गया है। प्राइम टर्मिनल के आंकड़ों के अनुसार, ट्रेडर अब आगामी अक्टूबर बैठक में ब्याज दरों के स्थिर रहने की 70 फीसदी संभावना मानकर चल रहे हैं। हालांकि, साल के अंत में दिसंबर महीने के दौरान दरों में एक और बढ़ोतरी होने की संभावना अभी भी 83 फीसदी के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
दूसरी ओर, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा का आकलन करने वाला डॉलर इंडेक्स 0.61 फीसदी की बढ़त दर्ज करते हुए 102.08 के स्तर तक पहुंच गया। फेडरल रिजर्व के उपाध्यक्ष फिलिप जेफरसन के नेतृत्व में नीति निर्माताओं ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि देश की अर्थव्यवस्था अधिकतम रोजगार के बेहद करीब पहुंच चुकी है, साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ब्याज दरों में किसी भी नए कदम से पहले धैर्य बरतना बेहद जरूरी है। इसके विपरीत मिनियापोलिस फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष नील काशकारी का रुख सख्त बना रहा और उन्होंने दरों में अतिरिक्त वृद्धि की जोरदार पैरवी की।
आर्थिक संकेतकों और नौकरियों का मिला-जुला असर
अमेरिका के व्यापक आर्थिक मोर्चे पर जारी आंकड़ों में नरमी और दबाव के मिले-जुले संकेत मिले हैं। सितंबर महीने के लिए आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 54.6 से थोड़ा फिसलकर 54.5 पर आ गया, जो विश्लेषकों के 55 के अनुमान को पूरा करने में चूक गया। इस इंडेक्स के भीतर कीमतों के भुगतान से जुड़ा उप-घटक 71.1 से जोरदार उछाल के साथ 77.1 पर पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि उत्पादन लागत के मोर्चे पर महंगाई का दबाव अब भी गहरा रहा है। रोजगार से संबंधित उप-सूचकांक भी पिछले 51.2 के स्तर से सुधरकर 52.7 पर दर्ज किया गया।
श्रम बाजार से आए आंकड़ों के अनुसार 26 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान अमेरिका में बेरोजगारी भत्ते के नए दावे 197K रहे। यह संख्या बाजार के 200K के अनुमान से कम रही और उससे पिछले सप्ताह के 198K के आंकड़े से भी मामूली गिरावट दर्शाती है। इन मजबूत आंकड़ों के चलते सोने में गिरावट की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में आई खरीदारी ने यील्ड को नीचे धकेल दिया। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4 बेसिस पॉइंट से ज्यादा टूटकर 5.243 फीसदी पर आ गई, जिसने पीली धातु के लिए मजबूत सुरक्षा कवच का काम किया।
मध्य पूर्व तनाव और तेल बाजार की तनातनी
पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य टकराव और ऊर्जा संकट ने भी सुरक्षित संपत्तियों की तरफ पूंजी का प्रवाह तेज कर दिया है। कच्चे तेल के भाव में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जिसकी मुख्य वजह नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच टकराव भड़कने की आशंका है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका मध्य पूर्व में 10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती करने जा रहा है, और ट्रंप द्वारा नवंबर में ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू करने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, चीन ने अपनी घरेलू खपत की सुरक्षा के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर कटौती लागू की है। चीन के इस कदम से वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति का संकट और ज्यादा गंभीर हो सकता है, जहां पहले से ही तेल की किल्लत देखी जा रही है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई को भड़काने का काम करती हैं, जो अंततः निवेशकों को सुरक्षित मूल्य संचय के लिए सोने की तरफ मोड़ने को बाध्य करती हैं।
तकनीकी स्तरों पर सोने का रुख और प्रतिरोध
चार्ट पर सोने का भाव 4,200 डॉलर प्रति औंस के आसपास कड़े प्रतिरोध का सामना कर रहा है। तकनीकी संरचना में एक तेजी वाले वेज पैटर्न के निचले स्तर के टूटने के बाद धातु में कमजोरी का खतरा खुला हुआ है। मोमेंटम इंडिकेटर्स धीरे-धीरे खरीदारों के समर्थन में आ रहे हैं, मगर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई के 50 के न्यूट्रल स्तर से नीचे टिके रहने के कारण व्यापक रुझान अभी भी मंदी के दबाव में है।
बुलियन में तेजी का नया दौर शुरू होने के लिए एक्सएयू/यूएसडी को 4,200 डॉलर के स्तर को पार कर उस पर टिकना होगा। यदि यह स्तर सफलतापूर्वक हासिल होता है, तो अगला लक्ष्य 4,283 डॉलर पर स्थित 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए और उसके बाद 4,300 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर होगा। इन बाधाओं को पार करने के बाद 4,324 डॉलर पर 50-दिवसीय एसएमए का मजबूत अवरोध मौजूद है।
दूसरी तरफ, यदि बिकवाली हावी होती है तो सोने के लिए पहला तात्कालिक सहारा दिन का निचला स्तर 4,139 डॉलर रहेगा। इस स्तर के टूटने पर भाव 4,100 डॉलर की तरफ फिसल सकते हैं। इसके नीचे 29 जुलाई का स्विंग लो 3,996 डॉलर और फिर 17 जुलाई का निचला स्तर 3,959 डॉलर महत्वपूर्ण सपोर्ट क्षेत्र हैं। यदि यह दायरा भी टूटता है, तो साल के सबसे निचले स्तर 3,941 डॉलर की तरफ गिरावट का रास्ता खुल सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और केंद्रीय बैंकों की भूमिका
मानव इतिहास में सोने की भूमिका हमेशा मूल्य संचय के भरोसेमंद साधन और विनिमय के माध्यम के रूप में रही है। गहनों और चमक के अलावा, मौजूदा दौर में इसे वित्तीय उथल-पुथल के समय सबसे सुरक्षित आश्रय माना जाता है। किसी सरकार या जारीकर्ता पर निर्भर न होने के कारण यह मुद्रा अवमूल्यन और अनियंत्रित महंगाई के खिलाफ सबसे प्रभावी ढाल का काम करता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। आर्थिक संकट के समय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को सहारा देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए वे भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। विशाल स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय साख और भुगतान क्षमता के लिए भरोसे का प्रतीक होता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में करीब 70 अरब डॉलर मूल्य का 1,136 टन सोना जोड़ा, जो रिकॉर्ड इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक खरीद रही। चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक तेजी से अपने स्वर्ण भंडार को विस्तार दे रहे हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य जोड़ियों का प्रदर्शन
मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी डॉलर की तेजी का गहरा असर देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी रक्षात्मक मुद्रा में बनी हुई है और शुक्रवार को एशियाई कारोबार की शुरुआत से ठीक पहले यह 0.6900 के स्तर के पास तीन महीने के निचले स्तर से थोड़ा संभलती दिखी। ग्रीनबैक की मजबूती और जोखिम भरी संपत्तियों में व्यापक बिकवाली के कारण इस ऑस्ट्रेलियाई करेंसी जोड़ी में साप्ताहिक गिरावट तेज हुई है।
वहीं अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी गुरुवार को एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के पार अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर पर टिकी रही। हालांकि कमजोर अमेरिकी महंगाई आंकड़ों के बाद भी तेल के चलते पैदा हुए महंगाई के जोखिम ने बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्च स्तर पर बनाए रखा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी से सुरक्षित डॉलर को सहारा मिल रहा है, जो बैंक ऑफ जापान की संभावित सख्ती और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों को दबाते हुए इस जोड़ी को मजबूती दे रहा है। कुल मिलाकर अमेरिकी डॉलर की चाल और वैश्विक तनाव ही आने वाले दिनों में बुलियन की दिशा तय करेंगे।


















