अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में लगातार हलचल देखी जा रही है। मंगलवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत के दौरान यह करेंसी जोड़ी एक बार फिर 158.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर निकल गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बने दबाव और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने डॉलर को मजबूती दी है, जबकि बैंक ऑफ जापान की तरफ से सख्त रुख के संकेतों और संभावित सरकारी दखल के बावजूद जापानी मुद्रा को तात्कालिक सहारा नहीं मिल पा रहा है। विश्लेषक इस समय मुद्रा जोड़ी की तेजी को लेकर एकमत दिखाई दे रहे हैं, हालांकि संभावित ब्रेकआउट कितना आगे जाएगा, इसे लेकर उनके अनुमान अलग हैं।
तकनीकी स्तर और प्रमुख लक्ष्य
बाजार के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, रोबोफॉरेक्स का आकलन एक संकुचित होते त्रिकोण यानी नैरोइंग ट्रायंगल पैटर्न की ओर इशारा करता है। इस विश्लेषण के तहत पहला तात्कालिक लक्ष्य 158.77 आंका गया है। यदि भाव इस स्तर को पार करने में सफल रहते हैं, तो पुष्टि के बाद अगला स्तर 159.36 का खुल सकता है। दूसरी तरफ, विश्लेषक श्वेदेव का मानना है कि सातवें क्रम के भारी सप्लाई क्लस्टर का तीन बार रीटेस्ट हो चुका है। उनका अनुमान है कि यह ढांचा एक ब्रेकआउट कैस्केड तैयार कर रहा है, जो मुद्रा जोड़ी को सीधे 160.00 के स्तर तक ले जा सकता है।
कारोबारियों के लिए 158.77 से 158.85 का दायरा बेहद संवेदनशील बना हुआ है। यदि दैनिक आधार पर भाव इस दायरे से ऊपर बंद होते हैं, तो दोनों विश्लेषणों में तालमेल बैठता है और 159.36 से लेकर 160.00 तक का रास्ता साफ हो जाता है। इसके विपरीत, यदि गिरावट आती है और भाव 157.54 के नीचे फिसलते हैं, तो मौजूदा तेजी का रुख खारिज हो जाएगा और यह जोड़ी 156.50 के स्तर तक गिर सकती है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेड की स्थिति
फिक्स्ड इनकम बाजार में जारी बिकवाली के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिकी हुई है। हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हुई हैं, फिर भी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर को अपने साल के उच्चतम स्तर के पास बनाए रखा है। यही कारण है कि डॉलर इंडेक्स में लचीलापन बना हुआ है और प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।
अन्य वैश्विक मुद्राओं और सोने की स्थिति
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर में कमजोरी दर्ज की गई। पिछले हफ्ते छुए गए दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिन की रिकवरी यहां रुक गई। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा इसी महीने ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के लिए मददगार हो सकती हैं।
सोने के बाजार में यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सुधार देखा गया। पीली धातु अपने 4,100 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर से उछलकर 4,150 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई। सितंबर के निचले स्तर से हालिया डॉलर रैली में ठहराव आने और फेड द्वारा दरें न बढ़ाने की संभावनाओं से ब्याज न देने वाले बुलियन को कुछ सहारा मिला है।
यूरोप और फ्रांस के राजनीतिक हालात
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने महंगाई को लेकर जटिल स्थिति बनी हुई है। आमतौर पर तय लक्ष्य से दोगुनी चल रही महंगाई पर काबू पाने के लिए दरों में बढ़ोतरी सीधी प्रतिक्रिया होती है, लेकिन मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं। बॉन्ड बाजार पहले ही सख्ती का एक बड़ा हिस्सा खुद पूरा कर रहा है, जिससे बैंक के सामने नीतिगत असमंजस पैदा हो गया है। साथ ही फ्रांस में आने वाले दिनों की राजनीतिक हलचल पर नजरें हैं, जहां बजट को लेकर सोशलिस्ट पार्टी और मरीन ले पेन की नेशनल रैली मौजूदा सरकार को गिराने के संकेत दे सकती हैं। इसके अलावा पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं।


















