अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले नई मजबूती मिली है, क्योंकि अमेरिका में महंगाई के नए आंकड़ों ने निवेशकों के अनुमान बदल दिए हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई प्राइस इंडेक्स के उम्मीद से कमजोर रहने के चलते अमेरिकी डॉलर दबाव में आ गया है। इस नरमी के बाद ट्रेडर अक्टूबर महीने में फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में एक और वृद्धि किए जाने के दांव काफी कम कर चुके हैं। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी मुद्रा की स्थिति दिखाने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स यानी डीएक्सवाई (DXY) मंगलवार को 101.61 के दो महीने के शिखर पर पहुंचने के बाद अब 101.20 के इर्द-गिर्द कारोबार कर रहा है।
महंगाई दर में नरमी और फेडरल रिजर्व पर बढ़ता दबाव
अगस्त महीने के लिए जारी कोर पीसीई प्राइस इंडेक्स में महीने दर महीने आधार पर केवल 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो विश्लेषकों के 0.3 प्रतिशत के पूर्वानुमान से कम रही। इसी प्रकार हेडलाइन पीसीई मुद्रास्फीति में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो कि बाजार के 0.4 प्रतिशत के अनुमान से पीछे रह गई। सालाना आधार पर देखा जाए तो कोर मुद्रास्फीति 3.0 प्रतिशत और हेडलाइन मुद्रास्फीति 3.4 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर बनी हुई है। हालांकि ये दोनों आंकड़े बाजार की पूर्व उम्मीदों से कम रहे हैं।
मुद्रास्फीति के इन नरम आंकड़ों का सीधा असर ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा पर पड़ा है। सीएमई फेडवॉच टूल (CME FedWatch Tool) के अनुसार, बाजार अब केवल 37 प्रतिशत संभावना देख रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अगले महीने ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा। सप्ताह की शुरुआत में यह संभावना लगभग 70 प्रतिशत के उच्च स्तर पर आंकी जा रही थी। इस नाटकीय गिरावट ने डॉलर के आक्रामक रुख को थाम दिया है और यूरो जैसी प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को तत्काल सहारा दिया है।
मजबूत जीडीपी और रोजगार आंकड़े डॉलर की बड़ी गिरावट रोकने में सफल
हालांकि मुद्रास्फीति सुस्त होने के बावजूद अन्य व्यापक आर्थिक संकेतकों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को उजागर किया है, जिससे डॉलर में भारी बिकवाली पर लगाम लगी। दूसरी तिमाही की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी (GDP) वृद्धि दर को संशोधित करके 1.5 प्रतिशत से तेज उछाल के साथ 2.2 प्रतिशत का वार्षिक आंकड़ा दिया गया है। मजबूत उपभोक्ता खर्च और कारोबारी निवेश ने इस आर्थिक विस्तार को ठोस आधार प्रदान किया।
इसके साथ ही एडीपी (ADP) रोजगार परिवर्तन रिपोर्ट से पता चला कि अमेरिकी निजी क्षेत्र ने सितंबर में 90 हजार नई नौकरियां जोड़ी हैं। यह आंकड़ा न केवल 70 हजार के अनुमान को पार कर गया, बल्कि पिछले महीने के 36 हजार के आंकड़े से भी कहीं अधिक मजबूत रहा। श्रम बाजार और विकास दर के इन मजबूत आंकड़ों ने बाजार को यह संदेश दिया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह सुस्त नहीं पड़ी है, जिससे डॉलर को गिरावट के बीच सहारा मिलता रहा।
यूरोपीय मुद्रा का मौजूदा परिदृश्य और प्रमुख स्तर
मुद्रा बाजार के व्यापक दायरे में ईयूआर/यूएसडी (EUR/USD) की स्थिति हाल के समय में दबाव में देखी गई थी। यह जोड़ी मई 2025 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर तक गिर चुकी थी, जहां बुधवार को इसने 1.1312 का निचला स्तर छुआ था। यह स्तर जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। इस तेज गिरावट के पीछे डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और यूरोप के महंगे ऊर्जा स्रोतों के जोखिम जैसी कई प्रमुख वजहें शामिल रही हैं। हालांकि, यूरो क्षेत्र में किसी भी नए मुद्रास्फीति झटके की स्थिति में यूरो को एक अनपेक्षित जीवनदान मिलने की संभावना अभी बनी हुई है।
एशियाई सत्र में येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दिशा
बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन में अलग-अलग प्रवृत्तियां देखने को मिलीं। एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) 0.6950 के करीब दो महीने के निचले स्तर पर आ टिका। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के अंतर्निहित सीपीआई आंकड़े उम्मीद से कम रहे, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फिर गया। दूसरी तरफ चीन के पीएमआई आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं दिया, भले ही अमेरिकी डॉलर की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी थी।
इसके विपरीत यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) 157.00 के स्तर से नीचे नुकसान में बना रहा। बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त मौद्रिक रुख की उम्मीदों और प्रत्यक्ष सरकारी हस्तक्षेप के बढ़ते जोखिमों ने जापानी येन को सहारा दिया। घरेलू स्तर पर निराशाजनक फैक्ट्री उत्पादन और कमजोर खुदरा बिक्री आंकड़ों के बावजूद येन ने मजबूती बनाए रखी, जिसे वैश्विक स्तर पर कमजोर पड़ते डॉलर का भी साथ मिला।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की सुस्त हलचल
कमजोर अमेरिकी मुद्रास्फीति के तुरंत बाद अमेरिकी सत्र की शुरुआत में सोने ने 4,220 डॉलर प्रति औंस का स्तर छुआ। फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की घटती संभावनाओं ने शुरुआत में कीमती धातु को बढ़ावा दिया, लेकिन अमेरिका के बेहतर विकास और रोजगार आंकड़ों ने इस तेजी की रफ्तार थाम दी। अंततः सोना अपनी बढ़त को टिका नहीं सका और 4,180 डॉलर के आसपास सपाट स्तर पर आ गया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी बुधवार को सुस्ती का माहौल रहा। बिटकॉइन के खरीदार 83,000 डॉलर के तत्काल सपोर्ट स्तर को बचाने के लिए जूझते नजर आए। एथेरियम भी बिटकॉइन की दिशा में ही चलता दिखा और ऊपर में 2,700 डॉलर तथा नीचे में 2,600 डॉलर के प्रमुख स्तरों के दायरे में फंसा रहा। वहीं रिपल 1.50 डॉलर के स्तर के करीब बना रहा। कुल मिलाकर अमेरिकी नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच विभिन्न वित्तीय बाजारों में सतर्कता का रुख बना हुआ है।



















