पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास कार्यों की गति तेज करने के उद्देश्य से पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) ने सितंबर 2026 के दौरान 42.63 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इस स्वीकृत राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में चल रही कल्याणकारी योजनाओं को दिया गया है, जबकि शेष राशि क्षेत्रीय तकनीकी संस्थानों, कौशल विकास एजेंसियों और क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों को आबंटित की गई है। इस वित्तीय सहयोग के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, कृषि और पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।
कुल जारी किए गए फंड में से 35.21 करोड़ रुपये आठों पूर्वोत्तर राज्यों की विभिन्न राज्यस्तरीय परियोजनाओं के लिए तय किए गए हैं। इसके अलावा 7.42 करोड़ रुपये क्षेत्रीय स्तर के संस्थानों और एजेंसियों को दिए गए हैं, ताकि वे आधुनिक तकनीक, बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण के कार्यों को आगे बढ़ा सकें। राज्यों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी नगालैंड के खाते में आई है, जिसे कुल 11.92 करोड़ रुपये मिले हैं। नगालैंड को मिली यह राशि मुख्य रूप से क्लस्टर-आधारित कॉफी वैल्यू चेन डेवलपमेंट परियोजना और चाखेसांग जनजाति के लिए फुटसेरोमी गांव में कल्चरल एक्टिविटी कॉम्प्लेक्स के निर्माण पर खर्च की जा रही है।
पूर्वोत्तर राज्यों को आवंटित की गई राशि का विवरण
मिजोरम को विकास कार्यों के लिए 6.29 करोड़ रुपये का आबंटन किया गया है। इस राशि का उपयोग चम्फाई के बेथेल वेंग में निर्माणाधीन सभागार, वांगछिया में सांस्कृतिक पर्यटन बुनियादी ढांचे, मिजो अदरक की खेती, आईटी-आधारित खनिज मानचित्रण और सियाहा जिले में सामुदायिक अवसंरचना के विकास में किया जाएगा। असम को कुल 4.42 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसका इस्तेमाल कोकराझार स्थित बिनेश्वर ब्रह्मा इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र छात्रावासों के निर्माण और तिनसुकिया में सिंगफो समुदाय से जुड़ी कल्याणकारी पहलों के लिए किया जा रहा है।
सिक्किम को 4.17 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं, जो शहरों में सीसीटीवी निगरानी प्रणाली स्थापित करने और रेनॉक के सरकारी डिग्री कॉलेज में बहुउद्देश्यीय हॉल के निर्माण में लगाए जाएंगे। अरुणाचल प्रदेश के लिए 3.40 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिससे यिंगकियोंग के जिला अस्पताल में नर्सिंग हॉस्टल, दिबांग घाटी में अचेसो पर्यटन परिसर और जीरो सिग्नेचर व्यू पॉइंट का विकास कार्य होगा। इसके साथ ही त्रिपुरा और मणिपुर को भी उनकी चल रही योजनाओं की ताजा किस्तें प्रदान की गई हैं। त्रिपुरा में जनजातीय युवाओं के लिए मॉडल हाट, खुमुलवंग इको-पार्क का उन्नयन और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। मणिपुर में इस आबंटन से औषधीय पौधों का दस्तावेजीकरण, जनजातीय अनुसंधान संस्थान में संग्रहालय-सह-पुस्तकालय का निर्माण और नदी कचरा संग्रहण इकाइयां स्थापित करने का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
क्षेत्रीय संस्थानों और तकनीकी केंद्रों को मिला सहयोग
क्षेत्रीय स्तर के निकायों के लिए निर्धारित 7.42 करोड़ रुपये में से उत्तर पूर्व केन एंड बैम्बू डेवलपमेंट काउंसिल (एनईसीबीडीसी) को बांस कारीगर क्लस्टर विकसित करने के लिए 2.88 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं पूर्वोत्तर हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम (एनईएचएचडीसी) को हथकरघा कौशल विकास के विस्तार के लिए 2.35 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। दूरदराज के स्कूलों में विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एनईसीटीएआर को एसटीईएम (STEM) प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए 1.24 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अतिरिक्त एनईडीएफआई, एनआईटी मेघालय, आईआईएम शिलांग, नेहू और एनईएसएसी जैसे प्रमुख संस्थानों को भी आवश्यक वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया है।
45.48 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाएं पूरी
फंड जारी करने के साथ ही सितंबर महीने में 45.48 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 14 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सफल समापन और क्लोजर की पुष्टि भी की गई है। मेघालय में पश्चिम खासी हिल्स के मावथाद्राइशन में 4.75 करोड़ रुपये की लागत से स्कूल भवनों का निर्माण पूरा हुआ है, जबकि शिलांग के लम शात स्नगी केंचेस ट्रेस में सेंग खासी री रैद लबान का सांस्कृतिक परिसर 9.28 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुआ है।
नगालैंड में कोहिमा के यासोगेई में 9.17 करोड़ रुपये का म्यूजिक एंड यूथ एक्टिविटी सेंटर और फेक गवर्नमेंट हाई स्कूल में मूलभूत सुविधाओं से युक्त 1.92 करोड़ रुपये का सभागार बनकर तैयार हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में पासीघाट स्थित जेएन कॉलेज में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से छात्राओं का हॉस्टल (जी+1) पूरा किया गया, जबकि सिक्किम में लिंबू समुदाय के लिए 4.53 करोड़ रुपये की पिछड़ी जाति योजना संपन्न हुई।
असम के कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में 11.55 करोड़ रुपये के कुल एनईसी सहयोग से कृषि क्षेत्र की तीन प्रमुख परियोजनाएं पूरी हुईं। इनमें लुम्बाजोंग विकास खंड में 4.97 करोड़ रुपये, इसी खंड के सरमेन हान्से गांव में 1.97 करोड़ रुपये और पश्चिम कार्बी आंगलोंग के चिनथोंग खंड में 4.61 करोड़ रुपये की ग्रामीण विकास परियोजनाएं शामिल हैं। अन्य पूर्ण परियोजनाओं में एनईसीबीडीसी के तहत 2.10 करोड़ रुपये के सात बांस प्रसंस्करण प्रोटोटाइप प्रोसेसर और मिजोरम के 150 स्कूलों को कवर करने वाला 11.08 करोड़ रुपये का आईटी शिक्षा कार्यक्रम शामिल हैं। इसके साथ ही शिलांग के 20 संस्थानों में संचालित शी-फ्रेंडली प्रोग्राम, एवीजीसी और आईटी-आईटीईएस प्रशिक्षण का अंतर-वित्तपोषण, एआई एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर संगोष्ठी और एनएसएसएस 2026 को भी औपचारिक रूप से पूरा कर लिया गया है। यह संपूर्ण पहल पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के तहत क्षेत्र के नागरिकों के लिए शिक्षा, कृषि, पर्यटन और रोजगार के बेहतर अवसर तैयार करने पर केंद्रित है।
























