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मिजोरम मानवाधिकार आयोग को राज्य सरकार मुहैया कराएगी बुनियादी ढांचा और स्टाफ, मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने दिया आश्वासनमिजोरम
24 सित॰ 2026, 4:16 pm (5 घंटे पहले)· 0

मिजोरम मानवाधिकार आयोग को राज्य सरकार मुहैया कराएगी बुनियादी ढांचा और स्टाफ, मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने दिया आश्वासन

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने नवगठित राज्य मानवाधिकार आयोग को बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की जरूरतें प्राथमिकता पर पूरी करने का भरोसा दिया है।

मिजोरम में हाल ही में गठित राज्य मानवाधिकार आयोग के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य प्रशासन ने जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने नवगठित आयोग को पूरा प्रशासनिक सहयोग देने का वादा किया है, जिसमें आवश्यक जनशक्ति, मूलभूत ढांचा और अन्य जरूरी संसाधनों की तत्काल आपूर्ति शामिल है। इस संबंध में आइजोल स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी।

प्रशासनिक जरूरतों और संसाधनों पर हुई अहम चर्चा

बैठक के दौरान आयोग की अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) मार्ली वानकुंग ने मुख्यमंत्री के समक्ष आयोग से जुड़ी प्राथमिक आवश्यकताओं का ब्योरा रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए निकाय को अपने वैधानिक दायित्वों का निष्पादन करने के लिए योग्य कर्मचारियों, कार्यालयीन व्यवस्था और मजबूत बुनियादी ढांचे की तत्काल दरकार है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने आयोग के शिष्टमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार इन तमाम मांगों को प्राथमिकता के आधार पर हल करेगी ताकि आयोग स्वतंत्र और प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर सके।

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जस्टिस (रिटायर्ड) मार्ली वानकुंग ने आयोग के पहले अध्यक्ष और सदस्यों की औपचारिक नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नया मानवाधिकार आयोग नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करने के लिए संकल्पबद्ध है। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि कामकाज की शुरुआत होते ही आयोग को अब तक तीन औपचारिक शिकायतें भी प्राप्त हो चुकी हैं।

गौहाटी हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुआ था आयोग का गठन

मिजोरम के पहले राज्य मानवाधिकार आयोग का औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह 29 जुलाई, 2026 को राजभवन में संपन्न हुआ था। गौहाटी हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस (रिटायर्ड) मार्ली वानकुंग ने इस वैधानिक निकाय के पहले अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके साथ मिजोरम न्यायिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी वनलालेन्माविया और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के लाल थिंगलोवा ने आयोग के सदस्य के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी।

इस आयोग की स्थापना जोफा वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर गौहाटी हाईकोर्ट द्वारा दिए गए कड़े निर्देशों के आधार पर की गई है। इस याचिका में मिजोरम के भीतर एक स्वतंत्र राज्य स्तरीय मानवाधिकार निकाय गठित करने की मांग की गई थी, जिसके बाद सरकार ने इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए।

सवाल-जवाब

मिजोरम राज्य मानवाधिकार आयोग की पहली अध्यक्ष कौन बनी हैं?
गौहाटी हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस (रिटायर्ड) मार्ली वानकुंग को आयोग की पहली अध्यक्ष बनाया गया है।
आयोग के अन्य सदस्य कौन-कौन हैं?
मिजोरम न्यायिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी वनलालेन्माविया और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के लाल थिंगलोवा इसके सदस्य हैं।
आयोग के सदस्यों का शपथ ग्रहण कब हुआ था?
आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों ने 29 जुलाई, 2026 को राजभवन में पद की शपथ ली थी।
आयोग की स्थापना किस अदालती आदेश के तहत हुई?
जोफा वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की जनहित याचिका पर गौहाटी हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इस आयोग का गठन किया गया।
कामकाज शुरू होने के बाद आयोग को अब तक कितनी शिकायतें मिली हैं?
आयोग की अध्यक्ष के अनुसार कामकाज शुरू होने के बाद से अब तक तीन औपचारिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 घंटे पहले

देर से ही सही, पर मिजोरम में मानवाधिकार आयोग का बनना और सरकार का इसे तुरंत स्टाफ व दफ्तर देने का वादा करना अच्छा कदम है। कोर्ट की फटकार के बाद ही सही, अब कम से कम आम लोगों की शिकायतों पर सुनवाई का रास्ता तो साफ हुआ।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·4 घंटे पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। जब मैं पिछले साल आइजोल गया था, तब स्थानीय लोगों ने मानवाधिकार आयोग न होने पर अपनी चिंता खुलकर जताई थी। आखिरकार अब लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 घंटे पहले

आइजोल में जब मैं पिछली बार कोर्ट के मामलों की कवरेज के सिलसिले में गया था, तब स्थानीय वकीलों से मानवाधिकार आयोग न होने पर लंबी चर्चा हुई थी। अब जस्टिस मार्ली वानकुंग के नेतृत्व में आयोग बनने और मुख्यमंत्री लालदुहोमा द्वारा स्टाफ व बुनियादी ढांचा तुरंत मुहैया कराने के आश्वासन से उम्मीद जगी है कि आम लोगों की शिकायतों पर वाकई सुनवाई होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·4 घंटे पहले

करन भाई, सच कहा आपने। जब मैं पिछली बार आइजोल गया था, तो वकीलों और स्थानीय लोगों में इसी बात की चिंता थी कि मानवाधिकारों के मामलों के लिए कोई मजबूत संस्था ही नहीं है। अब उम्मीद है कि जस्टिस मार्ली वानकुंग के आने से चीजें बदलेंगी।

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