देश में जल्द ही रुपये का एक नया रूप दिखाई देगा। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठक के बाद प्लास्टिक करेंसी को लेकर लंबे समय से चल रहे इंतजार को खत्म करते हुए साफ टाइमलाइन बता दी। उन्होंने कहा कि 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट अगले वित्तवर्ष की शुरुआत में सर्कुलेशन में उतार दिए जाएंगे। इसी के साथ गवर्नर ने यह भी संकेत दिया कि छोटे नोटों के अलावा 100 और 500 रुपये के बड़े नोट भी आने वाले समय में प्लास्टिक वर्जन में जारी किए जा सकते हैं।
अप्रैल 2027 के आसपास बाजार में आएंगे पॉलीमर नोट
गवर्नर मल्होत्रा के मुताबिक, रिज़र्व बैंक का लक्ष्य अगले वित्तवर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल 2027 के करीब पॉलीमर नोट लॉन्च करने का है। इसके तहत सबसे पहले 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों को सर्कुलेशन में लाने की तैयारी चल रही है। खास बात यह है कि आरबीआई इन नए नोटों को मौजूदा कागज वाले नोटों से पूरी तरह बदलने के बजाय दोनों को साथ-साथ चलाने की योजना बना रहा है। यानी फिलहाल बाजार में कागज और पॉलीमर, दोनों तरह की करेंसी एक साथ मौजूद रहेगी।
टिकाऊ भी है और खर्चा भी बचाएगा
पॉलीमर नोटों को आमतौर पर कागज के नोटों से कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ माना जाता है। ये सर्कुलेशन में लंबे समय तक बने रह सकते हैं, जिसका सीधा फायदा यह होगा कि रिज़र्व बैंक को बार-बार नई करेंसी छापने की जरूरत नहीं पड़ेगी और नोट छपाई पर होने वाला खर्च भी घटेगा। इसके अलावा पॉलीमर नोट नमी से भी सुरक्षित रहते हैं, जल्दी गंदे नहीं होते और इनके फटने या कटने की आशंका भी कागज के नोटों के मुकाबले काफी कम रहती है।
100 और 500 के नोट पर भी मिला संकेत
गवर्नर ने साफ इशारा दिया कि अगर 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों का प्रयोग सफल रहता है, तो इसके बाद 100 और 500 रुपये के बड़े नोट भी प्लास्टिक वर्जन में लॉन्च किए जाएंगे। हालांकि इसके लिए फिलहाल कोई ठोस तारीख सामने नहीं आई है, बल्कि यह छोटे नोटों के अनुभव पर निर्भर करेगा।
2009 में भी हुई थी कोशिश, तब नहीं मिली थी सफलता
यह पहला मौका नहीं है जब आरबीआई ने पॉलीमर करेंसी को लेकर मंशा जताई हो। इससे पहले साल 2009 में भी रिज़र्व बैंक ने प्लास्टिक के नोट लॉन्च करने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय यह योजना कामयाब नहीं हो पाई थी। अब करीब डेढ़ दशक बाद आरबीआई एक बार फिर इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
10 और 20 के नोटों को ही पायलट प्रोजेक्ट में क्यों चुना
आरबीआई ने सबसे पहले 10 और 20 रुपये के नोटों को ही पॉलीमर में उतारने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि सर्कुलेशन में इन नोटों की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। हालांकि वैल्यू के हिसाब से देखा जाए तो इनका हिस्सा महज 1.4 फीसदी ही बैठता है। यही वजह है कि आरबीआई ने कम रकम वाले लेकिन ज्यादा संख्या में इस्तेमाल होने वाले इन्हीं नोटों को अपने पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया, ताकि आम लोगों तक पॉलीमर करेंसी की पहुंच बड़े पैमाने पर सुनिश्चित की जा सके। गवर्नर ने बताया कि जैसे ही 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट तैयार हो जाएंगे, इन्हें बैंकों की शाखाओं और एटीएम के जरिये सर्कुलेशन में भेजा जाएगा और मौजूदा कागज के नोटों के साथ ही बाजार में चलाया जाएगा।



















